22 वें भगवती जागरण पंडाल से लाल निरंजन घाट विदा हुई माता रानी
– भक्तों ने ढोल नगाड़े के साथ कहा, आबार कबे बछड़ पड़े( मां कब आएगी एक साल बाद )
– नम आंखों से मां भवानी का किया गया विसर्जन, आयोजकों के मन में उत्साह की कमी नहीं
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी भगवती जागरण समिति के द्वारा चल रहे 22वें विशाल भगवती जागरण का समापन आज दशमी के दिन विसर्जन के साथ संपन्न हो गया। वर्दमान रोड स्थित शिवम पैलेस में 22वें वर्ष माता रानी का भव्य और दिव्य दरबार सजाया गया था। गुरुवार को शिवम पैलेस पंडाल से माता रानी को नम आंखों से भक्त गाजे बाजे के साथ लाल मोहन निरंजन घाट तक लेकर पहुंचे। सिलीगुड़ी नगर निगम की ओर से सुव्यवस्थित विसर्जन तैयारियों के साथ माता रानी का घाट पर पूजा अर्चना किया गया। उसके बाद महानंदा नदी में विसर्जन किया गया। आयोजको की ओर से संजय शर्मा, शंकर गोयल, दिलीप चौधरी, दिलीप अग्रवाल, विष्णु केडिया, नटवर नकीपुरिया आदि ने कहा कि शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी दुर्गा की भक्ति और आराधना के बाद, दसवें दिन मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। विजयादशमी के नाम से भी जाना जाने वाला यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भक्त देवी दुर्गा को भावभीनी विदाई देते हैं और मूर्ति विसर्जन के साथ-साथ कलश विसर्जन का भी विशेष महत्व होता है। आपको पता है कि विसर्जन में किन किन बातों का ध्यान देना पड़ता है। मूर्ति विसर्जन क्यों किया जाता है? नवरात्रि के दौरान, भक्त अपने घरों या पंडालों में देवी दुर्गा की स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक पूजा, उपवास और आराधना करते हैं। दशमी के दिन, ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा कैलाश पर्वत के लिए प्रस्थान करती हैं और भक्तों को कल्याण का आशीर्वाद देती हैं। मूर्ति विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि देवी अपने धाम लौट रही हैं और भक्त उन्हें अगले वर्ष पुनः स्थापित करेंगे।नवरात्रि के दौरान, भक्त अपने घरों या पंडालों में देवी दुर्गा की स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक पूजा, उपवास और आराधना करते हैं। दशमी के दिन, ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा कैलाश पर्वत के लिए प्रस्थान करती हैं और भक्तों को कल्याण का आशीर्वाद देती हैं। मूर्ति विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि देवी अपने धाम लौट रही हैं और भक्त उन्हें अगले वर्ष पुनः स्थापित करेंगे। देवी मां से क्षमा याचना: विसर्जन से पहले, देवी दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें। यह अनिवार्य है। विसर्जन के दौरान इस मंत्र का जाप करें- आवाहनं न जानामि, नैव जानामि पूजनम् । विसर्जनं न जानामि, क्षमस्व परमेश्वर। विसर्जन के दौरान क्षमा मांगने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है, जिसमें आप कहते हैं कि हे भगवान, मैं आह्वान, पूजा या विसर्जन नहीं जानता, कृपया मुझे क्षमा करें। अखंड ज्योति स्वयं बुझाएं: नवरात्रि के दौरान प्रज्वलित अखंड ज्योति को विसर्जन से पहले नहीं बुझाना चाहिए। पूजा समाप्त होने के बाद, बत्ती निकालकर उसे सुरक्षित रख दें। बचे हुए तेल या घी का उपयोग अगली पूजा या हवन में किया जा सकता है। देवी मां से क्षमा याचना: विसर्जन से पहले, देवी दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें। यह अनिवार्य है। विसर्जन के दौरान इस मंत्र का जाप करें- आवाहनं न जानामि, नैव जानामि पूजनम् । विसर्जनं न जानामि, क्षमस्व परमेश्वर। विसर्जन के दौरान क्षमा मांगने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है, जिसमें आप कहते हैं कि हे भगवान, मैं आह्वान, पूजा या विसर्जन नहीं जानता, कृपया मुझे क्षमा करें। कलश विसर्जन का महत्व: मूर्ति स्थापना के साथ ही एक कलश भी स्थापित किया जाता है, जिसे देवी का प्रतीक माना जाता है। इसे नारियल, आम या अशोक के पत्तों और जल से भरा जाता है। नवरात्रि के दौरान, इस कलश को देवी मां की ऊर्जा और शक्ति का केंद्र माना जाता है। कौन था रावण का बड़ा भाई, देवी सीता ने किया जिसका वध?कलश विसर्जन की सही विधि: मूर्ति विसर्जन से पहले कलश की पूजा करें। कलश में भरा जल तुलसी के पौधे या घर के किसी पवित्र स्थान पर छिड़कें। विसर्जन स्थल पर नारियल और पत्ते प्रवाहित करें। कलश को गंगाजल से शुद्ध करके घर में रखा जा सकता है; यह शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता: ऐसा माना जाता है कि यदि मूर्ति और कलश विसर्जन की विधि का सही ढंग से पालन किया जाए, तो घर में सुख, समृद्धि, शांति और शक्ति का वास होता है। इसके अलावा, देवी दुर्गा भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करती हैं और परिवार को बुरी और नकारात्मक ऊर्जा से बचाती हैं।








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