-कहा, वार्डवासियों की खुशी ही उनके जीवन की असली पूंजी
– जिन्होंने इस मुकाम पर पहुंचाया उनकी सेवा करने में कैसी दिक्कत
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड एक के पार्षद संजय पाठक आज अपने वार्ड से 101 लोगों को लेकर मां कामाख्या दर्शन को निकले। जय मां कामाख्या का नारा लगाते हुए स्टेशन की ओर बढ़ते भक्तों के कदम मानों जल्द से जल्द मां का दर्शन करना चाहते है। पार्षद संजय पाठक ने बताया कि यह वह वार्डवासी है जिन्होंने मुझे वार्ड पार्षद के मुकाम तक पहुंचाया। मां की इच्छा हाकी उनके भक्तों को मेरे माध्यम से उनके दर पर पहुंचाया जाय वह काम हम कर रहे है।इस कार्य के पीछे मन की शांति और गहरा सकून मिलता है। उन्होंने कहा जरा सोचिए जिसने मुझे सेवा का अवसर प्रदान किया है उसे खुश देखना कितना अच्छा लगता है।
क्या है कामाख्या शक्ति पीठ: मां कामाख्या असम के गुवाहाटी में नीलाचल पहाड़ी पर स्थित सबसे प्राचीन और पवित्र 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह देवी सती के योनि रूप की पूजा का केंद्र, तांत्रिक साधना का प्रमुख स्थल और सृजन की देवी को समर्पित है। यहाँ गर्भगृह में प्राकृतिक योनि आकृति से जल प्रवाहित होता है, और यह दस महाविद्याओं का मंदिर भी है। कामाख्या मंदिर से जुड़े मुख्य तथ्य:पौराणिक महत्व: यह माना जाता है कि यहाँ माता सती के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण भाग (योनि) गिरा था, जो इस स्थान को शक्ति का अद्वितीय केंद्र बनाता है। अनोखी पूजा: कामाख्या मंदिर में देवी की कोई मूर्ति नहीं है। यहाँ एक प्राकृतिक योनि के आकार के पत्थर की पूजा होती है, जिससे लगातार जल निकलता है। अम्बुबाची मेला: हर साल जून के महीने में यहाँ अम्बुबाची मेला लगता है, जब मान्यतानुसार माता कामाख्या रजस्वला होती हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए बंद रहते हैं।तंत्र विद्या: यह स्थान तांत्रिक और यौगिक साधना के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। स्थान: यह असम के गुवाहाटी के पश्चिमी भाग में नीलाचला पहाड़ी पर स्थित है। कामाख्या देवी को ‘कामरूपा देवी’ के रूप में भी जाना जाता है और यहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आते हैं।








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