
– जानिए सांता क्लॉज की असली कहानी, आखिर कौन है जो मोजे में डाल जाता है गिफ्ट
– गिफ्ट लेकर सांता क्लॉज आया क्योंकि घर को आपने Orbit Sanitations और SIKKIM को HARDWARE से है सजाया
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: क्रिसमस डे का सेलिब्रेशन शुरू हो गया है ये हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता हैं। इस दिन को खास बनाने के लिए क्रिसमस ट्री, केक, केंडल्स के साथ सभी हर्ष और उल्लास से इस त्योहार को मनाते हैं। क्रिसमस का नाम सुनते ही बच्चों के मन में सफेद लंबी दाढ़ी, सिर पर टोपी और लाल रंग के कपड़े पहने सांता क्लॉज की तस्वीर सामने आ जाती है। हर साल बच्चों को सांता क्लॉस के आने का बेसब्री से इंतजार रहता है।इस वर्ष भी सांता क्लॉज ने संदेश दिया है। क्रिसमस की खुशियां है मनाना तो प्रीमियम डालमिया का आटा मैदा और सूजी ही घर में लेकर आना। आपको गिफ्ट जरूर मिलेगा क्योंकि आपने अपने घर को Orbit Sanitations और SIKKIM को HARDWARE से सजाया है।अगर नहीं सजाया तो मौका है नए साल का। क्या कहा पता भूल गए!सांता क्लॉज है ना याद दिलाने के लिए..ये पता हैएक बेसमेंट फ्लोर, क्रिसेंट टॉवर, लेमन ट्री होटल के नीचे तो दूसरा मून लाइट कैपिटल, एलजी-01; 3rd माइल, (सोना पेट्रोल पंप के पास) सेवक रोड सिलीगुड़ी। जहां तक प्रीमियम डालमिया की बात है तो आप तो जानते ही है वह है खालपाड़ा कालीनाथ रोड में। सांता क्लॉज को क्रिसमस फादर के नाम से भी जाना जाता है। सफेद बड़ी-बड़ी दाढ़ी वाले सांता कंधे पर गिफ्ट्स से भरा झोला टांगे, उपहार देकर बच्चों की खुशी दोगुनी कर देते हैं।ऐसा कहा जाता है कि क्रिसमस ईव पर सांता 8 बारहसिंगों वाली गाड़ी (स्लेज) पर बैठकर आते हैं और अपनी झोली से गिफ्ट्स निकालकर बच्चों को बांटते हैं. लेकिन सांता क्लॉज हैं कौन, जो हर साल क्रिसमस पर बच्चों को तोहफा देते हैं?आइये जानते हैं आखिर कौन हैं संत निकोलस, जिन्हें आज सांता क्लॉज के नाम से जाने जाते हैं।प्रचलित कहानियों के अनुसार चौथी शताब्दी में एशिया माइनर की एक जगह मायरा जिसे आज तुर्की के नाम से जाना जाता है में निकोलस का जन्म हुआ था। निकोलस हमेशा गरीबों की मदद करते थे। उन्हें सीक्रेट गिफ्ट देकर खुश करने की कोशिश करते थे। एक बार की बात है कि एक गरीब पिता के पास अपनी बेटियों की शादी करने के लिए पैसे नहीं थे। इस बात का पता लगते ही निकोलस उनकी मदद करने पहुंच गए उस व्यक्ति ने अपना मोजा चिमनी में सूखने के लिए रखा था, इसी दौरान निकोलस ने सोने से भरा बैग उस चिमनी पर रख दिया। तभी से पूरी दुनिया में क्रिसमस के दिन मोजे में गिफ्ट देने का रिवाज चला आ रहा है। मोजे में सोने से भरा बैग उसके घर में गिरा. ऐसा उसके साथ एक बार नहीं, तीन बार हुआ. आखिर उस व्यक्ति ने निकोलस को देख लिया. धीरे-धीरे निकोलस की कहानी लोगों तक पहुंचने लगी. इसके बाद पूरी दुनिया में क्रिसमस के दिन मोजे में गिफ्ट देने यानी सीक्रेट सेंटा का रिवाज शुरू हो गया. निकोलस को लोग संत मानने लगे और उन्हें आदर के साथ क्लॉज कहना शुरू कर दिया. कैथोलिक चर्च में उन्हें संत का दर्जा दिया गया, इसलिए उन्हें सांता क्लॉज कहा जाने लगा। क्रिसमस के दिन ईसाई समुदाय के बच्चे रात में अपने घर के बाहर जुराबें सुखाते हैं. मान्यता है कि सांता क्लॉज रात में चुपके से आकर उनकी जुराब में उपहार भरकर चले जाते हैं, इस वजह से बच्चों में इस त्योहार को लेकर काफी उत्साह और उमंग होती हैं. पूरी दुनिया क्रिसमस का त्योहार हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाती है।










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