अशोक झा / कोलकाता: पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो गई है । 11 दिसंबर को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म भरने का अंतिम दिन था। अब सात दिन के अंदर चुनाव आयोग संशोधित वोटर लिस्ट जारी करेगी। कृष्णानगर की सभा से सीएम ममता बनर्जी ने खुद यह बात बताकर नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। सभा में मुख्यमंत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “मैंने अभी तक फॉर्म फिलअप नहीं किया है। क्यों नहीं किया? क्योंकि मैं तीन बार केंद्रीय मंत्री रही। सात बार सांसद बनी। तीन बार मुख्यमंत्री रही। आज मुझे साबित करना होगा कि मैं नागरिक हूँ?” इसके बाद उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इससे बेहतर है नाक रगड़ना!”BJP और आयोग पर तीखा हमला: फॉर्म न भरने के पीछे मुख्यमंत्री ने भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैं उन दंगाइयों को यह साबित नहीं करूँगी कि मैं देश की नागरिक हूँ। जब देश आजाद हुआ था, तो तुम लोग कहाँ थे?” उन्होंने सवाल किया, “आज रवींद्रनाथ, नेताजी, खुदीराम, सबका अपमान किया जा रहा है। यह कैसा भारत है?”
SIR प्रक्रिया के खिलाफ न होते हुए भी, मुख्यमंत्री ने इतने कम समय में पूरी प्रक्रिया को जल्दबाजी में खत्म करने के प्रयास का विरोध किया। उन्होंने कहा, “हमने कहा था कि आराम से करो। इतनी जल्दी क्यों है? व्हाई सो हरी?” मुख्यमंत्री ने इस जल्दबाजी के पीछे राजनीतिक मकसद को जिम्मेदार ठहराया-”वोट के लिए बंगाल में जबरदस्ती कब्जा करना चाहते हैं। लेकिन हमारे रहते ऐसा नहीं होने देंगे।”
क्या मुख्यमंत्री का नाम कट सकता है? आयोग का क्या कहना है?
हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एनुमरेशन फॉर्म जमा न करने पर क्या कोई विशेष जटिलता उत्पन्न हो सकती है? क्या वोटर लिस्ट से खुद मुख्यमंत्री का नाम कट सकता है?
इस पर चुनाव आयोग से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि राज्य के कुछ विशिष्ट व्यक्तियों, जैसे राजनीतिक नेता, न्यायपालिका से जुड़े लोग, खिलाड़ी, कलाकार या अन्य जाने-माने व्यक्तियों के मामले में पहले चरण में फॉर्म जमा न करने पर भी कोई समस्या नहीं है। वे दूसरे चरण में दस्तावेज जमा कर सकते हैं। वही भाजपा नेता प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में मालवीय ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने भले ही रैलियों में दावा किया हो कि वह एसआईआर प्रक्रिया में एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं करेंगी, लेकिन अंतिम दिन उन्होंने चुपचाप अपना फॉर्म भरकर जमा कर दिया। अब कितना झूठ बोलेगी सीएम ममता बनर्जी। मालवीय ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कि 11 दिसंबर 2025 को ममता बनर्जी ने स्वयं भरा हुआ और हस्ताक्षरित एन्यूमरेशन फॉर्म निर्वाचन अधिकारियों को सौंपा ताकि वह पश्चिम बंगाल की मान्य मतदाता बनी रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि ठीक कुछ घंटे पहले कृष्णानगर की रैली में ममता बनर्जी ने लोगों से कहा था कि वे फॉर्म जमा नहीं करेंगी, जो पूरी तरह भ्रामक दावा था। मालवीय ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस रवैये ने पिछले कई महीनों तक राज्य में अनावश्यक भ्रम और गलतफहमियां पैदा की। ममता बनर्जी द्वारा बार-बार गलत जानकारी फैलाने की कोशिशों के बावजूद बंगाल के लोगों ने इस मुद्दे पर उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया
मालवीय ने दावा किया कि राज्य में लगभग 100 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने एसआईआर एन्यूमरेशन फॉर्म समय पर भरकर जमा कर दिए, जिसके चलते चुनाव आयोग को प्रक्रिया बढ़ाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी. इससे यह पता चलता है कि पश्चिम बंगाल के मतदाता अब राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझ चुके हैं।
अमित मालवीय ने आगे लिखा कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह है कि पश्चिम बंगाल के मतदाता अब ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के दावों पर पहले जैसा भरोसा नहीं करते।लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी और ममता के उलझाने वाले बयानों को नजरअंदाज करने से यह साफ हो गया है कि जनता अब तथ्यों के साथ खड़ी है।
मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी का भ्रम फैलाने वाला दौर खत्म हो रहा है और तृणमूल सरकार का समय अब सीमित है। मतदाता अब बदलाव के मूड में दिख रहे हैं और यह राज्य की राजनीति में आने वाले समय में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।









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