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    Home » दुलारचंद हत्याकांड में दो दारोगा निलंबित, सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

    दुलारचंद हत्याकांड में दो दारोगा निलंबित, सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

    मोकामा में दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुलग रही राजनीति
    Roaming ExpressBy Roaming ExpressNovember 1, 2025 क्राइम

     

    पटना से अशोक झा: लापरवाही के आरोप में भदौर और घोसवरी थानेदारों को एसएसपी कार्तिकेय के. शर्मा ने निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही मोकामा क्षेत्र के तीनों प्रमुख उम्मीदवार- वीणा देवी, अनंत सिंह और प्रियदर्शी पीयूष को अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। निलंबित दोनों अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप में कार्रवाई हुई है।यह मामला बीते दिनों उस समय चर्चा में आया था जब जनसुराज के प्रत्याशी प्रियदर्शी पीयूष के साथ चल रहे दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि मोकामा टाल क्षेत्र में जदयू प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह का काफिला और जनसुराज प्रत्याशी पीयूष का काफिला आमने-सामने आ गया था। इसी दौरान तनावपूर्ण माहौल में झड़प हुई और गोलीबारी की खबर सामने आई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दुलारचंद यादव के शरीर पर किसी भारी वाहन से कुचलने जैसी चोटें थीं, साथ ही उनके एड़ी में गोली का निशान भी पाया गया। इस रिपोर्ट ने मामले को और पेचीदा बना दिया। ग्रामीणों और विपक्षी दलों ने पुलिस पर पक्षपात और जांच में लापरवाही के आरोप लगाए थे।गुरुवार (30 अक्तूबर) को यह घटना बाढ़ अनुमंडल के बसावनचक के पास उस समय हुई जब वे जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार अभियान में शामिल थे. दुलारचंद यादव के परिजनों ने इस घटना को हत्या बताया गया और आरोप पूर्व विधायक अनंत सिंह एवं उनके समर्थकों पर लगाए गए. अब इस मामले में नया मोड़ आता दिख रहा है, क्योंकि दुलारचंद यादव मौत मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गया है और इसमें मौत का कारण कार्डियो रेस्पिरेटरी फेल्योर कहा गया है.
    दुलारचंद मौत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली कहानी
    पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, फेफड़ा फटने और पसलियां टूटने से मौत की बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक सीने की कई हड्डियां टूटी हुई थीं और फेफड़ा फटने से सांस लेने में रुकावट हुई जिससे दुलारचंद यादव की मौत हो गई. बता दें कि इससे पहले दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अलग ही वजह बताई गई है. खैर इस मामले का सच क्या है यह तो आने वाले समय में जांच के साथ सामने आएगा. लेकिन, इस मामले में बार-बार दो शख्स का नाम सामने आ रहा है- कर्मवीर और राजवीर! आइए जानते हैं कि यह शख्स कौन है और इनका नाम इस मामले में क्यों आ रहा है.
    दुलारचंद कांड से चर्चा में आए कर्मवीर और राजवीर
    दरअसल, मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार इस पूरे कांड के चश्मदीद गवाह हैं. नीरज के आरोप के अनुसार, पूर्व विधायक अनंत सिंह पूरी तैयारी के साथ आए थे और उन्होंने फिल्मी अंदाज में उनकी गाड़ी रुकवाई. अनंत सिंह के साथ दो लोग थे – कर्मवीर और राजवीर. नीरज का कहना है कि ये दोनों पहले उनके दादा (दुलारचंद यादव) के शिष्य रह चुके हैं और ये अनंत सिंह के अपने भतीजे हैं. नीरज ने इन्हीं दोनों पर हमला करने का आरोप लगाया है. बता दें कि इस मामले में दर्ज करवाई गई FIR में अनंत सिंह समेत कई नामजद आरोपी बनाए गए हैं.
    दुलारचंद यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या है?
    बता दें कि दुलारचंद मौत मामले में घटना के तुरंत बाद चली खबरों में गोलीबारी और गाड़ी से कुचलने की बात सामने आई थी, लेकिन पटना सदर अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने तस्वीर बदल दी. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुलारचंद की मौत कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर से हुई, उनके फेफड़े फटे थे और पसलियां टूटी थीं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक साफ-साफ कहा जा रहा है कि मौत गोली से नहीं, बल्कि अंदरूनी चोटों और सांस रुकने से हुई. इस बीच पुलिस ने इसे संदिग्ध मौत मानते हुए फोरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं. लेकिन, आइए जानते हैं कि इस मामले में जिन राजवीर और कर्मवीर का नाम आ रहा है, आखिर ये कौन हैं.
    कौन हैं कर्मवीर और राजवीर सिंह ?
    जानकारी के अनुसार, दुलारचंद मौत मामले में दोनों आरोपी-कर्मवीर सिंह और राजवीर सिंह- मोकामा के ही रहने वाले और अनंत सिंह के करीबी बताए जा रहे हैं. स्थानीय स्तर पर दोनों का नाम पहले भी हिंसा, धमकी और हथियारबाजी जैसे मामलों में सामने आ चुका है. बताया जाता है कि दोनों कभी दुलारचंद यादव के शिष्य रहे थे और अब उन्हीं के खिलाफ खड़े हैं. यह ‘गुरु-शिष्य के विश्वासघात’ जैसा मामला बन गया है. यहां यह भी बता दें कि नीरज के बयान पर भदौर थाने में अनंत सिंह, कर्मवीर, राजवीर (या रणवीर), छोटन सिंह, कंजय सिंह समेत दर्जनों अज्ञात के खिलाफ हत्या (IPC 302) की एफआईआर दर्ज की है.

    दुलारचंद यादव मौत मामले में कर्मवीर सिंह और राजवीर सिंह पर हमला करने का आरोप है. FIR में अनंत सिंह समेत कई नामजद हैं.
    अनंत सिंह के करीबी कर्मवीर सिंह कौन हैं?
    जानकारी के मुताबिक, कर्मवीर का आपराधिक इतिहास लंबा है. हथियार एक्ट, मारपीट और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाइयों में नाम आ चुका है. वह अनंत सिंह के ‘सुरक्षा घेरे’ का हिस्सा माना जाता है जो मोकामा के बाहुबली नेता के प्रचार और सुरक्षा में फुल एक्टिव रहता है. पूर्व में दुलारचंद यादव के ‘शिष्य’ होने का दावा किया जा रहा है. सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में कर्मवीर को हथियार लहराते दिखाया गया है.
    कौन है राजवीर सिंह उर्फ रणवीर सिंह?मोकामा विधानसभा सीट पर इस घटना के बाद चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह पहले से ही चर्चाओं में हैं, जबकि राजद ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को मैदान में उतारा है। जनसुराज से प्रियदर्शी पीयूष भी सक्रिय रूप से प्रचार में जुटे हैं। दुलारचंद की मौत ने तीनों प्रत्याशियों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। ग्रामीण एसपी का कहना है कि निष्पक्ष जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। मोकामा टाल का यह मामला अब बिहार चुनाव की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है। इस घटना को लेकर अब तक तीन अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं एक मृतक पक्ष की ओर से, दूसरी अनंत सिंह समर्थकों द्वारा और तीसरी पुलिस की ओर से। पहली FIR (संख्या 110/25) दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार के बयान पर भदौर थाना में दर्ज की गई है। इसमें अनंत सिंह, राजवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, छोटन सिंह और कंजम सिंह को नामजद किया गया है। नीरज के अनुसार, गुरुवार दोपहर प्रचार के दौरान अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि अनंत सिंह ने पिस्टल से गोली चलाई जो दादा के पैर में लगी और बाद में छोटन व कंजम सिंह ने थार गाड़ी से कुचलकर उनकी हत्या कर दी। इस मामले में हत्या और साजिश से संबंधित धारा 103, 3(5), BNS 2023 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 लगाई गई है। वहीं, दूसरी FIR (संख्या 111/25) अनंत सिंह के समर्थक जीतेन्द्र कुमार के बयान पर दर्ज की गई है। इसमें जनसुराज प्रत्याशी पियूष प्रियदर्शी, लखन महतो, बाजो महतो, नीतीश महतो, ईश्वर महतो, अजय महतो और अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर हमला और साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इस पर BNS 2023 की धाराएँ 126(2), 115(2), 109(1), 324(9), 352/351(2), 35 लागू की गई हैं। इस बीच, घटना से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले की दिशा बदलती दिख रही है। वीडियो के दृश्य नीरज की FIR से मेल नहीं खाते। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह सामने आया है कि मौत गोली लगने से नहीं, बल्कि भारी वस्तु से दबने या गाड़ी से कुचलने से हुई। पुलिस तीनों प्राथमिकी और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर जांच में जुटी है। अधिकारी फिलहाल दोनों पक्षों की भूमिका, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और घटना के वास्तविक कारणों की तहकीकात कर रहे हैं।इलाके में भूमिहारों का वर्चस्व है, लेकिन यादव और धानुक जाति का भी अच्छा प्रभाव है. यादव जाति से आने वाले दबंग दुलारचंद यादव की हत्या ने भूमिहारों और यादवों के बीच शक्ति संतुलन को ध्वस्त कर दिया है. इस हत्या ने पूरे मोकामा को एक बार फिर जातीय ध्रुवीकरण को जगा दिया है. मोकामा एक बार फिर 90 के दशक वाली सियासी अदावत की भेंट चढ़ रहा है.
    भूमिहार जाति से आने वाले अनंत सिंह के बाहुबल को धानुक और यादव समुदाय का समीकरण जबरदस्त चुनौती दे रहा है. जहां यादव समुदाय राजद की तरफ खिसकता दिख रहा है. तो वहीं धानुक समुदाय जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी (धानुक जाति से आते हैं) की तरफ जाता दिख रहा है. जिससे अनंत सिंह का सियासी सिंहासन डगमगा रहा है.
    जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के चुनाव प्रचार के दौरान दबंग और यादवों में अच्छा खासा प्रभाव रखने वाले दुलारचंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई. जिसके बाद से बिहार की नीतीश सरकार बैकफुट पर है. तेजस्वी यादव ने अनंत सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ‘200 राउंड गोली चलाने वाले को सरकार बचा रही है’. तेजस्वी यादव ने अपने बयान से मोकामा की इस घटना को जातीय और भावनात्मक तौर पर राजद की तरफ दिशा देने की कोशिश की. जिसने एनडीए खेमे में जबरदस्त बेचैनी पैदा कर दी है. एनडीए सरकार जहां लालू प्रसाद के जंगलराज का उदाहरण देकर चुनावी मैदान में अपर हैंड ले रही थी. वहीं दुलारचंद की हत्या ने उसके इस छवि को भी तोड़ दिया है। दुलारचंद यादव की हत्या की वजह से अनंत सिंह पर जबरदस्त दबाव है. हमेशा मीडिया से घिरे रहने वाले अनंत सिंह को शीर्ष नेतृत्व ने इंटरव्यू देने से मना कर दिया है. कभी लालू यादव के करीबी रहे दुलारचंद कई दलों से जुड़े और अंत में जनसुराज के समर्थन में उतर गए. मोकामा में उनकी हत्या ने सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है. जो कि जनसुराज के पक्ष में जाती दिख रही है. धानुक समुदाय पारंपरिक रूप से जदयू का समर्थक माना जाता रहा है, लेकिन लोकसभा में उसने राजद की तरफ करवट लेकर सियासी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया. पीयूष प्रियदर्शी भी इसी समाज से आते हैं. दुलारचंद की हत्या से यह समुदाय जनसुराज के पक्ष में जाता दिख रहा है. यहीं अनंत सिंह का सबसे बड़ा डर है।।मोकामा विधानसभा सीट पर लगभग 2.68 लाख मतदाता हैं. जिसमें भूमिहार, यादव और धानुक प्रमुख हैं. मोकामा में मुस्लिम और पासवान जाति भी अच्छी संख्या में है. आंकड़ों के अनुसार भूमिहार जहां 22-25 प्रतिशत हैं. तो वहीं यादव करीब 20-22 प्रतिशत स्टेक रखते हैं. वहीं कुर्मी या धानुक जाति की भी आबादी 18-20 प्रतिशत है. इसके अलावा दलित और मुस्लिम वोट कुल मिलाकर 30 प्रतिशत के करीब हैं। दुलारचंद की हत्या ने जहां बिहार में कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है. वहीं मोकामा के वर्षों सुसुप्त पड़े जातीय हिंसा और जाति की राजनीति की आग में घी डालने का काम किया है. मोकामा की यह लड़ाई अब जाति से ज्यादा सहानुभूति और सम्मान की बन चुकी है. ऐसे में मौन पड़े मतदाता किस करवट बैठेंगे ये तो वक्त बतायेगा.30 अक्टूबर की शाम जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी प्रचार कर रहे थे. उनके साथ थे दुलारचंद यादव, सत्तर पार के बुजुर्ग, कभी लालू यादव के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले. अचानक हमला हुआ. पहले खबर फैली कि गोली मारी गई, लेकिन पोस्टमॉर्टम ने सच्चाई उजागर कर दी। सीने में, हाथ में, कंधे में गहरी चोटें थीं, हड्डियां चूर-चूर, अंदर खून जम गया था. पैर में एक गोली का निशान जरूर था, पर वो मौत की वजह नहीं बनी. यानी पहले लाठियों से पीटा गया, फिर गाड़ी से रौंदा गया. दुलारचंद की लाश सड़क पर पड़ी रही, भीड़ चीखती रही और मोकामा एक बार फिर खून से लाल हो गया. इस हत्या ने मोकामा के जातीय गणित को हिला कर रख दिया. यहां कुल ढाई लाख से ज्यादा वोटर हैं, जिनमें भूमिहार सबसे ताकतवर माने जाते हैं, करीब पच्चीस फीसदी. यादव भी कम नहीं, बीस से बाईस फीसदी. फिर आते हैं धानुक, जिन्हें कुर्मी का हिस्सा माना जाता है, अठारह से बीस फीसदी. बाकी दलित, पासवान और मुस्लिम मिलाकर तीस फीसदी के करीब. इसे ही कहते हैं ‘डी फैक्टर’ यानी धानुक फैक्टर। 2020 के उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी जीती थीं क्योंकि धानुक वोटर चुप बैठे थे. लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में यही धानुक राजद की तरफ मुड़ गया. अब पीयूष प्रियदर्शी खुद धानुक हैं और दुलारचंद की मौत ने सहानुभूति की ऐसी लहर पैदा कर दी कि पूरा धानुक समाज एकजुट हो रहा है. एक बुजुर्ग की लाश ने वो कर दिखाया जो सालों की रैलियां नहीं कर पाईं. चुनावी मैदान में तीन बड़े चेहरे हैं. सबसे पहले अनंत सिंह, जिन्हें ‘छोटे सरकार’ कहते हैं. बीस साल से मोकामा पर कब्जा, भूमिहार समाज का चेहरा, दबंगई की मिसाल. लेकिन अब उनकी राह मुश्किल है. धानुक नाराज हैं, यादव पहले से राजद में हैं और खुद उनके अपने भूमिहार समाज में फूट पड़ गई है।।एक तरफ अनंत हैं, दूसरी तरफ सूरजभान सिंह का परिवार, जिनकी पत्नी बीना देवी राजद की प्रत्याशी हैं. अगर भूमिहार वोट दो हिस्सों में बंट गया तो अनंत की गद्दी डोल जाएगी. दूसरी तरफ बीना देवी हैं, सूरजभान सिंह की पत्नी, अनंत की पुरानी दुश्मन. उनका पूरा दारोमदार यादव और मुस्लिम वोट पर है. तेजस्वी यादव ने खुद मोर्चा संभाल लिया है. वे कह रहे हैं कि दो सौ राउंड गोली चलाने वाले को नीतीश कुमार बचा रहे हैं. तेजप्रताप, पप्पू यादव, अशोक महतो, सब वहां पहुंच गए. अंतिम संस्कार में अनंत सिंह मुर्दाबाद के नारे गूंजे . यादव समाज एकदम एकजुट दिखाई दे रहा है।।फिर है पीयूष प्रियदर्शी, जनसुराज का नया चेहरा. खुद धानुक, सहानुभूति की लहर पर सवार. प्रशांत किशोर की रणनीति, नारा है कि बाहुबली नहीं, जनबली चाहिए. धानुक समाज पारंपरिक रूप से नीतीश का वोटर रहा, लेकिन अब पीयूष के साथ गोलबंद हो रहा है. अगर अस्सी फीसदी धानुक वोट भी जनसुराज को मिल गया तो अनंत सिंह का खेल खत्म. राजद भी यही कोशिश कर रही है कि धानुक वोट को दलित-पिछड़ा एकता के नाम पर अपनी तरफ खींच ले. तेजस्वी का प्लान साफ है कि यादव को एकजुट रखो, मुस्लिम को एनडीए से दूर रखो और धानुक में पिछड़ा-दलित का नया नैरेटिव खड़ा करो. अगर ये कामयाब रहा तो मोकामा में अगड़ा बनाम पिछड़ा का सीधा मुकाबला हो जाएगा और अनंत सिंह को सीधा नुकसान। चुनाव आयोग सतर्क है. डीजीपी से पूरी रिपोर्ट मांगी गई है. दुलारचंद के पोते ने अनंत सिंह, उनके भतीजों रणवीर और कर्मवीर समेत पांच लोगों पर नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। अनंत ने पलटवार किया कि ये सूरजभान की साजिश है। जनसुराज का कहना है कि चुनाव से पहले दहशत फैलाने की कोशिश है। इलाके में पुलिस का भारी बंदोबस्त है, लेकिन तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा. मोकामा का इतिहास खून से लिखा है। नब्बे का दशक, अनंत और सूरजभान की जंग, गोलियां, बम, लाशें. दो हजार पांच में अनंत पहली बार जीते।

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