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    Home » गणतंत्र शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में चालीस बार, अथर्ववेद में 9 बार और अन्य ग्रंथों में कई बार किया गया

    गणतंत्र शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में चालीस बार, अथर्ववेद में 9 बार और अन्य ग्रंथों में कई बार किया गया

    Roaming ExpressBy Roaming ExpressJanuary 25, 2026 राष्ट्रीय

    – अंतरिक्ष में भारत झंडे गाड़ रहा है, रक्षा क्षेत्र में हम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे

    – धन-धान्य के भंडार भरे हुए हैं, भारत की युवा शक्ति देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही

    अशोक झा/ नई दिल्ली:
    राष्ट्र अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। पूरी दुनिया को गणतंत्र की अवधारणा भारत ने ही दी है। गणतंत्र शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में चालीस बार, अथर्ववेद में 9 बार और अन्य ग्रंथों में कई बार किया गया है।गणतंत्र का मतलब है शासन तंत्र में जनता की हिस्सेदारी। इसी दिन भारत ने संविधान को स्वीकार कर लागू किया था। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत आज प्रगति के पथ पर है और वह विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। अंतरिक्ष में भारत झंडे गाड़ रहा है, रक्षा क्षेत्र में हम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। भारत कभी रक्षा सामग्री का सबसे बड़ा आयातक रहा, आज वह निर्यातक बन चुका है। धन-धान्य के भंडार भरे हुए हैं, भारत की युवा शक्ति देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सशक्त बनकर उभरा है। भारत अब किसी भी महाशक्ति के आगे झुकने वाला नहीं, उसकी विदेश नीति स्वतंत्र हैै, किसी विश्वशक्ति का िपछलगू भी नहीं है। भारत ‘सिंह’ के सामन दहाड़ रहा है। देश में अभी भी शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका के क्षेत्र में अनेक विडम्बनाएं देखने को मिलती रहती हैं। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और बढ़ते अपराध भी सामाजिक क्षेत्र की बड़ी चुनौतियां हैं। प्रदूषण जैसे मुद्दे पर न्यायपालिका लगातार व्यवस्थापिका को फटकार लगा रही है लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा। इतने विशाल लोकतंत्र की अपनी भी समस्याएं हैं। जातिवाद, साम्प्रदायिकता और बढ़ता धार्मिक कट्टरवाद आज भी देश के लिए खतरा बने हुए हैं।
    इस बार गणतंत्र दिवस पर भारत के सामने कई बड़ी चुनौतियां आ खड़ी हुई हैं। दुनिया में चल रहे युद्धों, भूराजनीतिक उथल-पुथल, बदलती विश्व व्यवस्था और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ युद्ध से परिस्थिितयां बहुत जटिल हो चुकी हैं। देश के सामने आर्थिक चुनौतियों की विपरीत स्थितियों से निपटने का चैलेंज हमारे सामने है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने विरोधियों और समर्थकों को विभाजित कर दिया है। अमेरिका वेनेजुएला, ईरान और डेनमार्क के ग्रीनलैंड पर एक साथ अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है जिससे शक्ति संतुलन बिगड़ रहा है। वैश्विक सौहार्द, विदेश नीति, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और शासन कला के सामान्य नियम अब लागू नहीं होंगे। अच्छी बात तो यह है कि घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतक उम्मीदों से भरे हुए हैं। मोदी सरकार ने ट्रंप के टैरिफ के असर को कम करने में सफलता भी प्राप्त कर ली है। भारत को नए बाजार मिल रहे हैं लेकिन विश्व में जो अराजक उथल-पुथल हो रही है जिससे अर्थव्यवस्था सीधे प्रभावित हो रही है। इसका अर्थ यही है कि भारत को अप्रत्याशित वैश्विक व्यापक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और उन पर विजय पाने के लिए आगामी बजट में क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को आगामी बजट में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए पंूजीगत व्यय, बड़े से लेकर लघु उद्योग तक को राहत प्रदान करने तथा लक्षित सामाजिक क्षेत्र व्यय और संरचनात्मक सुधारों पर नए सिरे से जोर देना होगा। समग्र औद्योगिक विकास सुदृढ़ और समावेशी बना रहे। इसके लिए क्रांतिकारी विशिष्ट उपाय करने होंगे।
    भारत लगातार एक के बाद एक देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर रहा है। गणतंत्र दिवस परेड में इस बार एक विशेष कूटनीतिक संदेश भी जुड़ा हुआ है। इस बार भारत ने किसी एक राष्ट्र अध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की बजाय दो यूरोपीय नेताओं को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंित्रत किया है। यह यूरोपीय उद्योग की अध्यक्ष उर्सुला वानडेर लेयन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा है। यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया जाना भारत यूरोपीय संघ सहयोग, मुक्त व्यापार समझौते और सामरिक साझेदारी के क्षेत्र में नए अध्यक्ष का संकेत देता है। भारत अब वैश्विक मंच पर बहुपक्षीय रणनीतियां और साझेदारी को महत्व दे रहा है। पड़ोसी देश बंगलादेश, नेपाल की राजनीतिक उथल-पुथल भी हमारे लिए चुनौतियां खड़ी कर रही है। पाकिस्तान, बंगलादेश और चीन की दुर्भि-संधियां भी खतरा बन रही हैं क्योंिक अब युद्धों का स्वरूप बदल चुका है इसलिए भारतीय सेना के तीनों अंगों को अब भविष्य के युद्धों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसलिए इस वर्ष की परेड देश की विविधता, सांस्कृति और प्रगति का संगम होने के साथ-साथ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन भी होगी। परेड को देखकर हर किसी को गर्व होगा कि भारत अब नई इबारत िलख रहा है। एक ओर कर्त्तव्यपथ पर शक्ति, सांस्कृति और नई प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन होगा तो दूसरी ओर न्यायपालिका, मीडिया और जनता के बीच लोकतंत्र की िदशा को लेकर बहस भी तेज है। भारत को सीमाओं पर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए विशाल स्तर पर नई प्रौद्योगिकी की जरूरत है। आज का दिन इस बात का आंकलन करने का भी मौका है कि हमने इतने वर्षों में क्या खोया, क्या पाया। हमारी बैंकिंग प्रणाली काफी मजबूत है लेिकन रुपया, रोजगार और निर्यात चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत की विकास दर के अनुमान काफी अच्छे हैं लेकिन कृषि क्षेत्र और औद्योगिक उत्पादन में सुधार की बहुत जरूरत है। ग्रामीण विकास की ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गणतंत्र दिवस राष्ट्र की गरिमा, श्रेष्ठता और महानता को समर्पित राष्ट्रीय पर्व है। अगर हम अन्य कई देशों को देखे तो वहां लोकतंत्र की जड़ें अभी तक जम नहीं पाई लेकिन हमारा गणतंत्र अक्षुण रहा है। देश के भीतर कुछ ऐसी अराजक ताकतें पनप रही हैं जो संविधान कानून को कुछ नहीं मानती। राजनीतिक विरोध तो स्वीकार्य है लेकिन राष्ट्र की एकजुटता बनाये रखना सभी का परम कर्त्तव्य है। राष्ट्र निर्माताओं की वह पीढ़ी बहुत पहले जुदा हो गई जिसने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। अब चौथी पीढ़ी आ गई है जिसे गणतंत्र के गौरव का एहसास और अभिमान होना चाहिए। जेन जी से भारत को बहुत उम्मीदें हैं। उन्हें अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए ऐसा समृद्ध और शक्तिशाली भारत बनाना होगा जिस पर भावी पीढ़ी गर्व कर सके।

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