– शुक्रवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कुकी-जो बहुल इलाकों में ‘पूर्ण बंद’ का किया आह्वान
बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा: मणिपुर में नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। लंबे समय से जारी राष्ट्रपति शासन के हटने और भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कुकी समुदाय के संगठनों ने तीखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद चुराचांदपुर जिले के आदिवासी संगठन ‘जॉइंट फोरम ऑफ सेवन’ (जेएफ-7) ने शुक्रवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कुकी-जो बहुल इलाकों में ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान किया है। संगठन ने अलग कुकी प्रशासन की मांग दोहराते हुए समुदाय के सभी सदस्यों से लोकतांत्रिक तरीके से विरोध में शामिल होने की अपील की है।
कुकी जो काउंसिल ने कहा कि यदि समुदाय का कोई विधायक संगठन के सामूहिक निर्णय की अनदेखी करता है तो वह ऐसा अपनी व्यक्तिगत हैसियत में करेगा और ऐसे ‘एकतरफा फैसलों’ से उत्पन्न परिणामों के लिए संगठन जिम्मेदार नहीं होगा।
कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और सड़क पर बांस के डंडे रखकर नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का विरोध किया।बुधवार को ही भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के 13 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। गौरतलब है कि एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे और राज्य में महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद राष्ट्रपति शासन लागू था, जिसे अब हटा लिया गया है। सरकार में संतुलन बनाने के लिए दो उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं: नेमचा किपजेन: भाजपा विधायक (कुकी समुदाय से)।
एल. दिखो: नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के विधायक कुकी संगठनों का कड़ा विरोध और चेतावनी: नई सरकार के गठन, विशेष रूप से कुकी विधायकों की भागीदारी को लेकर कुकी समुदाय के संगठनों में भारी आक्रोश है।
‘टोटल शटडाउन’ का आह्वान: चुराचांदपुर स्थित जनजातीय संगठन ‘ज्वाइंट फोरम ऑफ सेवन’ (JF7) ने शुक्रवार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कुकी-जो बहुल इलाकों में पूर्ण बंद का आह्वान किया है। संगठन ने मांग की है कि कुकी समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन की व्यवस्था की जाए।
विधायकों को अल्टीमेटम: कुकी जो काउंसिल और कई उग्रवादी समूहों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि समुदाय का कोई भी विधायक अगर अपनी मर्जी से सरकार में शामिल होता है, तो वह उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस ‘एकतरफा निर्णय’ के बाद पैदा होने वाले किसी भी परिणाम के लिए वे जिम्मेदार नहीं होंगे।
सड़कों पर प्रदर्शन: सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कांगपोकपी जिले के लीमाखोंग जैसे इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाकर और बांस लगाकर रास्ता जाम कर दिया। विशेष रूप से नेमचा किपजेन के उपमुख्यमंत्री बनने का विरोध किया जा रहा है।
हिंसा का काला इतिहास: मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत 3 मई, 2023 को हुई थी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय द्वारा ‘अनुसूचित जनजाति’ (ST) के दर्जे की मांग के विरोध में कुकी समुदायों ने ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ निकाला था।अब तक के नुकसान के आंकड़े: मौतें: कम से कम 260 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं (मैतेई, कुकी और सुरक्षाकर्मी)।विस्थापन: हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
जहां एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल कर शांति स्थापित करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुकी संगठनों का यह कड़ा रुख बताता है कि मणिपुर में विश्वास की कमी अब भी बरकरार है। अलग प्रशासन की मांग और विधायकों पर दबाव राज्य की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।








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