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    Home » विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रांतीय अधिवेशन में पास हुए तीन प्रस्ताव

    विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रांतीय अधिवेशन में पास हुए तीन प्रस्ताव

    Roaming ExpressBy Roaming ExpressDecember 14, 2025 अंतर्राष्ट्रीय

    संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी को शामिल करे केंद्र सरकार

    भोजपुरी की मर्यादा भंग करने वालों का तिरस्कार करें : मनोज तिवारी

    विशेष संवाददाता

    देवरिया।

    भोजपुरी संस्कृति पर्व 2025, विश्वभोजपुरी सम्मेलन की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रांतीय अधिवेशन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाय। कल से देवरिया में शुरू हुए अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में किए गए व्यापक विमर्श के तीन बड़े प्रस्ताव पारित किए गए।

    अधिवेशन में सर्व सम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि भारत गणराज्य के संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना आवश्यक है। वर्तमान समय में भोजपुरी भाषा का व्याकरण, साहित्य, इसकी संस्कृति ,इस पर आधारित बाजार और इसकी भाषिक संप्रेषणीयता भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अनेक भाषाओं से बहुत व्यापक है। भोजपुरी भाषी आबादी अब लगभग 20 करोड़ है।

    अधिवेशन में विमर्श के निष्कर्ष स्वरूप यह प्रस्ताव पारित किया गया कि भारत की इतनी बड़ी भाषा को सुव्यवस्थित और संरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश में भोजपुरी अकादमी की स्थापना अनिवार्य है। बिहार, मध्यप्रदेश और दिल्ली में राज्यों की भोजपुरी अकादमी पहले से ही स्थापित होकर कार्य कर रही हैं। इसके लिए भोजपुरी भाषी क्षेत्र का एक बड़ा क्षेत्र उत्तर प्रदेश में अकादमी की स्थापना होने से ही इस भाषा का विकास हो सकेगा।

    भोजपुरी साहित्य, संस्कृति और इसके संप्रेषणीय स्वरूप की मधुरता और व्यापकता को देखते हुए इस के व्यावसायिक प्रयोग के लिए एक सशक्त नियामक आयोग अथवा सेंसर बोर्ड बनाया जाना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके इस भाषा में अश्लीलता और प्रदूषण के तत्व डाल कर केवल व्यवसाय करने के तंत्र को नियंत्रण में रखा जा सके। भोजपुरी संस्कृति और भाषा को अश्लील तत्व से सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है।

    विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अधिवेशन की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे ने की। देवरिया में इस अधिवेशन के संयोजक और उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने अधिवेशन में तीनों प्रस्ताव रखे जिन पर चर्चा के बाद इन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया।

    इससे पूर्व इस अधिवेशन की औपचारिक शुरुआत प्रख्यात गायक, अभिनेता और दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी के हाथों दीप प्रज्वलन से हुआ। इस भव्य समारोह को संबोधित करते हुए मनोज तिवारी ने भोजपुरी को संस्कृति का पर्याय बताया और जनता का आवाहन किया कि इस संस्कृति को विकृत करने वालों को जनता तिरस्कृत करे। भोजपुरी भाषा के हृदय स्थल देवरिया की धरती पर विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संस्कृति पर्व 2025 का भव्य शुभारंभ हो गया। राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया के विशाल प्रांगण में हजारों भोजपुरी प्रेमियों के बीच इस दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत प्रख्यात भोजपुरी अभिनेता, गायक और दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी मृदुल, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे, इसके संयोजक और प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी और अनेक प्रख्यात मनीषियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने अपने गंभीर, सारगर्भित और विविध आयामी उद्बोधन से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।मनोज तिवारी ने अपने उदघाटन उद्बोधन में कहा कि भारत के यशस्वी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी को भोजपुरी भाषा और संस्कृति से बहुत गहरा लगाव है। इसलिए भोजपुरी को बहुत जल्दी संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिल सकता है। श्री तिवारी ने कहा कि प्रधान मंत्री जी स्वयं भोजपुरी के हृदय स्थल काशी के प्रतिनिधि हैं। वह अनेक बार भोजपुरी में ही जनता को संबोधित कर चुके हैं। केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व को यह लोक भाषा बहुत पसंद है। इसीलिए भाजपा भोजपुरी संस्कृति के प्रतिनिधियों को बहुत महत्व देती है। अभी हाल ही संपन्न हुए बिहार के चुनाव इस बात के साक्षात प्रमाण हैं। भोजपुरी की महत्ता के कारण ही नेतृत्व ने मुझे भी अत्यधिक सम्मान और महत्व देकर भोजपुरी को ही आगे बढ़ाया है। आज सिद्धार्थ जी के संयोजन में देवरिया का यह भोजपुरी संस्कृति पर्व भारतीय लोक भाषाओं के उन्नयन के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।श्री तिवारी ने अपने संबोधन में पंडित विद्यानिवास मिश्र और डॉ अरुणेश नीरन को कई बार याद किया।

    समारोह को संबोधित करते हुए विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे ने कहा कि देवरिया में आज से तीस वर्ष पूर्व जो बीज पंडित विद्यानिवास मिश्र एवं डॉ अरुणेश नीरन जी ने सेतु की सन्निधि में रोपित किया था, आज वह विराट स्वरूप में दिख रहा है। इस विशाल अधिवेशन को यह स्वरूप देने वाले संयोजक सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी कोटि कोटि बधाई के पात्र हैं। भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में स्थापित करने के लिए चलाए जा रहे इस आंदोलन में मनोज तिवारी की आज प्रकट हुई भावना ने यह विश्वास दिलाया है कि 30 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली इस लोक भाषा को अब उसका वास्तविक स्थान मिलेगा।

    संस्कृति पर्व के संस्थापक संपादक आचार्य संजय तिवारी ने कहा कि भोजपुरी केवल एक लोकभाषा ही नहीं है बल्कि भारतीय ज्ञान साहित्य की लोक संप्रेषण शक्ति है। इसकी लोक चेतना से भारत की स्वाधीनता का पूरा इतिहास भरा पड़ा है। भोजपुरी वस्तुतः वेद की लोकवाणी है। यहां हमें यह ध्यान देना चाहिए कि अपनी इस मातृभाषा का सम्मान स्वयं से करना शुरू करें। इसको सबसे सटीक रूप में मराठा संस्कृति से सीखा जा सकता है। प्रत्येक मराठी आपस में केवल मराठी में ही अपनी बात करते हैं, चाहे वे जहां भी हों। भोजपुरी के साथ ऐसा नहीं है। दो भोजपुरी भाषी लोग जहां भी मिलते हैं, वही के अनुसार भाषा का इस्तेमाल करते हैं। होना यह चाहिए कि यदि हम भोजपुरी भाषी चाहे जहां हों, केवल अपनी मातृभाषा में ही संवाद करें। अपने संबोधन में देवरिया के नगर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भोजपुरी की महत्ता पर प्रकाश डाला।

    भोजपुरी संस्कृति पर्व, देवरिया के संयोजक सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने अपने आधार एवं स्वागत वक्तव्य में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति की देवारण्य की पावन भूमि पर आप सभी की गरिमामय उपस्थिति से अभिभूत हूं। आज से 30 वर्ष पूर्व इसी भूमि पर इसी प्रांगण में विश्व भोजपुरी सम्मेलन की नींव रखी गई थी। संस्था के शिल्पकार अरुणेश नीरन को समर्पित इस अधिवेशन का आयोजन क़रीब तीस साल बाद देवरिया के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर किया जा रहा है । तीन दशक बीत गए। विश्व भोजपुरी सम्मेलन का यह भाषा आंदोलन अपनी गति के साथ चल रहा है और अब एक ऐसे मुकाम की ओर है जिसमें भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषाओं में इसे शामिल होने में कुछ दूरी शेष रह गई है। देवरिया में इस आयोजन का गंभीर अभिप्राय है। आप सभी को यह विदित है कि विगत वर्षों में भोजपुरी भाषा के राजनीतिक भावनात्मक उपयोग की कोशिश अनेक राष्ट्रीय नेताओं से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के पुरोधाओं ने की है। हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री युगपुरुष नरेंद्र मोदी जी भोजपुरी के गढ़ से ही चुन कर आते हैं। काशी से लेकर बिहार तक माननीय प्रधानमंत्री जी के अनेक भाषण भोजपुरी से ही शुरू होते रहे हैं। इससे पहले भी कई राजपुरूषों ने यह प्रयोग किया। भोजपुरी भाषी भोली जनता का भावनात्मक जुड़ाव सभी को मिला लेकिन अभी तक इतनी मीठी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिल सका। यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह जी को भोजपुरी बहुत प्रिय है। इसके बारे में आदरणीय मनोज तिवारी जी मुझे ज्यादा बेहतर अनुभव रखते हैं। जब हम भोजपुरी की बात कर रहे हैं और आज विश्व भोजपुरी सम्मेलन की स्थापना की भूमि पर 30 वर्षों के बाद यह जुटान हुई है तो बहुत सी बातें कहने को जबान तक आती है। भोजपुरी कोई सामान्य बोली या संकेतांक भर नहीं है। देव भाषा संस्कृत की यह लोकभाषा है । राजकीय इंटर कॉलेज देवरिया के इस प्रांगण में इस आयोजन में देश और दुनिया में भोजपुरी साहित्य, संस्कृति और भाषा पर गंभीर कार्य कर रहे प्रख्यात विद्वान, संस्कृति कर्मी, लेखन, साहित्यकार, रंग कर्मी, गायक, कवि और संस्कृति के अध्येता एक साथ एक मंच पर सम्मिलित होकर भोजपुरी की बात किए। दो दिनों का यह एक ऐसा वैश्विक आयोजन रहा जो भोजपुरी को भाषा के रूप में उसका स्थान अवश्य सुनिश्चित कराएगा। उद्घाटन समारोह में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष विनय मानी त्रिपाठी ने लोक भाषा के महत्व पर गंभीर चर्च की। उन्होंने इस आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया। समारोह में प्रख्यात गायिका कल्पना पटवारी, भरत शर्मा व्यास, मदन राय, शिल्पी राज और आलोक कुमार एवं अनेक भोजपुरी साधक भी उपस्थित थे। प्रख्यात शिक्षाविद एवं संस्कृति पर्व की कार्यकारी संपादक डॉ अर्चना तिवारी भी उपस्थित थीं। इस अधिवेशन में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संस्थापक सदस्य जगदीश उपाध्याय, झारखंड से डॉ अजय ओझा, वाराणसी से अपूर्व नारायण तिवारी सहित बड़ी संख्या में सदस्य और पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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