
अजीत मिश्र
माना जाता है कि बिहार का रोहतास जिला पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है लेकिन आजादी के बाद से हीं पर्यटन विकास के मामले में इस जिले की राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा समझ के परे है।
बताया जाता है कि काफी जद्दोजहद के बाद रोहतास किला और चौरासन महादेव मंदिर जाने हेतु रोपवे निर्माण के लिये 13 करोड़ रुपया आवंटित किया गया था।काम भी शुरू हुआ बहुत धीमी गति से, लेकिन जब कई तरह की बाधाओं के बावजूद काम पूरा हुआ और जब रोपवे का ट्रायल शुरू हुआ तब जनता के 13 करोड़ रुपये सहित ट्राली और पीलर का कचूमर निकल गया।बताते हैं कि रोपवे निर्माण के दौरान ही क्वालिटी पर सवाल उठा था लेकिन कमीशन खोरी के वीर बहादुर अधिकारियों ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया।13 करोड़ से अधिक की लागत से इस रोपवे को बनाया जा रहा था।पटखौलिया निवासी मदन पांडेय का आरोप है कि यह सिर्फ रोपवे के टूटने का मामला नहीं बल्कि लाखों पर्यटकों और इस उद्द्योग से लाभान्वित होनेवाले हजारों बेरोजगारों के उमीद टूटने का भी सवाल है। अफसरशाही और ठेकावादी गठजोड़ पर भी सवालिया निशान है।लोगों का आरोप है कि बुनियाद में हीं धांधली हो जाने के कारण इसके अब शुरू होने और इसके प्रति लोगों में विश्वास पैदा होने में संदेह है।








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