– महिला पत्रकार को बचाने की बजाय बंगाल पुलिस ने क्यों खड़े किए हाथ? ममता बनर्जी का बेतुका बयान
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुए हिंसा से राज्य की सियासत गरमा गई है। हिंसा की शुरुआत शुक्रवार को झारखंड में मुर्शिदाबाद के एक प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन की हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन से शुरू हुई। प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा और मीडिया और पुलिस पर हमले किये गए। शनिवार को फिर से तनाव भड़कने के बाद कम से कम 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की तरफ से कार्रवाई की जानकारी दी गई. मीडिया से बात करते हुए, मुर्शिदाबाद के पुलिस सुपरिटेंडेंट कुमार सन्नी राज ने बताया कि बेलडांगा में हिंसा भड़काने वाले 30 लोगों को अरेस्ट किया गया है। पीड़िता सोमा मैती एक चैनल में कार्यरत हैं, रिपोर्टिंग के दौरान हिंसक भीड़ का शिकार हुईं। इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था, पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार (18 जनवरी 2026) को बेलडांगा के बरुआ मोड़ और पंचराहा मोड़ पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। NH-12 पर टायर जलाकर जाम लगाया गया और साथ ही रेलवे गेट तोड़कर सिग्नल को नुकसान पहुँचाया गया। इसके चलते कृष्णनगर-लालगोला रेल रूट पर ट्रेन सेवाएँ रोकनी पड़ीं। हिंसक भीड़ ने ट्रकों में तोड़फोड़ की, एक बस पर पथराव किया, जिसमें पाँच यात्री घायल हुए। हालात बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस का सहारा लेना पड़ा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेलडांगा गांव में एक प्रवासी मजदूर की मौत को लेकर तनावपूर्ण माहौल था। इसी सिलसिले में सोमा मैती अपने एक फोटो-जर्नलिस्ट सहकर्मी के साथ मौके पर रिपोर्टिंग के लिए पहुंची थीं। तभी कथित तौर पर गुस्साई भीड़ ने पत्रकारों को निशाना बना लिया और उन पर अचानक हमला कर दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, सोमा मैती को सड़क पर ही मुक्कों, थप्पड़ों और लातों से पीटा गया, साथ ही उनके साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसा भयावह अपराध भी किया गया। हमलावरों ने उनके कपड़े खींचे और बाल पकड़कर घसीटने की कोशिश की। जब वह जान बचाकर भागने लगीं, तो भीड़ ने उनका पीछा भी किया। इस हिंसक घटना में केवल सोमा मैती ही नहीं, बल्कि विभिन्न मीडिया संस्थानों के कुल 12 पत्रकार और कर्मचारी भी भीड़ के हमले में घायल हुए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इलाके में पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों को रोकने में प्रशासन नाकाम रहा और स्थिति को तत्काल नियंत्रण में नहीं लिया जा सका।
हमले के बाद सोमा मैती को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं वहां काम करने गई थी, लेकिन जिस तरह से मुझे पीटा गया, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। अपने पत्रकारिता के इतने वर्षों में मैंने कभी इतना भयावह अनुभव नहीं किया। दो लोग मेरे पैर पकड़ रहे थे, एक मेरे बाल खींच रहा था और दूसरा मेरे कपड़े खींच रहा था।”बेलडांगा में हिंसा पर सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ लोग पॉलिटिकल मकसद से सपोर्ट कर रहे हैं। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे किसी के भड़काने में न आएं। उन्होंने कहा कि माइनॉरिटीज का गुस्सा नैचुरल है, लेकिन हर एक के खिलाफ FIR फाइल की गई है। हम उन्हें अरेस्ट भी करेंगे. जो हो रहा है वह गलत है और यह बीजेपी शासित राज्यों में हो रहा है तो बीजेपी बंगाल में कैसे कह सकती है कि हमें वोट दो? क्या बीजेपी-शासित राज्यों में बंगाली में बोलना ज़ुल्म है?
गद्दारों ने भड़काई हिंसा… अभिषेक बनर्जी ने साधा निशाना: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को मुर्शिदाबाद में हिंसा के लिए हुमायूं कबीर का नाम लिए बिना उन पर हमला बोला। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बेलडांगा में अशांति सीधे तौर पर ‘गद्दारों’ ने भड़काई है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, “मुझे पता चला कि बीजेपी के बाबू बेलडांगा में अशांति फैला रहे हैं। इस धरती पर एक और गद्दार पैदा हो गया है. इसमें उसका भी सीधा सपोर्ट है। मुर्शिदाबाद को इन गद्दारों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए. हमें उन लोगों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए जो बांटने वाली राजनीति के बीज बो रहे हैं, लोगों को लोगों के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं।
राज्यपाल कार्रवाई करें… शुभेंदु अधिकार ने की मांग
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मुर्शिदाबाद में हिंसा पर कहा कि मैं मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में चल रही सांप्रदायिक हिंसा से बहुत चिंतित और गुस्से में हूं, जहां बेगुनाह हिंदू परिवारों को उनके घरों, दुकानों और पूजा की जगहों पर टारगेटेड हमलों का सामना करना पड़ रहा है।









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