उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जनगणना 2027 की कार्ययोजना एवं तैयारी को लेकर मंगलवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की पहली बैठक हुई। बैठक में निदेशक, जनगणना कार्य उत्तर प्रदेश ने जनगणना प्रक्रिया, समय-सीमा और डिजिटल रूपांतरण से संबंधित विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में बताया गया कि जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल रूप में संपादित की जाएगी। मकान गणना और सूचीकरण के लिए समयसीमा तय की जा रही है। राज्य में इस कार्य के लिए लगभग 6 लाख कार्मिकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। सभी डेटा संग्रहण, प्रविष्टि, सत्यापन और निगरानी कार्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होंगे। जनगणना अधिनियम के अंतर्गत 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक नए जनपद, तहसील, नगर निकाय और ग्राम पंचायतों के गठन पर रोक रहेगी। इस बार आम जनता के लिए स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी की नियुक्त होगें, जो समन्वय, डेटा मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग का कार्य देखेगें। जनगणना का प्री-टेस्ट 10 से 30 नवंबर 2025 तक बुलंदशहर की अनूपशहर तहसील, बहराइच की मिहीपुरवा तहसील और प्रयागराज नगर निगम के सात वार्डों में किया जाएगा। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को जनगणना कार्य को सफल बनाने हेतु पूर्ण सहयोग देने के निर्देश दिए।
डिजिटल रूप में होगी जनगणना 2027 : उत्तर प्रदेश में छह लाख कार्मिक होंगे तैनात, आम जनता को मिलेगी स्व-गणना की सुविधा
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