
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: क्रिसमस 2025 इस बार बेहद खास है क्योंकि 25/12/25 का अनोखा डेट पैटर्न 100 साल में सिर्फ एक बार आता है। इस बात का एहसास सिक्किम, डुवॉर्स और दार्जिलिंग कलिंपोंग से आने वाले ग्राहक बताते है। सेवक रोड स्थित सिलीगुड़ी “ऑर्बिट सैनिटेशन्स” (Orbit Sanitations) और Sikkim को hardware । एक बेसमेंट फ्लोर, क्रिसेंट टॉवर, लेमन ट्री होटल के नीचे तो दूसरा मून लाइट कैपिटल, एलजी-01; 3rd माइल, (सोना पेट्रोल पंप के पास) सेवक रोड सिलीगुड़ी में है। क्रिसमस मनाने वाले परिवार की यह पहली पसंद बनती जा रही है। दुकान के मालिक पुलकित लोहिया और अंकित लोहिया का कहना है यह दुकान विश्वास पर खड़ा उतर रहा है। आने वाले ग्राहकों का कहना है कि क्रिसमस से घर को सजाना कम पड़ जाए तो फिर नया साल सामने है। बताया जानिए क्यों यह तारीख दुर्लभ है और क्रिसमस 25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है? अगर आपको लगता है कि क्रिसमस हर साल एक जैसा ही आता है, तो इस बार का 25 दिसंबर आपकी सोच बदल देगा. 2025 का क्रिसमस एक ऐसी तारीख लेकर आ रहा है, जो पूरे सौ साल में सिर्फ एक बार दिखाई देती है, 25/12/25. दिन, महीना और साल का यह परफेक्ट मैच सोशल मीडिया से लेकर न्यूमेरोलॉजी के दीवानों तक सभी को रोमांचित कर रहा है. ठीक एक सदी पहले ऐसा कैलेंडर पैटर्न देखा गया था, और अब अगली बार इसे देखने के लिए फिर 100 साल इंतज़ार करना होगा.
100 साल में एक बार आता है 25/12/25 का पैटर्न
क्रिसमस 2025 सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक अनोखी कैलेंडर घटना भी लेकर आ रहा है. इस बार दिन (25), महीना (12) और साल (25) एक ऐसा विजुअली सैटिस्फाइंग पैटर्न बना रहे हैं जो बेहद दुर्लभ है. ऐसा संयोग इससे पहले साल 1925 में हुआ था और अब दोबारा 2125 में होगा यानी पूरे 100 साल बाद.
लोग इसे क्यों ‘once-in-a-century date’ कह रहे हैं?
कैलेंडर प्रेमियों, न्यूमेरोलॉजी फॉलोअर्स और तारीखों के खास पैटर्न देखने वालों के लिए यह दिन किसी त्योहार से कम नहीं. एक जैसी संख्या दोहराने वाले ऐसे पैटर्न बेहद कम आते हैं, इसलिए लोग इसे ‘मैजिक नंबर डे’ भी कह रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी #251225 तेजी से ट्रेंड बन रहा है और लोग इस डेट पर स्पेशल पोस्ट, कार्ड्स और कलेक्टिबल्स बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
क्या बदलाव लाता है यह अनोखा डेट पैटर्न?
हालांकि त्योहार की भावना हमेशा की तरह ही रहती है, खुशियां, परिवार, जश्न और प्रेम लेकिन इस बार तारीख खुद एक खास एक्स्ट्रा मैजिक जोड़ रही है. ऐसे दुर्लभ पैटर्न अक्सर लोगों को कैलेंडर के गणित और इतिहास की तरफ भी आकर्षित करते हैं. कई लोग इसे शुभ मानते हैं और इसे यादगार तरीके से मनाने की योजना बना रहे हैं.
क्रिसमस 25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
क्रिसमस, यीशु मसीह के जन्म उत्सव के रूप में हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है. बाइबिल में यीशु के जन्म की तारीख दर्ज नहीं है, लेकिन शुरुआती ईसाई विद्वानों ने दिसंबर 25 को चुनने का निर्णय किया. यह तारीख रोमन साम्राज्य के विंटर सोल्सटिस और ‘सोल इन्विक्टस’ उत्सव के आसपास आती थी. ईसाई परंपराओं को आम लोगों के बीच आसानी से स्वीकार करवाने के लिए इन मौजूदा त्योहारों के साथ क्रिसमस को जोड़ दिया गया.
आधिकारिक मान्यता कैसे मिली?
ईस्वी 350 में पोप जूलियस प्रथम ने 25 दिसंबर को आधिकारिक रूप से क्रिसमस की तारीख घोषित किया. ईस्वी 529 में रोमन सम्राट जस्टिनियन ने इसे सार्वजनिक अवकाश बना दिया. धीरे-धीरे धार्मिक परंपराओं, संस्कृति और उत्सवों का मेल होते-होते यह दुनिया का एक बड़ा और प्रिय त्योहार बन गया.
आज दुनिया में कैसे मनाया जाता है क्रिसमस?
अब यह त्योहार सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी बन चुका है। इस दौरान लोग चर्च में सेवाएं करते हैं। अपने परिवारों और रिश्तेदारों से मिलते हैं और उन्हें दावतें देते हैं।।इसके अलावा त्यौहार पर लोग एक-दूसरे को गिफ्ट भी देते हैं। साथ ही क्रिसमस पर लोग अपने घरों को बड़ी ही खूबसूरती से और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। लोग अपने घर पर क्रिसमस ट्री सजाते हैं। हर साल की तरह इस बार भी यह सब जारी रहेगा, लेकिन इस बार ये खास तारीख इसे और यादगार बना रही है।
100 साल में एक बार! 25/12/25 का क्रिसमस बना सुपर स्पेशल डेट
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