
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर बंगाल के चार दिनों का दौरा पूरा कर गुरुवार शाम को बागडोगरा हवाई अड्डे से कोलकाता लौट गई। लौटने के बाद सीएम ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) की अधिसूचना जारी होने के संकेतों के बीच तृणमूल कांग्रेस ने इसके विरोध में मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने निर्णय लिया है कि काली पूजा, दीवाली और भाई फोटा (भाई दूज) के बाद कोलकाता में एक विशाल विरोध रैली आयोजित की जाएगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, यह रैली नवंबर के पहले सप्ताह में आयोजित की जा सकती है। इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी मुख्य वक्ता होंगे। बताया गया है कि रैली के मंच से मुख्यमंत्री और अभिषेक बनर्जी राज्यभर में चलाए जाने वाले ‘एंटी-एसआईआर आंदोलन’ की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री इस दौरान एसआईआर के खिलाफ पार्टी के प्रमुख तर्क भी सार्वजनिक करेंगी। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया है कि प्रदेश के भाजपा नेता, जैसे विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर, एसआईआर अधिसूचना जारी होने से पहले ही यह कैसे बता रहे हैं कि कितने मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि अगर किसी विशेष समुदाय के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए तो वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर एक भी वास्तविक मतदाता का नाम हटाया गया, तो पश्चिम बंगाल उबल पड़ेगा। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर केंद्र सरकार और भाजपा की “साजिश” है, जिसके जरिए राज्य में “एनआरसी लागू करने की तैयारी” की जा रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री इसलिए एसआईआर का विरोध कर रही हैं ताकि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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