बस्ती। जिले के नंदनगर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत बदरुल उलूम में अनुचर पद पर हुई नियुक्ति को लेकर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने बड़ी कार्रवाई की है। शासन के निर्देश पर हुई जांच में नियुक्ति संदिग्ध पाए जाने के बाद परिषद ने संबंधित कर्मचारी की वित्तीय सहमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है। साथ ही अब तक दिए गए वेतन की वसूली और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।
परिषद की रजिस्ट्रार एवं निरीक्षक अंजना सिरोही द्वारा जारी आदेश के अनुसार, आयुक्त बस्ती मंडल की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने वर्ष 1996 और 1998 में हुई नियुक्तियों की जांच की थी। जांच में वर्ष 1996 की नौ नियुक्तियों में से आठ नियुक्ति-पत्रों पर तत्कालीन सचिव अब्दुल लतीफ खान के हस्ताक्षर मिले, जबकि नियाज अहमद के नियुक्ति-पत्र पर तत्कालीन नायब सचिव मोहम्मद वली के हस्ताक्षर पाए गए।
समिति ने इस तथ्य को संदिग्ध मानते हुए मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान नियाज अहमद और मदरसा प्रबंधन को अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन नियुक्ति की वैधता सिद्ध करने वाले पर्याप्त अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा सके। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने भी नियुक्ति-पत्र पर हस्ताक्षरों की विसंगति का मुद्दा उठाया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर मदरसा शिक्षा परिषद ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बस्ती को नियाज अहमद की वित्तीय सहमति निरस्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही वित्तीय सहमति मिलने की तिथि से अब तक भुगतान की गई धनराशि की वसूली सुनिश्चित करने को कहा गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति-पत्र पर कथित फर्जी हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाए। परिषद की इस कार्रवाई से जिले के मदरसों में हुई नियुक्तियों की पारदर्शिता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।










Hits Today : 1192
Who's Online : 25