Close Menu
Roaming ExpressRoaming Express
    Latest News

    Basti News:ओम फर्नीचर एवं प्रोजेक्ट का भव्य शुभारंभ, सभी सामानों पर 20 प्रतिशत छूट

    October 26, 2026

    Basti News: ट्रक के नीचे दबकर पिता और दो बेटियों की मौत, निमंत्रण से बाइक से घर लौट रहे थे तीनों

    October 26, 2026

    Basti News:शिक्षक निर्वाचन के लिए 14 केंद्रों पर मतदान शुरू, 2045 मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग

    October 23, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Tuesday, October 27
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Home » गोवर्धन पूजा आज: कैसे बाल कृष्ण बन गए गोवर्धन पर्वत उठाकर गिरधर

    गोवर्धन पूजा आज: कैसे बाल कृष्ण बन गए गोवर्धन पर्वत उठाकर गिरधर

    आज लगाए जाएंगे 56 भोग, श्रीमद्भभागवत पुराण, महाभारत और हरिवंश पुराण में मिलता है इसका जिक्र
    Roaming ExpressBy Roaming ExpressOctober 21, 2025 धर्म एवं आस्था

    अशोक झा/ सिलीगुड़ी: दीपावली के एक दिन के बाद आज परवा यानी प्रथमा तिथि को गोवर्धन पूजा मनाई जा रही है। पांच दिन की पर्व परंपरा में ये ऐसा पहला त्योहार है, जिसका वैदिक आधार तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसकी मान्यताएं सीधे पौराणिक कथाओं से निकल कर सामने आई हैं. गोवर्धन पूजा का जिक्र श्रीमद्भभागवत पुराण, महाभारत और हरिवंश पुराण में मिलता है। 22अक्टूबर यानी आज गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जा रहा है।।गोवर्धन पूजा के दिन गायों की आराधना की जाती है, जिन्हें देवी लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है। सिलीगुड़ी इस्कॉन मंदिर में इसकी बड़ी तैयारी चल रही है। इसके अलावा घरों में किया जाने वाला पारम्परिक गोवर्धन पूजन संध्याकाल में किया जाता है। ज्योतिषों के अनुसार गोवर्धन पूजन के कई शुभ समय है। संध्याकाल : सामान्य जन के लिए घर पर पूजन का समय शाम 3.45 मिनट से 05 बजे तक और शाम 7 बजे से 8 बजकर 15 मिनट तक स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया में श्रेष्ठ है।
    गोवर्धन पूजा का जिक्र श्रीमद्भभागवत पुराण, महाभारत और हरिवंश पुराण में मिलता है।भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह पूजा असल में विशुद्ध ग्रामीण परंपरा की पूजा पद्धति की झलक है. जिसे समुदाय, संगठन या फिर एक परिवेश के लोगों के द्वारा मिलजुल कर किया जाता है। महाभारत में प्रसंग आता है कि ब्रज (गोकुल, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव) के लोग वैदिक आधार पर इंद्र की पूजा करते थे. इंद्र की इस वैदिक पूजा में समय के साथ बहुत आडंबर आ चुका था, साथ ही इस पूजा में आस्था का अभाव और डर का समावेश अधिक हो चुका था। बड़े यज्ञ अनुष्ठान में कई-कई दिनों की मेहनत से तैयार हुए दूध, दही, घी, छाछ और यहां तक की नई फसल का बहुत सा हिस्सा भी इंद्र यज्ञ में खर्च होता था। इसके साथ ही प्रकृति से भी लोगों का जुड़ाव कम था, तब श्रीकृष्ण ने इंद्र की इस पूजा का विरोध किया और सबको सलाह दी कि इसके स्थान पर नदी, ग्राम, गोधन, पशुधन, धरती माता, वृक्ष और इस पवित्र गोवर्धन पर्वत की पूजा की जानी चाहिए. क्योंकि नदी का जल जीवन देता है. गोधन से ही जीवन यापन के लिए दूध-दही, घी मिलता है. पशुधन किसान के बराबर ही मेहनत करते हैं ताकि अनाज उगाया जा सके. धरती अपने सीने पर हल की नोक सहकर भी बीज उत्पादन कर अनाज देती है. वृक्ष पत्थर मारने पर भी फल देते हैं और गोवर्धन ब्रज क्षेत्र की सीमा बनकर सुरक्षा देता है. वर्षा होने में सहायक होता है। किशोर कृष्ण की बात मानकर नंदबाबा और सभी ग्रामीणों ने इंद्र की पूजा रोककर गोवर्धन पूजा की थी. तब क्रोधित देवराज ने ब्रज क्षेत्र को डुबो देने का निश्चय किया. सात दिन की घोर वर्षा हुई. तब श्रीकृष्ण ने लोगों की सुरक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर थाम लिया। सात दिन तक वह यूं ही खड़े रहे और इंद्र का क्रोध और उसके अभिमान को आंखें दिखाते रहे।
    आखिर देवराज इंद्र ने हार मानी। उन्होंने श्रीकृष्ण के परब्रह्म स्वरूप को पहचाना और फिर उनकी शरण में गए। इस तरह श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र पर विजय पाई। हरिवंश पुराण और भागवत पुराण में वर्णित यही कथा आज के गोवर्धन पूजा का आधार है। श्रीकृष्ण ने आठ दिन के पर्व की नींव डाली थी. जिसमें परवा (प्रथमा) के दिन गोवर्धन पूजा से लेकर कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन गोपाष्टमी तक के पर्व शामिल थे। ब्रजवासी आठ दिनों तक प्रकृति की पूजा का उत्सव मनाते थे, जिसमें अन्न, नदी, जंगल, धरती और उनके पशुधन शामिल थे।
    आज गोवर्धन पूजा श्रीकृष्ण के उसी गिरधारी स्वरूप के स्मरण का दिन है. गोवर्धन पर्वत अब खुद में एक लोकदेवता हैं। वह कई अलग-अलग परिवारों के कुल देवता भी हैं. ऐसा भी मानते हैं कि श्रीकृष्ण ही अपने अचल स्वरूप में गोवर्धन पर्वत हैं। मथुरा के ब्रज क्षेत्र से लेकर राजस्थान की नाथ परंपरा तक में गिरधारी स्वरूप की बड़ी मान्यता है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकल कर, राजस्थान, गुजरात और फिर महाराष्ट्र के सागरीय तट तक पहुंचती है। जिसमें स्वरूप कोई भी हो, मूलरूप से श्रीकृष्ण की ही पूजा होती है।
    गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा: धार्मिक मान्यता के अनुसार, ”एक बार देव राज इंद्र को अपनी शक्तियों का घमंड हो गया था. इंद्र के इसी घमंड को दूर करने के लिए भगवान कृष्ण ने एक विशेष लीला रची. एक बार गोकुल में सभी लोग तरह-तरह के पकवान बना रहे थे और हर्षोल्लास के साथ नृत्य-संगीत कर रहे थे. यह देखकर भगवान कृष्ण ने अपनी मां यशोदा जी से पूछा कि आप लोग किस उत्सव की तैयारी कर रहे हैं? भगवान कृष्ण के सवाल पर मां यशोदा ने उन्हें बताया हम देव राज इंद्र की पूजा कर रहे हैं. तब भगवान कृष्ण ने उनसे पूछा कि, हम उनकी पूजा क्यों करते हैं?
    यशोदा मैया ने उन्हें बताया कि, भगवान इंद्र देव की कृपा हो तो अच्छी बारिश होती है जिससे हमारे अन्न की पैदावार अच्छी होती है और हमारे पशुओं को चारा मिलता है. माता की बात सुनकर भगवान कृष्ण ने कहा कि, ऐसे तो हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाय तो वहीं चारा चरती हैं और वहां लगे पेड़-पौधों की वजह से ही बारिश होती है.
    भगवान कृष्ण की बात मानकर गोकुल वासी गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे यह सब देखकर इंद्र देव क्रोधित हो गए और उन्होंने इसे अपना अपमान समझा और ब्रज के लोगों से बदला लेने के लिए मूसलाधार बारिश शुरू कर दी. बारिश इतनी विनाशकारी थी कि गोकुल वासी घबरा गए. तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया और सभी लोग इसके नीचे आकर खड़े हो गए.
    भगवान इंद्र ने 7 दिनों तक लगातार बारिश की और 7 दिनों तक भगवान कृष्ण ने इस पर्वत को उठाए रखा। भगवान कृष्ण ने एक भी गोकुल वासी और जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचने दिया, ना ही बारिश में भीगने दिया। तब भगवान इंद्र को अहसास हुआ कि उनसे मुकाबला कोई साधारण मनुष्य तो नहीं कर सकता है। जब उन्हें यह बात पता चली कि मुकाबला करने वाले स्वयं भगवान श्री कृष्ण हैं तो उन्होंने अपनी गलती के लिए क्षमा याचना मांगी और मुरलीधर की पूजा करके उन्हें 56 भोग लगाए। तब से ही गोवर्धन पर्वत की पूजा की परंपरा चली आ रही है।

    Post Views: 158

    Related Posts

    बंगाल में कल होगा फिर से 15 मतदान केंद्रों पर मतदान, सुरक्षा होगी अभूतपूर्व

    May 1, 2026By Roaming Express

    अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर परिसर के शिव मंदिर पर मुख्यमंत्री ने किया ध्वजारोहण

    April 29, 2026By Roaming Express

    बंगाल की 142 सीटों पर वोटिंग जारी, 1448 उम्मीदवारों की किस्मत का होगा फैसला

    April 28, 2026By Roaming Express

    बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव के पहले मनी लांड्रिंग केस में ईडी की ताबड़तोड़ छापामारी

    April 24, 2026By Roaming Express

    सांसद सुधांशु त्रिवेदी और मनन मिश्रा सिलीगुड़ी में कल खोलेंगे राज्य कानून व्यवस्था की पोल

    April 18, 2026By Roaming Express

    19 अप्रैल को अक्षय तृतीया,जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, सोना-चांदी खरीदने का समय

    April 18, 2026By Roaming Express
    Top Posts

    Basti News:ओम फर्नीचर एवं प्रोजेक्ट का भव्य शुभारंभ, सभी सामानों पर 20 प्रतिशत छूट

    October 26, 2026

    Basti News: ट्रक के नीचे दबकर पिता और दो बेटियों की मौत, निमंत्रण से बाइक से घर लौट रहे थे तीनों

    October 26, 2026

    Basti News:शिक्षक निर्वाचन के लिए 14 केंद्रों पर मतदान शुरू, 2045 मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग

    October 23, 2026
    Don't Miss

    Basti News:ओम फर्नीचर एवं प्रोजेक्ट का भव्य शुभारंभ, सभी सामानों पर 20 प्रतिशत छूट

    October 26, 2026

     पांच साल की गारंटी के साथ मिलेंगे आधुनिक कमर्शियल फर्नीचर बस्ती। शहर के कंपनी बाग…

    Basti News: ट्रक के नीचे दबकर पिता और दो बेटियों की मौत, निमंत्रण से बाइक से घर लौट रहे थे तीनों

    October 26, 2026

    Basti News:शिक्षक निर्वाचन के लिए 14 केंद्रों पर मतदान शुरू, 2045 मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग

    October 23, 2026

    बस्ती में दुर्गा पूजा का मेला देखकर लौट रहे यात्रियों से भरा ऑटो पलटा, दो महिलाओं समेत आठ घायल

    October 23, 2026
    LATEST NEWS

    Basti News:ओम फर्नीचर एवं प्रोजेक्ट का भव्य शुभारंभ, सभी सामानों पर 20 प्रतिशत छूट

    October 26, 2026

    Basti News: ट्रक के नीचे दबकर पिता और दो बेटियों की मौत, निमंत्रण से बाइक से घर लौट रहे थे तीनों

    October 26, 2026

    Basti News:शिक्षक निर्वाचन के लिए 14 केंद्रों पर मतदान शुरू, 2045 मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग

    October 23, 2026
    LANGUAGE
    OUR VISITORS
    1827474
    Hits Today : 3340
    Who's Online : 20
    CONTACT US

    CHIEF EDITOR
    Ramesh Mishra

    ADDRESS
    Shiv Nagar, Turkahiya, Gandhi Nagar, Basti, Uttar Pradesh – 272001

    MOBILE NO.
    +91 7985035292

    EMAIL roamingexpressbst@gmail.com

    WEBSITE
     www.roamingexpress.com

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.