अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने बंगाली मतदाताओं को साधने के लिए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव बीजेपी खासतौर पर ऐसे प्रवासी बंगालियों को साध रही है जो पश्चिम बंगाल के बाहर के दूसरे राज्यों में काम करते हैं। जिनके पास पश्चिम बंगाल में मतदान का अधिकार है। भाजपा की रणनीति के तहत दूसरे राज्यो में प्रवासी बंगालियों के बीच में भी बीजेपी अपनी उन राज्य ईकाईयों के जरिए पहुंच रही है जो भले बंगाल के वोटर ना हो, पर उनके संपर्क, संबंध और नाते-रिश्तेदार बंगाल में रहते है। इस बार विधानसभा चुनाव बीजेपी रणनीतिकारों के अनुसार पार्टी बंगाल में बिहार की तर्ज ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम में भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के माध्यम से बंगाली मतदाताओं के बड़े वर्ग को अपने साथ जोड़ने के प्रयास में जुटी है। बीजेपी बंगाल की जनता को ये संदेश भी देना चाहती है कि दुर्गा पूजा केवल बंगाल का नहीं बल्कि राष्ट्रीय त्योहार है। दूसरे शहरों में 40 हजारे से अधिक बंगाली परिवार: यही वजह है कि दुर्गा पूजा के मौके पर बीजेपी महानगरों और अन्य राज्यों में रहने वाले बंगालियों को जोड़ने के लिए खास योजना बनाई है. यूपी, मुंबई, दिल्ली, बिहार, झारखंड, बंगलुरु जैसे शहरों के उन क्षेत्रों में जहां 40000 से अधिक बंगाली समुदाय के लोग हैं, वहां बीजेपी पूजा पंडाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरूकता कार्यक्रम आदि के जरिए ना सिर्फ बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर पेश करेगी, बल्कि उसके सहारे विकसित बंगाल का विजन भी पेश किया जाएगा. इसके लिए इन शहरों के दुर्गा पूजा पंडालों,आयोजन समितियों की सूची तैयार की गई है।
बीजेपी ने बंगाल से बाहर 150 जिलों की पहचान की:
बीजेपी की कोशिश है कि टीएमसी के मुकाबले बंगाल की जनता के सामने एक ऐसा राजनीतिक विकल्प पेश करना जो बंगाल की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और सम्मान की रक्षा करे. बीजेपी ने बंगाल के बाहर 150 से ज्यादा ऐसे जिलों की पहचान की है जहां प्रवासी बंगाली हिंदुओं की ठीक ठाक तादात है। इन जिलों में बंगाली हिंदुओं के बीच में पार्टी की तरफ से कई कार्यक्रम चलाए जाएंगे। बीजेपी की राज्य ईकाईयां अपने कार्यकर्ताओं, नेताओं, विधायकों और सासंदो के जरिए अपने अपने राज्य और क्षेत्र के बंगाली बहुल इलाकों में स्नेह मिलन, चाय पर चर्चा, साथ ही इलाकों के प्रबुद्ध और प्रभावशाली बंगाली समाज के लोगो के साथ संवाद के कार्यक्रम करेगी. कई मौकों पर पीएम मोदी ने भी पार्टी के सांसदों को संगठन के साथ मिलकर अलग-अलग समाज के त्योहारों मनाने के कार्यक्रम करने की सलाह दी है। बताया जाएगा कि कैसे 11 वर्षों की गवाही भी देता है, जिनमें भाजपा ने उनके नेतृत्व में भारतीय राजनीति का परिदृश्य ही बदल डाला। 2014 में जब मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला, तब भाजपा 7 राज्यों में सत्ता में थी। आज, 2025 तक, भाजपा और उसके सहयोगी दल 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शासन कर रहे हैं। 4,123 विधायकों में से भाजपा और सहयोगी दलों के पास 1,618 विधायक हैं, यानी करीब 39% सीटों पर उनका नियंत्रण है। यह आंकड़ा मोदी की लोकप्रियता, रणनीति और राजनीतिक दूरदर्शिता का प्रमाण है। मध्य प्रदेश: 17 साल की थकान के बाद भी विश्वास कायम: मध्य प्रदेश में 2023 का चुनाव भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण था। 17 साल की सत्ता-विरोधी लहर के बावजूद जनता ने भाजपा को 230 में से 160 से अधिक सीटें दीं। पीएम मोदी ने चुनावी सभाओं में ‘विकास बनाम वंशवाद’ का मुद्दा उठाया और ग्रामीण इलाकों तक योजनाओं की पहुँच को प्रमुख बनाया। यही कारण रहा कि लंबे शासन के बाद भी भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की।
दिल्ली: 27 साल बाद भाजपा की एंट्री
दिल्ली की राजनीति में 27 साल का सूखा खत्म कर 2025 में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर कर भाजपा ने 48% वोट शेयर हासिल किया। मोदी ने दिल्ली मेट्रो फेज-IV, यमुना रिवरफ्रंट और महिला सुरक्षा जैसे शहरी मुद्दों पर खास ध्यान दिया। उनकी अपील ने मिडिल क्लास और युवाओं को भाजपा से जोड़ दिया। हरियाणा: लगातार तीन कार्यकाल का इतिहास हरियाणा की राजनीति में पहली बार किसी पार्टी ने लगातार तीन कार्यकाल पूरे किए। 2014 से 2024 तक भाजपा की जीतें इस बात का सबूत हैं कि पीएम मोदी के ‘डबल इंजन’ विकास मॉडल को जनता ने स्वीकार किया। सड़क, उद्योग और रोजगार सृजन ने हरियाणा को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया।
गुजरात: मोदी का किला और मजबूत: गुजरात भाजपा का गढ़ पहले से था, लेकिन 2022 में जब पार्टी ने 150 से अधिक सीटें जीतकर नया कीर्तिमान बनाया, तो यह साफ हो गया कि मोदी का प्रभाव आज भी उतना ही गहरा है। यहां की जीत ने दिखाया कि मोदी का विकास मॉडल और संगठनात्मक मजबूती मिलकर चुनावी समीकरण कैसे बदल सकती है।
महाराष्ट्र: गठबंधन राजनीति में मास्टर स्ट्रोक: महाराष्ट्र में भाजपा ने 2014 से अपनी स्थिति लगातार मजबूत की। 2019 में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद 2022 में महायुति गठबंधन का गठन हुआ। 2024 में इस गठबंधन ने 132 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता पाई। मोदी के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और मुंबई मेट्रो जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विज़न ने शहरी वोटरों को आकर्षित किया।
पूर्वोत्तर भारत: ‘लुक ईस्ट’ से ‘लीड ईस्ट’ तक:
2014 से पहले पूर्वोत्तर में भाजपा का प्रभाव नगण्य था। लेकिन मोदी ने क्षेत्रीय अस्मिता को सम्मान देने और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने की रणनीति अपनाई। असम में 2016 और 2021 में सरकार बनी, त्रिपुरा में 2018 में वामपंथ का किला टूटा, मणिपुर और अरुणाचल में भी भाजपा सत्ता में आई। 2023 तक भाजपा ने नगालैंड और मेघालय में सहयोगी सरकारें बनाकर पूर्वोत्तर को नई पहचान दी।उत्तराखंड: हर चुनाव में भाजपा का दबदबा : उत्तराखंड में भाजपा ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में सभी 5 सीटें जीतीं। विधानसभा में भी 2017 और 2022 में पार्टी ने बहुमत से सरकार बनाई। मोदी ने यहां ‘चारधाम ऑल वेदर रोड’, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसे प्रोजेक्ट देकर विकास का नया आधार तैयार किया।
ओडिशा: 24 साल का इतिहास टूटा: ओडिशा में बीजेडी का दबदबा 24 साल तक कायम रहा। लेकिन 2024 में भाजपा ने 20 लोकसभा और 78 विधानसभा सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाई। मोदी की रणनीति थी – स्थानीय मुद्दों पर ध्यान और राष्ट्रीय योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाना। इससे ओडिशा की राजनीति का पूरा समीकरण बदल गया।
असम: लगातार पार्टी की मजबूती: असम में भाजपा ने 2016 से सत्ता संभाली और 2021 में उसे बरकरार रखा। 2024 के उपचुनावों में भी भाजपा को बढ़त मिली। मोदी के बोगीबील ब्रिज और नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड जैसे प्रोजेक्ट्स ने राज्य को विकास का नया आयाम दिया। पश्चिम बंगाल: विपक्ष से मुख्य चुनौती तक: 2014 में भाजपा के पास बंगाल से सिर्फ 2 लोकसभा सीटें थीं। 2019 में यह बढ़कर 18 हो गईं। विधानसभा में 2016 में सिर्फ 3 सीटें थीं, जो 2021 में बढ़कर 77 हो गईं। आज भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्ष और ममता बनर्जी के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती है। उत्तर प्रदेश: भाजपा का अटूट गढ़: मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तर प्रदेश को अपने सबसे मजबूत गढ़ में तब्दील कर दिया। 2014 में लोकसभा की 71 सीटें जीतना, 2017 में विधानसभा की 312 सीटें और 2022 में फिर बहुमत पाना – ये सभी भाजपा के विजय पथ की कहानियाँ हैं। मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास’ नीति ने यूपी की राजनीति का नक्शा बदल दिया।
पीएम मोदी के 11 साल के नेतृत्व ने भाजपा को सिर्फ एक राजनीतिक दल से बढ़ाकर देशव्यापी आंदोलन का रूप दे दिया है। उनके जन्मदिन पर यह सफर इस बात का गवाह है कि किस तरह करिश्माई नेतृत्व, दूरदर्शिता और जमीनी जुड़ाव भारतीय राजनीति की तस्वीर बदल सकते हैं।
बंगाल में भाजपा का सियासी जुगाड़ बना बिहार और असम का विकास मॉडल
अप्रवासी और दिल छू लेने वाली घटनाओं पर होगा फोकस
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