उप्र बस्ती जिले में संचालित तीन प्रमुख टोल प्लाजा के अनुबंध-पत्रों का समय से नवीनीकरण नहीं कराए जाने के मामले में स्टांप विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। सहायक आयुक्त स्टांप ने संबंधित टोल संचालक कंपनियों को नोटिस जारी कर अनुबंध-पत्रों और अन्य आवश्यक अभिलेखों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। नोटिस जारी होने के बाद टोल कंपनियों में हलचल बढ़ गई है।
विभागीय जांच में सामने आया है कि कई टोल कंपनियों के अनुबंध-पत्रों की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन निर्धारित समय के भीतर उनका नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए विभाग ने संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
सहायक आयुक्त स्टांप कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में अनुबंध-पत्र, नवीनीकरण से संबंधित अभिलेख तथा स्टांप शुल्क से जुड़े दस्तावेज निर्धारित अवधि के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि अभिलेखों की जांच के बाद आवश्यक होने पर बकाया स्टांप शुल्क और जुर्माने की वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी।
जिले के विभिन्न राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों पर संचालित इन टोल प्लाजा से प्रतिदिन करीब 20 से 25 हजार वाहनों का आवागमन होता है। इससे टोल कंपनियों को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में अनुबंध संबंधी अनियमितताओं को लेकर विभाग सतर्क हो गया है।
13.37 करोड़ रुपये स्टांप शुल्क बकाया
निबंधन विभाग के अनुसार जिले की विभिन्न टोल कंपनियों पर कुल 13.37 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क बकाया है। यह मामला वर्तमान में जिलाधिकारी न्यायालय में विचाराधीन है। विभाग का आरोप है कि मेसर्स प्रकाश अस्फाल्टिंग एंड टोल हाईवेज, शिवा कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड, सुनील जिंदल, मेसर्स प्रकाश अस्फाल्टिंग एंड टोल हाईवेज इंडिया लिमिटेड तथा मनोज कुमार बंसल ने अनुबंध के तहत देय स्टांप शुल्क समय पर जमा नहीं किया।
एग्रीमेंट के बिना हो रही टोल वसूली
सहायक महानिरीक्षक निबंधन देवेन्द्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2004 में राष्ट्रीय राजमार्ग-28 के निर्माण के बाद लखनऊ और बिहार के बीच आवागमन सुगम हुआ। इसके बाद विभिन्न टोल कंपनियां नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से टोल वसूली का कार्य कर रही हैं, लेकिन कई मामलों में निबंधन विभाग में विधिवत पंजीकृत एग्रीमेंट नहीं कराए गए। इससे विभाग को हर वर्ष करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में अक्सड़ा, मड़वानगर और चौकड़ी स्थित टोल प्लाजा एवं संग्रह केंद्रों को नोटिस जारी कर अनुबंध-पत्रों की मांग की गई है। दस्तावेज प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, न्यायालय का निर्णय आने के बाद बकाया स्टांप शुल्क की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी।








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