– समिति के सदस्य लेंगे प्रस्ताव पर फैसला,सरकार ने मुर्शिदाबाद कॉलेज का बदला नाम
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल असेंबली में आज बजट सत्र का आखिरी खासा गहमागहमी भरा रहा। असेंबली में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मुस्लिम मंत्रियों के आग्रह पर पेश किया गया।इस पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया और सदन का वॉकआउट कर दिया सदन के बाहर जाकर भी बीजेपी विधायकों ने अपना विरोध जारी रखा और इसे सत्तापक्ष की मनमानी बताया।
अग्निमित्रा पॉल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव: अग्निमित्रा पॉल फैशन डिजाइनर से राजनेता बनीं हैं और मौजूदा समय में बीजेपी विधायक हैं।।उनके खिलाफ ममता सरकार में कृषि एवं संसदीय कार्य मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने असेंबली में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। मंत्री ने कहा कि अग्निमित्रा पॉल ने शुक्रवार को सदन में एक ऐसी टिप्पणी की थी, जिससे अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत हुई थीं। वहीं बीजेपी नेताओं ने इस आरोप को गलत बताया. पार्टी विधायक मिहिर गोस्वामी ने कहा कि हमारी विधायक अपने बयान पर स्पष्टीकरण देना चाहती थीं। स्पीकर की ओर से भी अनुमति दिए जाने के बाद उन्होंने स्पष्टीकरण भी दिया। इसके बावजूद उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया गया। यह अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्रिमंडल सदस्यों के आग्रह पर किया गया।
समिति के सदस्य लेंगे प्रस्ताव पर फैसला: पहले भाजपा विधायकों ने सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन किया और बाद में नारे लगाते हुए सदन से बाहर चले गए। सदन से बाहर आने के बाद उन्होंने विधानसभा के मैदान में भी नारे लगाते हुए अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इसके बाद स्पीकर बिमान बंदोपाध्याय ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को विशेषाधिकार समिति को भेज दिया। समिति इस मामले की जांच करके आगे की कार्रवाई तय करेगी।।इसके साथ ही ममता सरकार ने मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मुर्शिदाबाद महाराजा कृष्णनाथ विश्वविद्यालय कर दिया है। इस संबंध में आज शनिवार को असेंबली में प्रस्ताव पेश किया, जो पास हो गया।
सरकार ने मुर्शिदाबाद कॉलेज का बदला नाम:
मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय अधिनियम, 2018 के तहत कृष्णनाथ कॉलेज को उन्नत करके की गई थी। कृष्णनाथ कॉलेज, पश्चिम बंगाल के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित कॉलेजों में से एक है।इसकी स्थापना 1853 में बरहामपुर में हुई थी. इस कॉलेज की स्थापना महाराजा कृष्णनाथ ने सामाजिक सुधार, शिक्षा और सांस्कृतिक समन्वय की भावना को मूर्त रूप देने के लिए की थी
उनके नाम पर विश्वविद्यालय का नाम करने से इसे एक विशिष्ट और गौरवपूर्ण ऐतिहासिक पहचान मिलती है।यह इसे अन्य राज्य विश्वविद्यालयों से अलग करती है। साथ ही इसे सही ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मजबूती से स्थापित करती है।








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