
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: पूर्वोत्तर भारत के प्रवेशद्वार में आने वाले 21 सितंबर यानि रविवार सुपर संडे होने वाला है।ज्यादातर घरों में चूल्हा चौका बंद रहेगा। पूरे शहर में उत्सव, उत्साह और अनुशासन का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। इस दौरान जहां एक ओर पुलिस की सुरक्षा होगी तो दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुशासन लोगों के सिर चढ़कर बोलेगा। यह हम इसलिए कह रहे है क्योंकि शुभ महालया, महाराजा अग्रसेन जयंती, आरएसएस पथ संचलन और प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महालया पर बाघाजतिन एथलेटिक क्लब द्वारा आयोजित सिलीगुड़ी महालया रोड रेस का आयोजन होगा। इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। महालया
का अर्थ है पितृ पक्ष का अंत और देवी पक्ष का आरंभ। इस दिन ज्यादातर लोग महानंदा नदी सहित अन्य घाटों पर जाकर अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं। इस बंगाली संस्कृति के अलावा, महालया की सिलीगुड़ी के लिए एक और खास पहचान है।बाघाजतिन एथलेटिक क्लब द्वारा आयोजित सिलीगुड़ी महालया रोड रेस। इस वर्ष यह रेस अपने 41वें वर्ष में आयोजित होगा। देश के प्रसिद्ध खिलाड़ियों से लेकर बंगाली फिल्म जगत के सितारे तक, बंगाली फिल्म जगत के सितारे इसमें भाग ले चुके हैं। लोकप्रिय बंगाली फिल्म स्टार कौशानी मुखर्जी और पूर्व भारतीय स्टार क्रिकेटर सदानंद विश्वनाथ इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वही दूसरी ओर महालया पर मां भारती को आह्वान कर बंगाल से आसुरी शक्ति का नाश करने लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिलीगुड़ी में पथ संचलन हर वर्ष निकाला जाएगा। कहते है कि महालया 21 सितंबर 2025 को है. महालया का अर्थ है “महान निवास” या “देवी का घर”. यह पितृ पक्ष के समाप्त होने और शक्ति पक्ष देवी दुर्गा के आगमन की शुरुआत का प्रतीक है।महालया पर पितरों की विदाई होती है। इसके साथ माता के आगमन की तैयारियां शुरू हो जाती है. सर्व पितृ अमावस्या को महालया अमावस्या भी कहा जाता है। इस मौके पर शताब्दी वर्ष का आनन्द लेते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजयादशमी के उलक्ष्य में रविवार को पथ संचलन निकालेगी। पथ संचलन का नगर में जगह-जगह समाजसेवियों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया जाएगा। पथ संचलन से पहले सभी स्वंयसेवक पारंपरिक वेशभूषा पूर्ण गणवेश धारण कर रामकृष्ण मैदान में एकत्रित हुए। यहां संघ के पदाधिकारियों ने विजयादशमी पर्व के बारे में स्वयंसेवकों को विस्तार से बताएंगे। इसके साथ ही संघ को मजबूत करने व गांव-गांव तक संगठन के विस्तार को लेकर चर्चा की जाएगी। यह संगठन भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखने व आदर्शों को बढ़ावा देता है और बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को मजबूत करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करता है। इसका ध्येय मातृभूमि के लिए नि:स्वार्थ सेवा भाव से कार्य करना है। प्रार्थना व भगवा ध्वज प्रणाम के बाद कदम-कदम मिलाकर बैंड बाजा की धुन में पथ संचलन निकाला जाएगा। इसका उद्देश्य राष्ट्र को उत्तम दिशा की ओर अग्रसर करना और हिन्दू समाज को जाग्रत करना होता है। संचलन को निकालने को लेकर और कार्यकर्ताओं के संचालन साल में हर वर्ष की भांति निकाला जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य रहता है कि हमने शाखाओं पर क्या सीखा और क्या किया उसका संचलन के रूप में प्रयोग किया जाता है। प्राचीन काल में ज्ञानशक्ति, मंत्रशक्ति और युद्धशक्ति प्रबल हुआ करती थी। किन्तु इस युग में संगठन की शक्ति प्रबल है। 100 वर्ष पहले क्रान्तिकारी डॉ. केशव हेडगेवार ने समाज को संगठित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी, जिसके स्वयंसेवक आज समाज के हर क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से समाज सेवा और समाज जागरण का कार्य कर रहे हैं।
महाराजा अग्रसेन जयंती : महाराजा अग्रसेन को अग्रवाल और अग्रहरि समुदायों का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने व्यापारियों के शहर अग्रोहा की स्थापना की थी। मान्यता है कि उनके वंश में 18 गोत्र और 18 पुत्र हुए, जिनसे अग्रवाल समाज की स्थापना हुई है। महाराजा अग्रसेन के गुरु का नाम मुनि तांडव्य बताया जाता है। महाराजा अग्रसेन को उदार और दयालु राजा कहा जाता है। उन्होंने पशु बलि की परंपरा बंद की थी। साथ ही समाज में बराबरी की व्यवस्था को भी लागू किया था। उनके सम्मान और जन्मजयंती पर सिलीगुड़ी में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इन सभी कार्यक्रमों को लेकर सिलीगुड़ी का उत्सवी माहौल मानो 10 दिन पूर्व ही मां दुर्गा पूजा का आनन्द लेकर आएगा।







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