Close Menu
Roaming ExpressRoaming Express
    Latest News

    यूपी व बहराइच का गौरव: गज़नफ़र हैदर ‘गुलफाम’ बने बिहार राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के चेयरमैन

    March 19, 2026

    चुनाव आयोग का बंगाल में चला हंटर, एक दो नहीं 40 अधिकारियों को हटाया

    March 19, 2026

    आओ सब मिलकर मनाएं हिंदू नववर्ष, घर- घर में छाए खुशियां अपार

    March 18, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, March 25
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Home » दीपावली से पहले धनतेरस का सनातन संस्कृति में बड़ा महत्व

    दीपावली से पहले धनतेरस का सनातन संस्कृति में बड़ा महत्व

    Roaming ExpressBy Roaming ExpressOctober 14, 2025 बंगाल


    अशोक झा/ सिलीगुड़ी: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर 2025, शनिवार के दिन मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सोना चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। त्योहारी मौसम की जोरदार माँग, रुपये की कमजोरी और मजबूत वैश्विक संकेतों के मिश्रण ने मंगलवार को भारतीय सर्राफा बाजार में एक नया इतिहास रच दिया। सोने की कीमत ने पहली बार ₹1.3 लाख प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर लिया, जबकि चाँदी भी ₹1.85 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर जा पहुँची। उसके बाद भी खरीदारी कम नहीं है। धनतेरस न सिर्फ धन और समृद्धि से जुड़ा पर्व है, बल्कि इसका गहरा संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक घटना से भी है। श्रीविष्णु की सलाह पर शुरू हुआ समुद्र मंथन
    देवताओं ने संकट से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु से सहायता मांगी। तब श्रीविष्णु ने उन्हें अमृत प्राप्त करने के लिए क्षीर सागर (ब्रह्मांडीय समुद्र) का मंथन करने की सलाह दी। इस मंथन के लिए मंदराचल पर्वत को मथनी वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया।देवता दैत्य दोनों पक्षों ने मिलकर मंथन प्रारंभ किया।
    हलाहल विष से बचाई शिव ने सृष्टि:
    समुद्र मंथन से सबसे पहले घातक विष हलाहल निकला। इस विष की तीव्रता इतनी थी कि पूरी सृष्टि नष्ट हो सकती थी। तब भगवान शिव ने इस विष को ग्रहण कर लिया, जिससे उनका गला नीला हो गया वे ‘नीलकंठ’ कहलाए।
    मंथन के दौरान अनेक दिव्य रत्न धन-संपदाएं निकलीं। अंत में भगवान धनवंतरि समुद्र से प्रकट हुए, जिनके हाथों में अमृत का कलश आयुर्वेद का ग्रंथ था। वे स्वास्थ्य अमरत्व के देवता माने जाते हैं. इसी कारण इस दिन को धन्वंतरि त्रयोदशी या धनतेरस के रूप में मनाया जाता है।
    धनतेरस का वास्तविक अर्थ: धनतेरस का संबंध केवल सोना-चांदी या वस्तुओं की खरीदारी से नहीं है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि सच्चा धन स्वास्थ्य जीवन की शांति है। भगवान धनवंतरि की पूजा से रोगों से मुक्ति लंबी आयु की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही इस दिन खरीदारी का भी विधान है। ऐसे में आइए जानते हैं कि धनतेरस पर धन्वंतरि देवता की पूजा क्यों की जाती है और इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या है। दुर्वासा ऋषि का श्राप: पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार दुर्वासा ऋषि ने देवताओं के राजा इंद्र को श्राप दिया था। इस श्राप के प्रभाव से सभी देवताओं की शक्ति और तेज क्षीण हो गया. परिणामस्वरूप, असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर ली और संपूर्ण ब्रह्मांड अंधकार से भर गया।
    भगवान विष्णु की सलाह पर हुआ समुद्र मंथन: देवताओं ने जब यह स्थिति देखी, तो उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता की गुहार लगाई. विष्णु भगवान ने उन्हें सलाह दी कि यदि वे अमरत्व प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें क्षीर सागर (ब्रह्मांडीय सागर) का मंथन करना होगा. इस कार्य के लिए देवताओं और दैत्यों ने एकजुट होकर समुद्र मंथन करने का निश्चय किया। मंदराचल पर्वत को मंथन की छड़ी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया. इस प्रकार देवता और दैत्य, दोनों ही मंथन में जुट गए। अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि: विषपान के बाद समुद्र मंथन से अनेक दिव्य रत्न, देवी-देवता और निधियां प्रकट हुईं। आखिरकार, भगवान धनवंतरि सागर से प्रकट हुए. उनके हाथों में अमृत कलश और आयुर्वेद ग्रंथ था। वे स्वास्थ्य, दीर्घायु और अमरता के प्रतीक बने। यही कारण है कि इस दिन को धन्वंतरि त्रयोदशी या धनतेरस कहा जाता है। भगवान धनवंतरि को चिकित्सा और स्वास्थ्य का देवता माना गया है। क्यों जलाया जाता है जम का दीपक: इन सबके साथ एक और विशेष पूजा का विधान है यमराज के नाम का दीपक जलाना. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम सूर्यास्त के बाद घर के बाहर यमदेव के नाम का दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से यमदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि यम दिवाली के दिन यम देवता के लिए दीया किस दिशा में जलाना चाहिए और इससे जुड़ी अन्य मान्यताएं क्या-क्या हैं।
    किस दिशा में जलाएं यम का दीपक?:
    ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार, यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इसलिए धनतेरस की रात घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाना शुभ माना गया है। यम देवता के निमित्ति इस दिशा में यम दीपक जलाने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है।
    धनतेरस पर कैसा होना चाहिए यम दीपक?: धनतेरस के दिन यम दीपक को घर के मुख्य द्वार के दक्षिण भाग में बाहर की ओर मुख करके रखा जाता है। यह दीपक तिल या सरसों के तेल से जलाया जाता है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
    धनतेरस पर यम दीपक क्यों जलाते हैं: ऐसा माना जाता है कि धनतेरस की रात यम दीपक जलाने से व्यक्ति के जीवन से मृत्यु का भय समाप्त होता है. यह दीपक दीर्घायु, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. घर में शांति और सकारात्मकता का वातावरण बनता है।

    Post Views: 76
    Bengal

    Related Posts

    चुनाव आयोग का बंगाल में चला हंटर, एक दो नहीं 40 अधिकारियों को हटाया

    March 19, 2026By Roaming Express

    सीएम ममता बनर्जी सड़क पर उतरी एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर

    March 16, 2026By Roaming Express

    भाजपा में ‘बुआ-भतीजा’ संस्कृति नहीं, सामूहिक फैसले सर्वोपरि: सुवेंदु

    March 16, 2026By Roaming Express

    सिलीगुड़ी में श्रीराम नवमी शोभायात्रा की तैयारी जोरों पर – कहते है जो राम का नहीं वह किसी काम का नहीं

    March 16, 2026By Roaming Express

    सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नर को आईजी आईबी बनाया गया

    March 15, 2026By Roaming Express

    ममता के ‘मां-माटी-मानुष’ का तिलिस्म तोड़ने के लिए पीएम मोदी ने चला ‘रोटी-बेटी-माटी’ का ब्रह्मास्त्र! पेट-पर‍िवार और प्रॉपर्टी का सवाल

    March 14, 2026By Roaming Express
    Top Posts

    यूपी व बहराइच का गौरव: गज़नफ़र हैदर ‘गुलफाम’ बने बिहार राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के चेयरमैन

    March 19, 2026

    यूपी: प्रदेश में मौसम ने ली करवट, 11 सितंबर तक धूप और उमस करेगी परेशान, कई नदियां बाढ़ से उफान पर

    September 7, 2025

    यूपी: प्रदेश में मौसम ने ली करवट, 11 सितंबर तक धूप और उमस करेगी परेशान, कई नदियां बाढ़ से उफान पर

    September 7, 2025
    Don't Miss

    यूपी व बहराइच का गौरव: गज़नफ़र हैदर ‘गुलफाम’ बने बिहार राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के चेयरमैन

    March 19, 2026

    बहराइच, 19 मार्च। जनपद बहराइच व उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है…

    चुनाव आयोग का बंगाल में चला हंटर, एक दो नहीं 40 अधिकारियों को हटाया

    March 19, 2026

    आओ सब मिलकर मनाएं हिंदू नववर्ष, घर- घर में छाए खुशियां अपार

    March 18, 2026

    आज से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का शुभारंभ, कलश स्थापना के साथ शुरू मां के नौ दिनों की पूजा

    March 18, 2026
    LATEST NEWS

    यूपी व बहराइच का गौरव: गज़नफ़र हैदर ‘गुलफाम’ बने बिहार राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के चेयरमैन

    March 19, 2026

    चुनाव आयोग का बंगाल में चला हंटर, एक दो नहीं 40 अधिकारियों को हटाया

    March 19, 2026

    आओ सब मिलकर मनाएं हिंदू नववर्ष, घर- घर में छाए खुशियां अपार

    March 18, 2026
    LANGUAGE
    OUR VISITORS
    1576944
    Hits Today : 3298
    Who's Online : 16
    CONTACT US

    CHIEF EDITOR
    Ramesh Mishra

    ADDRESS
    Shiv Nagar, Turkahiya, Gandhi Nagar, Basti, Uttar Pradesh – 272001

    MOBILE NO.
    +91 7985035292

    EMAIL roamingexpressbst@gmail.com

    WEBSITE
     www.roamingexpress.com

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.