अशोक झा/ नेपाल बोर्डर से : नेपाल में शुक्रवार तक कर्फ्यू बढ़ा दी गई है। आज देर शाम तक अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा संभव है। इसी बीच नेपाल के रामेछाप में कैदियों ने जेल से भागने की कोशिश की, जिसके बाद सेना ने गोलीबारी की। सेना की गोलीबारी में दो कैदियों की मौत हो गई। सेना के साथ झड़प में 10 और कैदियों को गोली लगी। नेपाल में सेना के नियंत्रण में आने के बाद गोलीबारी की यह पहली घटना है। इससे पहले, नेपाल की अलग-अलग जेलों से अब तक 15000 से ज्यादा कैदी फरार हो गए हैं। नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ भड़के हिंसक प्रदर्शनों ने देश को हिला दिया है। जेन जी के प्रदर्शनों के चलते प्रधानमंत्री के.पी. ओली को इस्तीफा देना पड़ा, जबकि संसद और सरकारी इमारतों में आग लगा दी गई। इसी फसाद की आड़ में देशभर की जेलों से 13 हजार से ज्यादा कैदी भी फरार हो गए। इनमें से कई अब भारत-नेपाल सीमा पर पकड़े जा रहे हैं। सशस्त्र सीमा बल यानी कि SSB ने अब तक 35 फरार कैदियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 22 उत्तर प्रदेश की सीमा पर, 10 बिहार में और 3 पश्चिम बंगाल में पकड़े गए हैं।गिरफ्तारी के बाद एसएसबी द्वारा की गई पूछताछ में मोहम्मद अब्दुल ने स्वीकार किया कि वह नेपाल में पिछले कई वर्षों से सोने की तस्करी के काम में लिप्त था। जेल से फरार होने के बाद उसकी योजना रक्सौल होते हुए कोलकाता जाने की थी, जहां से वह बांग्लादेश लौटना चाहता था। लेकिन एसएसबी की मुस्तैदी ने उसकी योजना पर पानी फेर दिया। एसएसबी 47वीं बटालियन ने आवश्यक पूछताछ के बाद मोहम्मद अब्दुल को आगे की कानूनी कार्रवाई हेतु स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया है। ओली के इस्तीफा देने बाद भी नहीं थमा था गुस्सा: SSB के एक अधिकारी ने पकड़े जा रहे कैदियों पर जानकारी देते हुए बताया, ‘यह संख्या अभी भी बढ़ रही है, हम सतर्कता बरत रहे हैं।’ बता दें कि सोमवार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर और सरकार के सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इससे गुस्साए सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री ओली के दफ्तर में घुस गए और उनका इस्तीफा मांगने लगे। मंगलवार को ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी दफ्तरों, राजनीतिक दलों के मुख्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के घरों में आग लगा दी। ओली का निजी आवास भी जलाया गया। सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध को भी सोमवार रात ही हटा लिया गया था, लेकिन गुस्सा शांत न हुआ। नेपाल की सेना ने बुधवार को संभावित हिंसा रोकने के लिए देशव्यापी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए और कर्फ्यू लगा दिया। ओली के इस्तीफे के बाद अब देश में अंतरिम सरकार के गठन की तैयारी चल रही है और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को इसका प्रमुख बनाने की बात कही है।आंदोलन खत्म होने के बाद इसकी क्रेडिट लेने की होड़ मची है, लेकिन एक 24 साल की ऐसी भी लड़की है, जिसने पर्दे के पीछे से पहले आंदोलन को हवा देने का काम किया और अब अंतरिम सरकार के गठन को लेकर सेना और राष्ट्रपति के साथ डील में शामिल है।वह है तनुजा पांडे। तनुजा ने नेशनल लॉ कॉलेज (नेपाल) से पढ़ाई की है. लॉ की पढ़ाई के बाद तनुजा सोशल एक्टिविज्म में आ गई। तनुजा इसके बाद से ही काठमांडू में एक्टिव है। तनुजा के बारे में कहा जाता है कि कुछ दिन नेपाल कांग्रेस की तरुण (यूथ) शाखा में भी रही। 2018 में तनुजा ने हरिन नामक एक संगठन की स्थापना की। 5 लोगों की हरिन का मुख्य काम पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करना है। तनुजा ने एक इंटरव्यू में नेपाल में पर्यावरण के काम को सबसे खतरनाक बताया था।आंदोलन में तनुजा की भूमिका: नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ तनुजा ने पहला स्लोगन इनफ इज इनफ (अब बहुत हो गया) दिया. जेनरेशन-जेड के पोस्टर पर इस नारे ने खूब सुर्खियां बटोरी. तनुजा अपनी टीम को लेकर झापा से काठमांडू पहुंची। धीरे-धीरे यह आंदोलन सोशल मीडिया सेंट्रिक हो गया। तनुजा ने Gen-Z Nepal का हैशटैग भी चलवाया। आंदोलन खत्म होने के बाद आर्मी चीफ के साथ प्रदर्शनकारियों की जो मीटिंग हुई, उसमें तनुजा भी शामिल रहीं तनुजा ने बताया कि हमने किसी राजनेता को अंतरिम सरकार के मुखिया के रूप में विरोध किया है। हमारा मानना है कि नागरिक समाज को अब कमान देने की जरूरत है, जिससे भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सके।









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