
नेपाल बोर्डर से अशोक झा: आज आपको ये भी समझना चाहिए कि नेपाल की प्रधानमंत्री के तौर पर सुशीला कार्की के सामने कौन कौन सी चुनौतियां होंगी। तो सुशील कार्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेपाल में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव करवाना है क्योंकि नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता और चुनावी धांधली की समस्याएं काफी पुरानी हैं। इन सब के बीच कमान संभालते ही कार्की एक्शन में नजर आईं। उन्होंने दो आयोग गठन करने का निर्णय लिया है। पहला न्यायिक आयोग जो हिंसा प्रकरण की जांच करेगा और दूसरा, भ्रष्टाचार निवारक आयोग जो भ्रष्टाचार की जांच करेगा।
पहली कैबिनेट की बैठक संपन्न,नेपाली संसद को किया गया भंग : पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं। अंतरिम पीएम चुने जाने के बाद कैबिनेट की पहली बैठक हुई, जिसमें नेपाली संसद को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया। आम चुनाव 5 मार्च 2026 को कराए जाने पर सहमति बनी है। सुशीला कार्की को अंतरिम पीएम चुने जाने पर GenZ नेताओं ने जश्न मनाकर अपनी खुशी जाहिर की। सुशीला कार्की को नेपाल की सत्ता की कमान मिलने पर भारत ने भी खुशी जताई है। नई दिल्ली की तरफ से कहा गया है कि हम सुशीला कार्की को नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रमुख बनाए जाने का स्वागत करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि नेपाल में अब शांति और स्थिरता का माहौल कायम होगा.करीबी पड़ोसी, लोकतांत्रिक साथी, लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट पार्टनर होने के नाते भारत दोनों देशों की भलाई और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना जारी रखेगा। नए संविधान के लागू होने के बाद सभी सरकारें अनुच्छेद 76 के तहत बनाई जाती थीं।।लेकिन सुशीला कार्की को अनुच्छेद 61 के अनुसार प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
अनुच्छेद 61 में सीधे प्रधानमंत्री के पद या शक्तियों का कोई जिक्र नहीं है।इसमें मुख्य रूप से राष्ट्रपति का काम और जिम्मेदारियां बताई गई हैं। राष्ट्रपति अनुच्छेद 61 के मुताबिक संविधान की रक्षा का काम करते हैं। इसलिए, राष्ट्रपति ने उसी अनुच्छेद के अनुसार पीएम की नियुक्ति की है।जेन जी को उनसे उम्मीद है कि वो चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता तय करेंगी इसके लिए उनको एक मजबूत चुनाव आयोग, चुनाव पर्यवेक्षक और एक निष्पक्ष मीडिया की आवश्यकता होगी. इसके अलावा, नेपाल के विभिन्न जातीय और सांस्कृतिक समूहों के बीच भी सामंजस्य स्थापित करना होगा। चुनाव से पहले उनको भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलाकर नई सरकार के लिए एक नजीर भी पेश करनी है. नेपाल में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या रही है और इसके खिलाफ ही जेन जी ने इतना बड़ा आंदोलन किया जो ओली सरकार के तख्तापलट की वजह बना। सुशीला कार्की खुद भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद करती रही हैं वो ये भी मानती हैं कि सरकारी कर्मचारियों और नेताओं के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई और भ्रष्टाचार के मामलों की तुरंत सुनवाई जरूरी है. उनका मुख्य न्यायधीश के तौर पर पुराना अनुभव इसमें उनके काम आ सकता है। जेन जी के आंदोलन के दौरान 51 लोगों की मौत हुई है. सुशीला कार्की ने शपथ से पहले ही शर्त रख दीं कि जेन जी आंदोलन के दौरान जो मौत हुईं जिससे आंदोलन हिंसक हुआ उसके दोषियों को सजा मिलनी चाहिए अपने कार्यकाल में उन्हें इसे भी सुनिश्चित करना होगा नहीं तो Gen Z के सवालों का सामना करना उनके लिए मुश्किल होगा। सुशीला कार्की के सामने Gen Z से तालमेल बिठाने की भी चुनौती होगी. जेन जी का एक वर्ग चाहता था वो प्रधानमंत्री ना बनें उनकी उम्र को मुद्दा बनाया गया था लेकिन अब उनको Gen Z से तालमेल बनाकर काम करना होगा उन्हें अपनी बात रखने के लिए एक मंच देना और उनकी समस्याओं पर ध्यान देना, सुशीला के लिए एक अहम चुनौती हो सकती है. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को इस पीढ़ी ने जिस तरह उठाया है।छोटे मंत्रिमंडल का होगा गठन
सूत्रों के मुताबिक शपथ ग्रहण के बाद कार्की एक छोटा मंत्रिमंडल गठित करेंगी और मंत्रिमंडल की पहली बैठक में विभिन्न हितधारकों के बीच बनी सहमति के अनुसार राष्ट्रपति को संसद भंग करने की सिफारिश कर सकती हैं. राष्ट्रपति पौडेल ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त करने का फैसला लेने से पहले प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के सम्मानित व्यक्तियों से भी अलग-अलग विचार-विमर्श किया। कानून-व्यवस्था की बहाली सबसे बड़ी चुनौती बीते रविवार से बड़े पैमाने पर जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद कार्की के सामने नेपाल में कानून-व्यवस्था बहाल करने की चुनौती है. क्योंकि, कथित भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों के खिलाफ युवाओं के हिंसक प्रदर्शन के चलते मंगलवार को के पी शर्मा ओली को अचानक प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. पूरे देश में काफी हिंसक प्रदर्शन हुए थे. वहीं, उम्मीद की जा रही है कि अंतरिम सरकार के गठन के बाद नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता खत्म हो सकती है.
विरोध प्रदर्शन के कारण ओली ने दिया था इस्तीफा
इससे पहले जेन जेड समूह की ओर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में भ्रष्टाचार पर अंकुश, पक्षपात को समाप्त करना और सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध हटाना शामिल था. नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध के खिलाफ हाल में हुए जेन जेड प्रदर्शन में एक भारतीय नागरिक सहित कम से कम 51 लोगों की मौत हुई है।सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने से भारत-नेपाल सीमा विवाद यानि लिपुलेख कालापानी, और लिम्पियाधुरा पर उनकी न्यायिक समझ के कारण भारत-नेपाल संबंधों में स्थिरता बनी रह सकती है हालांकि, यह मुद्दा अभी भी संवेदनशील है, लेकिन उनके संविधानिक दृष्टिकोण से यह उम्मीद की जा सकती है कि वे विवादों को न्यायिक तरीके से हल करने की कोशिश करेंगी, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में संतुलन और स्थिरता बनी रह सकती है. सुशीला कार्की ने भारत के प्रधानमंत्री और दूसरे नेताओं को लेकर सकारात्मक बातें की हैं. वो कहती हैं भारत के नेताओं के बारे में उनकी अच्छी धारणा है. यानि सुशीला कार्की खुलकर स्वीकार कर रही हैं..भारत को लेकर उनका रुख सकारात्मक है जो भारत-नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी सकारात्मक हो सकता है.
सुशीला कार्की ने कहा कि भारत ने नेपाल की हमेशा मदद की है और भारतीयों की शुभकामनाओं से नेपाल को हमेशा लाभ हुआ है. इस तरह का आभार और सहयोग संकेत देता है कि वे भारत-नेपाल संबंधों में पारदर्शिता और समझ को बढ़ावा दे सकती हैं और वो नेपाल के विकास के लिए भारत के साथ समान रूप से काम करेंगी. आज आपको उस बीएचयू से भी सुशीला कार्की के नेपाल के प्रधानमंत्री बनने की खबर के बाद प्रतिक्रियाओं को सुनना चाहिए जो भारत और नेपाल की नई प्रधानमंत्री के रिश्तों की सबसे मजबूत डोर है. यानि सुशील कार्की के प्रधानमंत्री बनने से नेपाल के साथ साथ भारत में खुशी है लेकिन उनके सामने नेपाल के युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती भी होगी।










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