बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की तैयारी, चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना उद्देश्य
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों के साथ हुआ उत्पीड़न भाजपा और चुनाव आयोग की “संयुक्त साजिश” का नतीजा है। इसका उद्देश्य राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का रास्ता तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार दोपहर मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी में रैली को संबोधित करते हुए कहा, “न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का कर्तव्य है। आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण प्रशासन पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन मैं आप सभी से अनुरोध करती हूं कि उकसावे में न आएं। जिन लोगों के नाम न्यायिक प्रक्रिया में हटाए गए हैं, उनकी शिकायतें वास्तविक हैं, यह मैं जानती हूं। लेकिन अगर आपको मुझ पर भरोसा है, तो उत्तेजित न हों। हमें पश्चिम बंगाल की रक्षा करनी है। यह मत भूलिए कि मालदा की घटना के पीछे भाजपा है और उसे आयोग का सहयोग मिला है। उनका एकमात्र उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करवाना है।”उन्होंने कहा कि बीजेपी और चुनाव आयोग आग से खेल रहे हैं। ममता ने कहा है कि अनुभवी अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है, प्रशासन उनके हाथ में नहीं है और केंद्र ने ‘सुपर प्रेसिडेंट रूल’ लगा दिया है। ममता ने इसके लिए पूरी तरह गृहमंत्री अमित शाह को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि बंगाल में ऐसे हालात के लिए शाह को गृहमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए।ममता बनर्जी ने क्या कहा?: मालदा में 9 घंटे तक न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर बंधक बनाने की घटना को चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत द्वारा सुनियोजित साज़िश बताये जाने पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना बीजेपी और चुनाव आयोग की गंदी साज़िश का नतीजा है। ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में चुनावी रैली में कहा, ‘बीजेपी और चुनाव आयोग आग से खेल रहे हैं। मालदा की कल की दुर्भाग्यपूर्ण घटना उनकी गंदी साजिश का नतीजा है। उन्होंने बंगाल के अनुभवी अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को हटा दिया, जो हर गली-मोहल्ले को अच्छी तरह जानते थे। उनकी जगह केंद्र के ऐसे अधिकारी लगा दिए जो बंगाल की भूगोल, जनसंख्या और जमीनी हकीकत कुछ भी नहीं जानते। ये बाहर के लोग स्थानीय हालात संभाल नहीं पा रहे। अब बीजेपी इस एक घटना का इस्तेमाल पूरे बंगाल को बदनाम करने के लिए कर रहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ ममता ने कहा कि इस घटना के लिए यदि कोई असली दोषी है तो वह अमित शाह हैं। उन्होंने कहा, ममता ने यह भी कहा कि अब प्रशासन उनके हाथ में नहीं रहा। चुनाव आयोग ने सारी कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले ली है। उन्होंने इसे ‘सुपर प्रेसिडेंट रूल’ बताया और कहा कि ‘मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं।’ राज्य पर मेरा नियंत्रण नहीं: ममता
तृणमूल कांग्रेस की नेता ने चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा प्रशासन में बदलाव किए जाने के बाद उन्हें अब राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर अपना नियंत्रण महसूस नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है… किसी ने मुझे इस बारे में जानकारी नहीं दी।’ उन्होंने कहा, “प्रशासन अब मेरे हाथ में नहीं है। चुनाव आयोग क़ानून-व्यवस्था को नियंत्रित कर रहा है… वे गृह मंत्री अमित शाह की बात सुनते हैं। सभी अधिकारियों को बदल दिया गया है… मेरी शक्तियाँ चुनाव आयोग को हस्तांतरित कर दी गई हैं। यह तो ‘सुपर राष्ट्रपति शासन’ जैसा है।” उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग क़ानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने आगे कहा, ‘मेरी सभी शक्तियाँ छीन ली गई हैं; मैंने पहले कभी ऐसा चुनाव आयोग नहीं देखा।’ ममता बनर्जी की यह सख़्त टिप्पणी तब आई है जब सुप्रीम कोर्ट ने मालदा की इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई और राज्य सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी:
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई की। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, “यह घटना अदालत की गरिमा को चुनौती देने की सुनियोजित कोशिश है। बंगाल सबसे ज़्यादा पोलराइज़्ड राज्य है। यहाँ सब लोग सिर्फ राजनीतिक भाषा बोलते हैं। ममता सरकार की यह ‘आपराधिक लापरवाही’ है।” बेंच ने कहा कि रात 11 बजे तक कलेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे थे। 5 साल के बच्चे को खाना-पीना नहीं दिया गया। कोर्ट ने मालदा कलेक्टर, एसपी, डीजीपी और मुख्य सचिव को 6 अप्रैल को कोर्ट में तलब किया है और कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट के अहम आदेश
एसआईआर अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात किए जाएँ। ख़तरा महसूस करने वाले अधिकारियों के घर पर भी सुरक्षा दी जाए। जाँच सीबीआई या एनआईए को सौंपी जाए। बीडीओ ऑफिस में एक बार में सिर्फ 3-5 लोग ही अंदर जा सकें। मालदा की क्या थी घटना?: मालदा के कालीचक-2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस यानी बीडीओ के बाहर बुधवार को बड़ा प्रदर्शन हुआ। एसआईआर प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए थे। लोग न्यायिक अधिकारियों से मिलना चाहते थे, लेकिन अनुमति नहीं मिली। शाम 4 बजे भीड़ ने ऑफिस को घेर लिया और 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया। रिपोर्ट है कि एक अधिकारी के 5 साल के छोटे बच्चे को भी अंदर बंद रखा गया। 9 घंटे बाद रात 1 बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन्हें सुरक्षित निकाला। निकालते समय भीड़ ने पथराव किया। एक कार का शीशा टूट गया और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों का पीछा किया।प्रदर्शन आसपास के इलाक़ों में भी फैल गया। लोगों ने एनएच-12 को बाँस और फर्नीचर से जाम कर दिया, टायर जलाए और सड़क पर चूल्हा जलाकर खाना बनाया। इससे लग रहा था कि वे लंबे समय तक धरना देने को तैयार थे। चुनाव का बिगड़ता माहौल: बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे। एसआईआर प्रक्रिया में 63 लाख से ज़्यादा नाम काटे गए और 60 लाख नामों पर फ़ैसला बाक़ी है। बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने ममता सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्थिति को बिगड़ने दिया। यह घटना बंगाल के चुनावी माहौल को और गर्म कर रही है। दोनों तरफ़ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।








Hits Today : 2000
Who's Online : 7