त्रि-भाषा फॉर्मूला के तहत कक्षा 6 से 9 तक विदेशी भाषाएं सीखेंगे छात्र
बस्ती। अब सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में बच्चों को स्पेनिश, फ्रेंच और कोरियन भाषा पढ़ाई जाएगी। कक्षा 6 से 9 तक के बच्चों को त्रि-भाषा फार्मूला के तहत भाषाएं सिखाई जाएंगी। इसमें एक विदेशी भाषा भी होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू यह पहल संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी। स्कूल प्रबंधन अगर चाहे तो वह एक भाषा का चुनाव अपने स्कूल के लिए कर सकता है। सीबीएसई बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 6 से 9 तक तीन भाषाओं का नियम (त्रि-भाषा फॉर्मूला) अनिवार्य कर दिया है। इसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। स्कूलों में भी स्पेनिश, फ्रेंच और कोरियन जैसी विदेशी भाषाओं को अतिरिक्त या तीसरी व चौथी भाषा के रूप में पढ़ाई जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते वैश्विक परिवेश में तीन भाषाओं की शिक्षा विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। इससे न सिर्फ बच्चों को अन्य भाषाओं का ज्ञान होगा बल्कि इससे वे भीड़ से अलग होकर रोजगार की
राह भी आसानी से चुन सकेंगे। मातृभाषा, राष्ट्रभाषा और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा का ज्ञान बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके अनुसार, बहुभाषी शिक्षा से विद्यार्थी अन्य देशों की संस्कृति, परंपरा और शिक्षा प्रणाली को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
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प्रधानाचार्य एवं सिटी कोऑर्डिनेटर सीबीएसई गोविंद सिंह सीबीएसई स्कूलों विद्यालयों में हिंदी, अंग्रेजी और विदेशी भाषा में स्पेनिश, फ्रेंच, कोरियन को बढ़ावा दिया जा रहा है। । इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करना है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल एक भाषा का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बहुभाषी विद्यार्थी प्रशासन, शिक्षा, तकनीक, पर्यटन, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं। विदेशों में उच्च शिक्षा, शोध और रोजगार के अवसरों के दौरान भाषा का ज्ञान छात्रों के लिए बड़ी ताकत साबित होता है।








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