उप्र बस्ती जिले में रिश्तों के बदलते दौर में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। करीब 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला अंतिम समय तक बेटे के आने की आस लगाए रहीं। बार-बार कहती थीं, ‘मेरा दिलीप आएगा… वह मुझे यहां से ले जाएगा।’ लेकिन बेटा नहीं आया। मंगलवार को जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इसके बाद सेवा समर्पण भाव परिवार के सदस्यों ने पुत्र धर्म निभाते हुए मुड़घाट पर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार कराया। करीब 25 दिन पहले हर्रैया नगर पंचायत स्थित आसरा आवास के एक छोटे कमरे में बुजुर्ग महिला और एक वृद्ध पुरुष दयनीय हालत में मिले थे। दोनों कई दिनों से भूख-प्यास और बीमारी से जूझ रहे थे। सूचना पर सेवा समर्पण भाव परिवार की टीम मौके पर पहुंची। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के सहयोग से दोनों को बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हर्रैया पहुंचाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान संस्था के सदस्य लगातार दोनों की सेवा में जुटे रहे। महिला की हालत गंभीर बनी हुई थी। इस दौरान वह हर आहट पर दरवाजे की ओर देखतीं और बेटे के आने की उम्मीद करती रहीं। मंगलवार दोपहर उन्होंने अंतिम सांस ली। परिजनों के नहीं पहुंचने पर संस्था के मुखिया दिलीप पांडेय ने मुड़घाट पर वैदिक रीति- रिवाज से उन्हें मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। संस्था के सत्यम मिश्रा, राहुल गौतम, उमंग पांडेय समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे








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