पटना से अशोक झा: बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा परिवर्तन देखने को मिला, जब भाजपा विधायक दल की अहम बैठक में पार्टी ने अपने नए नेतृत्व की घोषणा की। भाजपा ने सम्राट चौधरी को विधानमंडल दल का नेता और विजय कुमार सिन्हा को उपनेता नियुक्त किया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ईबीसी और राजपूत विधायकों की इतनी बड़ी संख्या में जीतकर आने के बाद भी कुशवाहा जाति से आने वाले सम्राट चौधरी और भूमिहार जाति से आने वाले विजय सिन्हा पर बीजेपी ने क्यों दांव खेला? बीजेपी ने क्यों अपनी पुरानी परंपरा को बिहार चुनाव में जबरदस्त जीत के बाद बदल दिया? इस फैसले के पीछे बीजेपी के किस नेता का दिमाग चला? क्या बीजेपी के चाणक्य औऱ देश देश के गृह मंत्री अमित शाह ने अहम रोल अदा किया या फिर बिहार की जटिल जातिगत समीकरण के चक्कर में ये फैसला लिया गया?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी को मिली बड़ी जीत के बाद पटना में हुई पार्टी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता और विजय कुमार सिन्हा को उपनेता चुना गया है. इस फैसले के साथ ही दोनों नेताओं के दोबारा उपमुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है. बीजेपी का यह फैसला न केवल पार्टी के आंतरिक संतुलन को दर्शाता है, बल्कि इसके पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक गहरी और दूरगामी रणनीति काम कर रही है, जिसका लक्ष्य 2029 के चुनाव तक बिहार में पार्टी के आधार को मजबूत करना है.
किसका चला दिमाग? अमित शाह की रणनीतिक सोच
सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को बरकरार रखने का निर्णय पूरी तरह से बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर अमित शाह की रणनीति का परिणाम माना जा रहा है. इसके पीछे का तर्क यह है कि निरंतरता बनाए रखना: सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने विपक्ष में रहते हुए और फिर एनडीए की सरकार में डिप्टी सीएम के रूप में पार्टी के लिए सफलतापूर्वक काम किया है. उनकी जोड़ी ने सफलतापूर्वक एनडीए को जीत दिलाई है. ऐसे में अमित शाह ने ‘विनिंग कॉम्बिनेशन’ को बदलने का जोखिम नहीं लिया, ताकि संगठन में किसी तरह की अस्थिरता पैदा न हो
जातिगत संतुलन का मास्टरस्ट्रोक:
सम्राट चौधरी कुशवाहा समुदाय ओबीसी से आते हैं, जबकि विजय सिन्हा भूमिहार समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह चयन बीजेपी के ‘सवर्ण प्लस ओबीसी’ फार्मूले को मजबूत करता है, जो पार्टी को सिर्फ एक जाति तक सीमित होने से रोकता है. बिहार में ईबीसी वर्ग को साधना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन उपमुख्यमंत्री पद पर इस बार भी ईबीसी के किसी नेता को सीधे तौर पर प्रमुखता नहीं मिली है. इसके पीछे भी ठोस राजनीतिक कारण हैं।।
कोइरी-भूमिहार की जोड़ी होगी हिट?: सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने ने एक मजबूत ओबीसी नेता को आगे किया है. कुशवाहा जाति बिहार में यादवों के बाद सबसे बड़ी ओबीसी जातियों में से एक है, और यह वर्ग पारंपरिक रूप से नीतीश कुमार के वोटबैंक का हिस्सा रहा है. सम्राट को आगे रखकर बीजेपी इस वोटबैंक को स्थायी रूप से अपने साथ जोड़ना चाहती है. इससे EBC के बीच भी पार्टी का संदेश पहुंचता है कि ओबीसी वर्ग को उच्च प्रतिनिधित्व मिल रहा है. वहीं, विजय सिन्हा को बनाए रखकर पार्टी ने अपने पारंपरिक सवर्ण वोटबैंक भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका प्रतिनिधित्व शीर्ष पर बरकरार है. भूमिहार समुदाय ने बीजेपी के लिए हमेशा कठिन समय में भी मजबूत वोटिंग की है. दोनों नेताओं की संगठन पर मजबूत पकड़ है, जो अगले 5 साल के लिए एनडीए सरकार के लिए स्थिरता सुनिश्चित करेगी.
बिहार में नीतीश कुमार सीएम तो सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा होगे उप मुख्यमंत्री
एनडीए में सर्वसम्मति से बनी सहमति, राजभवन जाकर त्यागपत्र देंगे नीतीश कुमार
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