
-मौजूद रहे जेपी नड्डा और नितिन नबीन,एनडीए होगा मंत्रिमंडल में साथ
अशोक झा/ पटना: सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। वहीं जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। तीनों को पटना में आज मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कराई गई।BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में एक साधारण शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था। जिसमें राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट, विजय और बिजेंद्र को शपथ दिलाई।अब मई महीने में कैबिनेट विस्तार करके चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (LJP-R), जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेताओं को सरकार में शामिल किया जा सकता है।कौन है सम्राट चौधरी,कैसे शुरू हुई राजनीतिक सफर की शुरुआत: राज्य के इतिहास में पहली बार होगा जब भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा। इससे पहले मंगलवार (14 अप्रैल) को नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। राजभवन में होने वाले इस गरिमामयी समारोह में नई मंत्रिपरिषद के सदस्य भी शपथ ग्रहण करेंगे।
गृहमंत्री से मुख्यमंत्री तक का सफर: शीर्ष नेतृत्व का बढ़ा भरोसा
सम्राट चौधरी का कद पिछले एक साल में बिहार भाजपा में काफी तेजी से बढ़ा है। पिछले साल विधानसभा चुनावों के बाद जब उन्हें राज्य का गृहमंत्री बनाया गया, तभी से यह स्पष्ट हो गया था कि पार्टी उन्हें बड़े रोल के लिए तैयार कर रही है। बिहार के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार हुआ था जब नीतीश कुमार के पास रहने वाला गृह विभाग किसी भाजपा नेता को सौंपा गया। इसी फैसले ने सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की पटकथा लिख दी थी।
मजबूत राजनीतिक विरासत: शकुनी चौधरी के वारिस हैं सम्राट
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को एक ऐसे परिवार में हुआ, जिसकी मुंगेर और तारापुर क्षेत्र में जबरदस्त पकड़ रही है। उनके पिता शकुनी चौधरी राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी रहे हैं, जो 6 बार विधायक और लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए। उनकी माता स्वर्गीय पार्वती देवी भी तारापुर से विधायक रहकर जनता की सेवा कर चुकी हैं। मुंगेर के लखनपुर गांव से निकलकर मदुरै कामराज विश्वविद्यालय तक शिक्षा पाने वाले सम्राट चौधरी ने अपने तीन दशक के करियर में हर स्तर की राजनीति को करीब से देखा है।
कुशवाहा समुदाय का बड़ा चेहरा और ओबीसी समीकरण
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार के सामाजिक समीकरणों को साधने की भाजपा की बड़ी रणनीति है। वे कोइरी-कुशवाहा समुदाय से आते हैं, जो बिहार में यादवों के बाद दूसरा सबसे बड़ा ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) समूह है। 1990 में लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली राजद से अपना सफर शुरू करने वाले सम्राट चौधरी ने अपनी मेहनत और आक्रामक तेवरों के दम पर भाजपा में अपना लोहा मनवाया। उनका मुख्यमंत्री बनना भाजपा के उस ‘मिशन 2026’ का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी अपने दम पर बिहार फतह करना चाहती है।
परिवार का साथ: ममता कुमारी रहीं राजनीतिक ढाल
सम्राट चौधरी के इस लंबे और उतार-चढ़ाव भरे सफर में उनकी पत्नी ममता कुमारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पेशे से वकील ममता कुमारी न केवल उनकी कानूनी सलाहकार रही हैं, बल्कि चुनावों के दौरान उन्होंने मोर्चा संभालकर जनता से सीधा संवाद भी किया। उनके दो बच्चे, बेटा प्रणय चौधरी और बेटी चारु प्रिया भी अपने पिता की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं।
आज का शपथ ग्रहण समारोह न केवल एक नई सरकार का आगाज है, बल्कि बिहार में भाजपा की ‘किंगमेकर’ से ‘किंग’ बनने की यात्रा का पूर्ण पड़ाव भी है।कम लोगों को पता है कि बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने वाले सम्राट सिंह चौधरी 19 साल की उम्र में मंत्री बने थे। 1999 में राबड़ी देवी सरकार में सबसे युवा मंत्रियों में से एक थे। सम्राट चौधरी ने लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी से 1990 के दशक में राजनीतिक पारी शुरू की थी। इसके बाद वह जेडीयू में शामिल हो गए। जहां उन्हें मंत्री भी बनाया गया। लेकिन जेडीयू छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी ने साल 2018 में बीजेपी का दामन थाम लिया। सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार के दिग्गज नेता रहे हैं। वो 7 बार सांसद से लेकर विधायक और मंत्री तक रहे। उन्होंने कांग्रेस से लेकर समता पार्टी और आरजेडी तक रह चुके थे। वहीं सम्राट की मां पार्वती चौधरी भी विधायक रही हैं। यानि सम्राट चौधरी को सियासत अपने परिवार से विरासत में मिली है।बता दें कि कभी बीजेपी ने उनकी उम्र को लेकर विरोध जताया था, जिसके कारण राज्यपाल ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया था। लेकिन बाद में वह बीजेपी में शामिल हुए और उसी भाजपा ने अब उनको सीएम बना दिया।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बचपन और घर का नाम राकेश कुमार है। उनके नाम को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। बताया जाता है कि बिहार की राजनीति में अपनी पहचान बनाने के बाद सम्राट चौधरी के रूप में लोकप्रिय हुए। हालांकि एशिया नेट इसकी पुष्टि नहीं करता है।







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