
– कथा में बताया गया कैसे एक गरीब बन गया धनवान, बिहार नेपाल में लगता है मेला
अशोक झा/ प्रयागराज: आज रविवार 1 फरवरी, 2026 के दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानि माघी पूर्णिमा का पावन पर्व है। हिन्दू धर्म में यह पूर्णिमा बेहद शुभ और लाभदायी मानी जाती है।शास्त्र कहते हैं कि इस दिन किए गए स्नान, दान और जप से जीवन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।आज के दिन बिहार के ठाकुरगंज और पास ही नेपाल में क्षीर समुद्र और किचक बध मेला का आयोजन होता है। आइए जानते हैं, यह पूर्णिमा क्यों खास है, आज चंद्रोदय का समय क्या है और किस विधि से पूजा करने से सबसे अधिक लाभ होगा?माघी पूर्णिमा क्यों है विशेष?माघी पूर्णिमा को सभी पूर्णिमाओं में विशेष स्थान प्राप्त है. अध्यात्मिक मान्यता है कि इस दिन देवता स्वर्ग से पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और पवित्र नदी में स्नान करते हैं. इसलिए इस दिन गंगा, यमुना या संगम जैसे पावन जल में स्नान करने से जीवन में सुख, शांति और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।माघ महीने का जल भी अमृत समान फलदायी माना जाता है।पवित्र स्नान का महत्व: सुबह सूर्योदय से पहले पवित्र जल में स्नान करने की परंपरा है. ऐसा माना जाता है कि इससे शरीर के रोग हल्के होते हैं और कुंडली के ग्रहदोष शांत होते हैं, विशेषकर चन्द्र दोष से मुक्ति मिलती है. श्रद्धा से किया गया यह स्नान आज के दिन अत्यंत फलदायी है।
दान का पुण्यफल: माघी पूर्णिमा पर पवित्र नदी-सरोवर में स्नान और उसके बाद दान का विशेष महत्व है. तिल, गुड, घी, अन्न और कंबल दान करने से जीवन की दरिद्रता दूर होती है. पुराणों में कहा गया है कि आज किया गया दान कई जन्मों तक शुभ फल प्रदान करता है. गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ कार्य है. यह कार्य आज पूरे दिन किया जा सकता है।माघी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस पूर्णिमा से जुड़ी एक रोचक कथा भी है। जो भी व्यक्ति माघी पूर्णिमा का व्रत करता है, उसे ये कथा जरूर सुननी चाहिए, तभी उसे इस व्रत का पूरा फल प्राप्त होगा। आगे जानिए माघी पूर्णिमा से जुड़ी रोचक कथा…प्रचलित कथा के अनुसार एक बार देवर्षि नारद भगवान विष्णु के पास गए और उनसे पूछा कि ‘कलियुग में ऐसा कौन-सा व्रत है, जिसे करने से मनुष्य अपने सभी कष्टों से मुक्त होकर पुण्य लाभ लेकर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। देवर्षि नारद की बात सुनकर भगवान विष्णु ने कहा ‘जो व्यक्ति माघ मास की पूर्णिमा का व्रत नियम पूर्वक करता है, भगवान सत्यनारायण की कथा सुनता है, चंद्रमा को अर्घ्य देता और और ब्राह्मणों को दान देता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं।’ इसके बाद भगवान विष्णु ने माघी पूर्णिमा की कथा भी देवर्षि नारद को सुनाई। उसके अनुसार, प्राचीन समय में विदिशा नाम की नगरी में धर्मदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह बहुत ही गरीब था लेकिन भगवान का परम भक्त था। एक दिन भगवान विष्णु ने उसे दर्शन देकर पूर्णिमा व्रत करने को कहा। धर्म दत्त ने विधि-विधान से सभी पूर्णिमा व्रत किए। माघ मास की पूर्णिमा पर उसने अपने व्रत का उद्यापन किया। ऐसा करने से उसके जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगे। देखते ही देखते वह कुछ ही समय में धनवान बन गया। उसे योग्य संतान भी हुई। इस तरह उसने सभी भौतिक सुख प्राप्त किए। इस तरह सुखी जीवन जीते हुए जब उसकी मृत्यु हुई तो पूर्णिमा व्रत के पुण्यफल से उसे विष्णुलोक की प्राप्ति हुयी। इसलिए पूर्णिमा का व्रत बहुत ही शुभ फल देने वाला माना गया है। जो भी व्यक्ति माघी पूर्णिमा पर इस कथा को सुनता है, उसे अपने जीवन में हर तरह का सुख प्राप्त होता है।









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