– अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब
अशोक झा, मुंबई: महाराष्ट्र के लाडले ‘दादा’ का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में रखा गया है, जहां हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। उनका अंतिम संस्कार आज सुबह 11 बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ इसी मैदान पर किया जाएगा। एनसीपी नेता किरण गुजर ने बताया कि अंतिम यात्रा सुबह 9 बजे गदिमा सभागार से शुरू होगी, जो मुख्य मैदान तक पहुंचेगी, जहां अजित पवार पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे।विमान हादसे में ‘दादा’ के निधन की खबर ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। जैसे ही यह खबर फैली कि अजित पवार अब हमारे बीच नहीं रहे, हर तरफ मातम छा गया। अब सबकी निगाहें कल होने वाले उनके अंतिम संस्कार पर टिकी हैं, जो उनके पैतृक गांव काटेवाड़ी में किया जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक उपमुख्यमंत्री की अंतिम विदाई कैसे होती है? क्या उन्हें भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की तरह राजकीय सम्मान मिलता है? और क्या आप भी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हो सकते हैं? आइए जानते हैं सत्ता के गलियारों से लेकर श्मशान घाट तक के वो नियम, जो इस अंतिम विदाई को खास बनाते हैं।
मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार और राजकीय सम्मान का फैसला
भारत के गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार, राजकीय सम्मान (State Honour) के साथ विदाई मुख्य रूप से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपालों के लिए अनिवार्य होती है। संवैधानिक तौर पर उपमुख्यमंत्री का पद एक कैबिनेट मंत्री के बराबर माना जाता है। ऐसे में अजित पवार को राजकीय सम्मान देना पूरी तरह से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विवेक और राज्य सरकार के फैसले पर निर्भर था। महाराष्ट्र सरकार ने बिना देरी किए अजित पवार के कद और राज्य के विकास में उनके योगदान को देखते हुए न केवल तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, बल्कि उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ विदा करने का निर्णय लिया है। यह फैसला दर्शाता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का स्थान कितना ऊंचा था।
तिरंगे की मर्यादा और गार्ड ऑफ ऑनर का प्रोटोकॉल
राजकीय सम्मान मिलने का सबसे बड़ा प्रतीक यह होता है कि पार्थिव शरीर को तिरंगे (राष्ट्रीय ध्वज) में लपेटा जाता है। भारतीय ध्वज संहिता 2002 के तहत यह सम्मान हर किसी को नहीं मिल सकता, इसके लिए आधिकारिक आदेश अनिवार्य है। कल काटेवाड़ी में जब अजित पवार की अंतिम यात्रा निकलेगी, तो उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा होगा। प्रोटोकॉल के मुताबिक, राज्य पुलिस की एक विशेष टुकड़ी उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देगी। विदाई के सबसे भावुक क्षणों में औपचारिक रूप से बंदूकों की सलामी दी जाएगी। राजकीय शोक के कारण राज्य की सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और इस दौरान किसी भी तरह के सरकारी मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।
सुरक्षा का घेरा और आम जनता की भागीदारी
अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए भावनाओं का केंद्र थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उनके समर्थक और आम जनता अंतिम संस्कार में शामिल हो सकती है? प्रोटोकॉल के अनुसार, अंतिम दर्शन के लिए प्रशासन एक निश्चित समय और स्थान तय करता है जहां समर्थक अपने नेता को श्रद्धांजलि दे सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा और प्रोटोकॉल के कड़े नियमों के कारण श्मशान घाट या अंतिम संस्कार स्थल पर प्रवेश काफी सीमित रखा जा सकता है। प्रशासन और पुलिस की ओर से काटेवाड़ी में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है ताकि अंतिम विदाई गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। परिवार और चुनिंदा वीवीआईपी ही चिता के करीब मौजूद रहेंगे, जबकि समर्थकों के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है।
महाराष्ट्र की परंपरा और आखिरी विदाई की तैयारी
महाराष्ट्र में यह परंपरा रही है कि जिन नेताओं ने राज्य की मिट्टी के लिए काम किया है, उन्हें प्रोटोकॉल की बेड़ियों से ऊपर उठकर सम्मान दिया जाता है। अजित पवार के मामले में भी प्रोटोकॉल विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। कल जब उनका पार्थिव शरीर काटेवाड़ी की मिट्टी में विलीन होगा, तो वह एक युग का अंत होगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा और नियमों के बीच भी जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। बारामती के लोग अपने लाडले नेता को विदा करने के लिए पलकें बिछाए बैठे हैं, और प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि ‘दादा’ की यह अंतिम विदाई इतिहास के पन्नों में स सम्मान दर्ज हो।








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