Close Menu
Roaming ExpressRoaming Express
    Latest News

    शुभेंदु अधिकारी पर हमले की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, बंगाल में लोकतंत्र की हत्या करवा रही है मुख्यमंत्री

    January 11, 2026

    UP STF को बड़ी कामयाबी: BAMS की फर्जी मार्कशीट व प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह का सरगना प्रयागराज में गिरफ्तार

    January 10, 2026

    दुबई में पति को जेल भेजने की धमकी, बस्ती में महिला से 80 हजार की साइबर ठगी

    January 10, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, January 11
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Home » लोकआस्था का एक ऐसा महापर्व जिसमें पंडित की नहीं होती जरूरत

    लोकआस्था का एक ऐसा महापर्व जिसमें पंडित की नहीं होती जरूरत

    सज गए शहर से लेकर गांव के नदी और पोखर, आज डूबते सूरज को दिया जायेगा अर्घ्य
    Roaming ExpressBy Roaming ExpressOctober 26, 2025 धर्म एवं आस्था

    अशोक झा/ सिलीगुड़ी: लोकास्था का महापर्व छठ एक ऐसा व्रत है, जिसमें बिना पुरोहित और मंत्र के मन की शुद्धता और समर्पण से ईश्वर की आराधना की जाती है. छठ पर्व की सहजता ने इसे लोगों के दिलों से जोड़ा है और इसी ने इसे महापर्व का दर्जा भी दिया है. आइए जानते हैं क्या है छठ महापर्व।क्या है छठ महापर्व?
    छठ महापर्व चार दिनों का होता है और इस पर्व में व्रत करने वाले के अलावा पूरे परिवार की भागीदारी होती है. यह सामूहिकता का त्योहार है, जिसमें सहयोग के लिए सहर्ष लोग तैयार हो जाते हैं। छठ महापर्व में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है और उनसे पूरे परिवार, संतान के लिए सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की जाती है। छठ महापर्व षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, इसलिए देवी के छठे स्वरूप जिनकी पूजा संतान रक्षा के लिए की जाती है उनकी पूजा भी छठी मैया के रूप में होती है. बच्चों के जन्म के बाद भी छठे दिन इसी देवी छठी मैया की पूजा होती है।क्या छठ महापर्व बिना पंडित या पुजारी के होता है संपन्न?छठ महापर्व की खासियत में यह बात सबसे अहम है कि इस पूजा के लिए किसी पंडित या पुजारी की जरूरत नहीं होती है. छठ में व्रत करने वाला व्रती, पूरी शुद्धता के साथ व्रत की शुरुआत करता है और भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करता है।व्रती कोई भी हो सकता है. स्त्री, पुरुष, विवाहित, अविवाहित या फिर विधवा या विधुर. व्रत में काफी सरलता है, किसी कठिन मंत्र की जरूरत नहीं है. बस आप अपनी इच्छा से भगवान के सामने समर्पण करें और उनसे विनती करें।अपने शब्दों में अपनी शुद्ध भावना के साथ. पूजा में किसी कर्मकांड की जरूरत नहीं है. कुछ दीये जलते हैं, अगरबत्तियां जलाई जाती है और कुछ फूल चढ़ाए जाते हैं अगर उपलब्ध हो तो. आटा-गुड़ से बना टेकुआ और कोई भी मौसमी फल भगवान को अर्पित किया जाता है. यह सब कुछ व्रती खुद करता है उसे पुजारी की जरूरत नहीं होती है. हां,लेकिन परिवार और पड़ोसी इस पूजा में सहभागी होते हैं।

    इस दौरान छठी मैया की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। इस व्रत को निर्जला किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसर छठी मैया की उपासना और व्रत करने से संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। छठ पूजा भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है। भारत में सूर्य पूजा की परम्परा वैदिक काल से ही रही है। बिहार और उत्तर प्रदेश में मनाया जाने वाला यह बेहद अहम पर्व है जो देश के बड़े हिस्से में धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं है बल्कि महापर्व है जो कुल चार दिनों तक चलता है। नहाय खाय से लेकर उगते हुए भगवान सूर्य को अर्ध्य देने तक चलने वाले इस पर्व का अपना ऐतिहासिक महत्व है। हमारे देश में सूर्य उपासना के कई प्रसिद्ध लोकपर्व हैं जो अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाए जाते हैं। सूर्य षष्ठी के महत्व को देखते हुए इस पर्व को सूर्य छठ या डाला छठ के नाम से संबोधित किया जाता है। इस पर्व को बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और नेपाल की तराई समेत देश के उन तमाम महानगरों में मनाया जाता है, जहां-जहां इन प्रांतों के लोग निवास करते हैं। यही नहीं, मॉरिशस, त्रिनिडाड, सुमात्रा, जावा समेत विदेशों में भी भारतीय मूल के प्रवासी छठ पर्व को बड़ी आस्था और धूमधाम से मनाते हैं। डूबते सूर्य की विशेष पूजा ही छठ का पर्व है। चढ़ते सूरज को सभी प्रणाम करते हैं। छठ पर्व की सांस्कृतिक परम्परा में चार दिनों का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भैया दूज के तीसरे दिन यानि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से आरंभ हो जाते है। व्रत के पहले दिन को नहाय-खाय कहते हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ है स्नान के बाद खाना। इस दिन पवित्र नदी में श्रद्धालु स्नान करते हैं। वैसे तो यह पर्व मूल रूप से गृहिणियों द्वारा मनाया जाता है लेकिन पुरुष भी इसमें समान रूप से सहयोग देते हैं। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है। इस कारण शास्त्रों में सूर्य को भगवान मानते हैं। सूर्य के बिना कुछ दिन रहने की जरा कल्पना कीजिए। इनका जीवन के लिए इनका रोज उदित होना जरूरी है। कुछ इसी तरह की परिकल्पना के साथ लोग छठ महोत्सव के रूप में इनकी आराधना करते हैं। सामान्यता यह त्योहार बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तर-प्रदेश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में छठ पूजा को महापर्व घोषित कर सरकारी छुट्टी भी लागू कर दी गई है। छठ पूजा का व्रत सूर्य भगवान, उषा, प्रकृति, जल, वायु आदि को समर्पित है। इस व्रत को करने से निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त होता है।छठ पर्व को किसने शुरू किया इसके पीछे कई ऐतिहासिक कहानियां प्रचलित हैं। लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी के उपलक्ष्य में छठ पूजा की जाती है।
    छठ का पौराणिक महत्व अनादिकाल से बना हुआ है। रामायण काल में सीता ने गंगा तट पर छठ पूजा की थी। महाभारत काल में कुंती ने भी सरस्वती नदी के तट पर सूर्य पूजा की थी। इसके परिणाम स्वरूप उन्हें पांडवों जैसे पुत्रों का सुख मिला था। द्रौपदी ने भी हस्तिनापुर से निकलकर गढ़ गंगा में छठ पूजा की थी। छठ पूजा का सम्बंध हठयोग से भी है। जिसमें बिना भोजन ग्रहण किए हुए लगातार पानी में खड़ा रहना पड़ता है। जिससे शरीर के अशुद्ध जीवाणु परास्त हो जाते हैं। छठ पर्व की परम्परा में वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व भी छिपा हुआ है। षष्ठी तिथि एक विशेष खगोलीय अवसर है। जिस समय धरती के दक्षिणी गोलार्ध में सूर्य रहता है और दक्षिणायन के सूर्य की अल्ट्रावॉइलट किरणें धरती पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाती हैं। इन दूषित किरणों का सीधा प्रभाव जनसाधारण की आंखों, पेट, त्वचा आदि पर पड़ता है। इस पर्व के पालन से सूर्य प्रकाश की इन पराबैंगनी किरणों से जनसाधारण को हानि न पहुंचे। इस अभिप्राय से सूर्य पूजा का गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है। इसके साथ ही घर-परिवार की सुख- समृद्धि और आरोग्यता से भी छठ पूजा का व्रत जुड़ा हुआ है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पति, पत्नी, पुत्र, पौत्र सहित सभी परिजनों के लिए मंगल कामना से भी जुड़ा हुआ है।
    लोक परम्परा के मुताबिक सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई। छठ पूजा अथवा छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। छठ से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और लोक गाथाओं पर गौर करें तो पता चलता है कि भारत के आदिकालीन सूर्यवंशी राजाओं का यह मुख्य पर्व था। छठ के साथ स्कंद पूजा की भी परम्परा जुड़ी है। भगवान शिव के तेज से उत्पन्न बालक स्कंद की छह कृतिकाओं ने स्तनपान करा रक्षा की थी। इसी कारण स्कंद के छह मुख हैं और उन्हें कार्तिकेय नाम से पुकारा जाने लगा। कार्तिक से संबंध होने के कारण षष्ठी देवी को स्कंद की पत्नी देवसेना नाम से भी पूजा जाने लगा। एक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वो रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही परंपरा प्रचलित है। छठ पर्व के बारे मे एक कथा और भी है। इस कथा के मुताबिक जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए तब दौपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडवों को अपना राजपाट वापस मिल गया था। महापर्व छठ हिंदू धर्म में एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें ना केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। पर्व का प्रारंभ नहाय-खाय से होता है, जिस दिन व्रती स्नान कर अरवा चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी का भोजन करते हैं। नहाय-खाय के दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी के दिनभर व्रती उपवास कर शाम में रोटी और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस पूजा को खरना कहा जाता है। इसके अगले दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि को उपवास रखकर शाम को अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अगले दिन यानी सप्तमी तिथि को सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके व्रत तोड़ा जाता है। छठ पूजा के व्रत को जो भी रखता है। वह इन दिनों में जल भी नही ग्रहण करता है। इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इसमें मुख्य रुप से सू्र्य देवता की पूजा की जाती है लेकिन साथ ही सूर्य देव की बहन छठ देवी की भी पूजा की जाती है। जिसके कारण इस पूजा का नाम छठ पूजा पड़ा। इस दिन नदी के तट में पहुंचकर पुरुष और महिलाएं पूजा-पाठ करते है। साथ ही छठ माता की पूजा संतान के लिए कल्याणकारी होती है।

    Post Views: 63

    Related Posts

    शुभेंदु अधिकारी पर हमले की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, बंगाल में लोकतंत्र की हत्या करवा रही है मुख्यमंत्री

    January 11, 2026By Roaming Express

    बंगाल में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला, थाना में जमीन पर बैठ धरना दे रहे विरोधी दल नेता

    January 10, 2026By Roaming Express

    ममता को शुभेंदु अधिकारी ने भेजा कानूनी नोटिस, 72 घंटे में सबूत नहीं दिया तो करेंगे मुकदमा

    January 10, 2026By Roaming Express

    बंगाल में बारुईपुर में पटाखा डीलर के घर विस्फोट,लगी आग में तीन लोग जलकर गंभीर

    January 10, 2026By Roaming Express

    ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की कैविएट एप्लीकेशन, ईडी के कदम कों रोकने और सुनवाई में उनका पक्ष में सुनने की अपील

    January 10, 2026By Roaming Express

    राम मंदिर में कश्मीरी मुस्लिम युवक संदिग्ध परिस्थितियों में गिरफ्तार

    January 10, 2026By Roaming Express
    आज का मौषम
    मौसम
    Top Posts

    यूपी: प्रदेश में मौसम ने ली करवट, 11 सितंबर तक धूप और उमस करेगी परेशान, कई नदियां बाढ़ से उफान पर

    September 7, 2025

    यूपी: प्रदेश में मौसम ने ली करवट, 11 सितंबर तक धूप और उमस करेगी परेशान, कई नदियां बाढ़ से उफान पर

    September 7, 2025

    यूपी: प्रदेश में मौसम ने ली करवट, 11 सितंबर तक धूप और उमस करेगी परेशान, कई नदियां बाढ़ से उफान पर

    September 7, 2025
    Don't Miss

    शुभेंदु अधिकारी पर हमले की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, बंगाल में लोकतंत्र की हत्या करवा रही है मुख्यमंत्री

    January 11, 2026

    अशोक झा/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी पर हुए हमले को लेकर केंद्रीय…

    UP STF को बड़ी कामयाबी: BAMS की फर्जी मार्कशीट व प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह का सरगना प्रयागराज में गिरफ्तार

    January 10, 2026

    दुबई में पति को जेल भेजने की धमकी, बस्ती में महिला से 80 हजार की साइबर ठगी

    January 10, 2026

    कुआनो नदी में कूदीं दो किशोरियां, ग्रामीणों ने बचाई जान

    January 10, 2026
    LATEST NEWS

    शुभेंदु अधिकारी पर हमले की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, बंगाल में लोकतंत्र की हत्या करवा रही है मुख्यमंत्री

    January 11, 2026

    UP STF को बड़ी कामयाबी: BAMS की फर्जी मार्कशीट व प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह का सरगना प्रयागराज में गिरफ्तार

    January 10, 2026

    दुबई में पति को जेल भेजने की धमकी, बस्ती में महिला से 80 हजार की साइबर ठगी

    January 10, 2026
    LANGUAGE
    OUR VISITORS
    1507926
    Hits Today : 224
    Who's Online : 10
    CONTACT US

    CHIEF EDITOR
    Ramesh Mishra

    ADDRESS
    Shiv Nagar, Turkahiya, Gandhi Nagar, Basti, Uttar Pradesh – 272001

    MOBILE NO.
    +91 7985035292

    EMAIL roamingexpressbst@gmail.com

    WEBSITE
     www.roamingexpress.com

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.