– पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा यह देश के लिए चिंता ओर चिंतन का विषय
– क्यों है यह महत्वपूर्ण इसे सभी राष्ट्रवादी विचारों में जीने वाले को जानना जरूरी
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहे ना रहे का शतत चिंतन करने वाले पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर को “भारत का सबसे संवेदनशील गलियारा “चिकन नेक” के संरक्षक ताराचन्द धानुका की जीवनी” पुस्तक भेंट की गई।इसे साध्वी ऋतंभरा के वात्सल्य ग्राम की शिष्या सुनीता अग्रवाल ने दी। पुस्तक के संबंध में विस्तार से उन्हें अवगत भी कराया। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए चिंता और चिंतन का विषय है। ‘चिकन नेक’ क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?
बिहार बंगाल के इस चिकननेक कॉरिडोर एक संकीर्ण भू-भाग है जो भारत के मुख्य हिस्से को उसके आठ उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई सबसे कम स्थान पर मात्र 20 से 22 किलोमीटर है। इसके एक ओर नेपाल, दूसरी ओर बांग्लादेश, और उत्तर में भूटान स्थित है। यह भौगोलिक स्थिति इसे दक्षिण एशिया का सबसे संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र बनाती है। इस कॉरिडोर में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी भारत के पूरे उत्तर-पूर्व क्षेत्र को मुख्यभूमि से काट सकती है, जिससे इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है।सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर इस क्षेत्र को टारगेट कर सकता है। यही वजह है कि ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के बाद यहां चौकसी और बढ़ा दी गई है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर मादक पदार्थों, हथियारों और नकली नोटों की तस्करी रोकने के लिए पहले से ही विशेष नजर रखी जा रही है, लेकिन अब निगरानी को और कड़ा किया गया है। सीमा की कमजोरियों का फायदा उठाकर आतंकियों की घुसपैठ की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी हालात की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी दी :
गृह मंत्री अमित शाह ने भी हालात की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी दी है कि ‘शत्रु को कभी कमजोर न समझें।’ गृह मंत्रालय ने सभी अर्धसैनिक बलों जैसे बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सीआईएसएफ के जवानों की छुट्टियां रद्द कर दी थी और सभी को ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था, ‘दिल्ली में कुछ लोगों ने नारे लगाए कि वे इस ‘चिकन नेक’ को काट देंगे। अरे भाई, तुम इसे कैसे काटोगे? क्या यह तुम्हारे बाप की जमीन है? यह भारत की जमीन है। इस पर कोई हाथ नहीं लगा सकता।’ उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने ऐसे नारे लगाने वालों को गिरफ्तार कर लिया है। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने उनकी रिहाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया था।
विपक्ष ने चिकन नेक काटने की धमकी देने वालों की पैरवी की: शाह
गृहमंत्री ने दावा किया, ‘दिल्ली पुलिस ने उन्हें जेल में डाल दिया।’इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने उन्हें रिहा करवाने के लिए हर संभव प्रयास किया। उनके सांसदों ने तो उनकी ओर से पैरवी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया, लेकिन आखिर में सच्चाई की जीत हुई। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
भारत की रक्षा रणनीति: नई चौकियों की स्थापना
भारत ने हाल ही में इंडो-बांग्लादेश सीमा पर बामुनी, किशनगंज और चोपड़ा में तीन नए सैन्य ठिकाने (गैरिसन) स्थापित किए हैं। इनकी स्थापना का उद्देश्य सिलीगुड़ी कॉरिडोर को संभावित घेराबंदी और सैन्य दबाव से बचाना है। साथ ही, भारत ने वैकल्पिक परिवहन संपर्कों पर भी काम शुरू किया है, जैसे बिहार के जोगबनी से नेपाल के विराटनगर होते हुए पश्चिम बंगाल के न्यू माल जंक्शन तक प्रस्तावित रेलवे लाइन — जिससे आपूर्ति और संचार मार्गों को और मजबूत किया जा सके।
बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियाँ
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, के पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ होते संबंधों ने भारत को चिंतित कर दिया है। हाल ही में पाकिस्तान के चीफ ऑफ ज्वाइंट स्टाफ, जनरल साहिर शामशाद मिर्जा की ढाका यात्रा और रक्षा सहयोग पर हुई वार्ता ने नई दिल्ली को अलर्ट कर दिया है। इसके अलावा, कुछ बांग्लादेशी सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के भारत-विरोधी बयानों और चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास के प्रस्तावों ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। किशनगंज -सिलीगुड़ी से सटे कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, भारत के उत्तर-पूर्व को मुख्य भूमि से जोड़ता है और इसकी चौड़ाई केवल 20–22 किमी है।भारत ने बामुनी, किशनगंज और चोपड़ा में नए सैन्य गैरिसन स्थापित किए हैं।यह क्षेत्र नेपाल, बांग्लादेश और भूटान से घिरा है, जो इसे सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।भारत जोगबनी,विराटनगर,न्यू माल जंक्शन के बीच रेल संपर्क विकसित करने की योजना बना रहा है।
यूनुस के बयान और भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया
बीते मार्च में चीन की यात्रा के दौरान मुहम्मद यूनुस द्वारा उत्तर-पूर्व भारत को “लैंडलॉक्ड” और बांग्लादेश को “समुद्र का रक्षक” बताना भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाला माना गया। इस बयान के बाद भारत ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के चारों ओर अपनी सैन्य और बुनियादी ढांचा उपस्थिति को और मजबूत करना शुरू कर दिया है।









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