– किसी भी मां का दिल ना दुखे इस संकल्प से जीवन में आएगा खुशी
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: आज मदर्स डे है। यानि मातृत्व दिवस। आज मां के सम्मान का दिन है। अगर आप जीवन में हमेशा खुश रहना चाहते है तो प्रण करे अपने ही नहीं किसी मां का कभी दिल नहीं दुखने देंगे। हमेशा उन्हें वह मान और सम्मान देने की कोशिश करेंगे जो आपको अपनी मां के प्रति सम्मान है। कई दिनों से सोशल मीडिया से लेकर बाजारों तक में मदर्स डे की रौनक दिखने लगी है। लेकिन अगर आप अभी तक मदर्स डे से अनजान हैं तो ये लेख आपके सभी सवालों के जवाब देगा। मां रा प्यार, त्याग और समर्पण हर व्यक्ति के जीवन में अनमोल होता है। यही वजह है कि दुनिया भर में मां के सम्मान में मदर्स डे यानी मातृत्व दिवस मनाया जाता है।मदर्स डे’ वो खास दिन जब हम अपनी मां के अनमोल प्यार और त्याग को सेलिब्रेट करते हैं. मई के दूसरे रविवार को मनाया जाने वाला यह दिन हर मां को सम्मान और प्यार देने का मौका है. आइए इस मदर्स डे को और खास बनाएं. जिसमें होंगी खास दिल को छूने वाली शुभकामना और भावना। मां जीवन की सबसे अनमोल हस्ती : मां वो व्यक्तित्व है, जिसके बिना जिंदगी अधूरी है।वो हमें न सिर्फ जन्म देती है, बल्कि हर कदम पर प्यार, हिम्मत और दुआओं का सहारा भी देती है। मां का प्यार निस्वार्थ होता है, जो हर मुश्किल में ढाल बनकर साथ खड़ा रहता है। इस मदर्स डे पर अपनी मां को बताएं कि वो आपके लिए कितनी खास हैं। आज के दिन की शुरुआत एक बेटी ने अपनी मां को सम्मान देने के लिए की थी, जो बाद में पूरी दुनिया में एक खास अवसर बन गया। मदर्स डे सिर्फ गिफ्ट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां के प्रति प्यार और सम्मान जाहिर करने का मौका बन चुका है। इस दिन लोग अपनी मां के साथ समय बिताते हैं, उन्हें खास महसूस कराते हैं और उनके योगदान के लिए धन्यवाद कहते हैं।हर साल मई के दूसरे रविवार को यह खास दिन सेलिब्रेट किया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर इस दिन की शुरुआत कैसे हुई और इसे मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है। इस खास दिन का इतिहास बेहद भावुक और प्रेरणादायक है। आइए जानते हैं मदर्स डे का इतिहास, महत्व और सही तारीख।बपहली बार मदर्स डे किसने मनाया?
एना जार्विस को मदर्स डे की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने अपनी मां के निधन के बाद उनके सम्मान में एक खास दिन मनाने की पहल की। एना चाहती थीं कि सभी लोग अपनी मां के प्यार और त्याग को सम्मान दें। इसी सोच ने बाद में मदर्स डे का रूप ले लिया।
मई के दूसरे रविवार को क्यों मनाया जाता है?
एना जार्विस की मां का निधन मई महीने में हुआ था। उनकी याद में पहली बार मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया गया। बाद में यह तारीख इतनी लोकप्रिय हुई कि इसे स्थायी रूप से अपनाया गया। इसी कारण हर साल मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे सेलिब्रेट किया जाता है।
1914 में मिली आधिकारिक मान्यता: अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने साल 1914 में मदर्स डे को आधिकारिक मान्यता दी। इसके बाद इसे राष्ट्रीय पर्व घोषित किया गया। धीरे-धीरे यह परंपरा दुनिया के कई देशों में फैल गई और आज भारत समेत अनेक देशों में यह दिन बड़े उत्साह से मनाया जाता है। मां के सम्मान का प्रतीक है मदर्स डे
मदर्स डे सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि मां के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। इस दिन बच्चे अपनी मां को गिफ्ट देते हैं, कार्ड बनाते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं। कई लोग अपनी मां के लिए खास खाना बनाते हैं या उन्हें घूमाने भी ले जाते हैं। यह दिन मां के त्याग और निस्वार्थ प्रेम को याद करने का मौका देता है। सोशल मीडिया पर मदर्स डे का क्रेज
आज के डिजिटल दौर में मदर्स डे सोशल मीडिया पर भी खूब ट्रेंड करता है। लोग अपनी मां के साथ तस्वीरें और इमोशनल मैसेज शेयर करते हैं।







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