संवाददाता ( पंकज सिंह)
उप्र बस्ती जिले में कोडीनयुक्त कफ सिरप के कथित अवैध कारोबार से जुड़े मामले में न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय) मीनाक्षी सोनकर की अदालत ने अभियुक्त भोला जायसवाल की न्यायिक रिमांड मंजूर कर ली है। अदालत ने बचाव पक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए पुलिस की रिमांड याचिका स्वीकार कर ली।
कोतवाली पुलिस ने अभियुक्त भोला जायसवाल को न्यायालय में पेश किया। विवेचक की ओर से वारंट-बी के तहत रिमांड प्रार्थना-पत्र, केस डायरी, रपट, चिक एफआईआर तथा अन्य अभिलेख प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को झूठे आरोप में फंसाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि संबंधित कफ सिरप की बिक्री का वैध अधिकार प्राप्त है और भोला जायसवाल उक्त उत्पाद का सुपर स्टॉकिस्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि सिरप केवल लाइसेंसधारी व्यक्तियों को ही बेचा गया तथा अभियुक्त का नाम प्राथमिकी में नहीं था, बल्कि विवेचना के दौरान सामने आया है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि विवेचना के दौरान अन्य अभियुक्तों और गवाहों के बयानों में भोला जायसवाल की भूमिका प्रकाश में आई है। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी संचालन के लिए कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और माल भंडारण के लिए फर्जी लीज का उपयोग किया गया। इस संबंध में असिस्टेंट डायरेक्टर ड्रग्स, रांची की ओर से भी एफआईआर दर्ज कराई गई है।
अभियोजन ने अदालत को बताया कि केस डायरी में सहअभियुक्त धर्मेंद्र अग्रवाल तथा भोला जायसवाल की फार्मा कंपनी ‘शैली ट्रेडर्स’ के बीच माल के लेन-देन का उल्लेख है। अन्य आरोपियों और गवाहों के बयानों में भी कंपनी का नाम सामने आया है। ऐसे में प्रभावी विवेचना के लिए अभियुक्त की न्यायिक रिमांड आवश्यक है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने भोला जायसवाल की न्यायिक रिमांड 2 जून से 15 जून तक स्वीकृत कर दी। साथ ही अभियुक्त को 15 जून को पुनः न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है।








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