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    Home » हंगामा है क्यों बरपा छापामारी ही तो की है, चोरी तो नहीं की है डाका तो नहीं डाला…..

    हंगामा है क्यों बरपा छापामारी ही तो की है, चोरी तो नहीं की है डाका तो नहीं डाला…..

    Roaming ExpressBy Roaming ExpressJanuary 8, 2026 बंगाल

     

    अशोक झा/ सिलीगुड़ी: वैसे तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड आए दिन देश के कई राज्यों में चलती रहती है लेकिन गुरुवार को ईडी पश्चिम बंगाल में इंडियन पॉलिटिल एक्शन कमेटी (IPAC) कंपनी पर छापा मारा है। यह छापा इसलिए खास हो गया क्योंकि ईडी के कार्रवाई के बीच में सीएम ममता बनर्जी भी कंपनी ऑफिस पहुंच गईं।
    इस कंपनी के को-फाउंडर प्रतीक जैन हैं। बता दें कि I-PAC कंपनी सॉल्ट लेक में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने इस कंपनी की स्थापना की थी। प्रशांत प्रमुख राजनीतिक रणनीतिकार रहे हैं। अब प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी बनाकर बिहार में विधानसभा चुनाव में चुनाव में लगा।प्रतीक जैन की उम्र करीब 34 साल है। उन्होंने आईआईटी बांबे से अपनी पढ़ाई पूरी की है। साल 2021 में प्रशांत किशोर ने आधिकारिक रूप से इस कंपनी को छोड़ दिया था। इसके बाद से ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन कंपनी के डायरेक्टर बन गए। साल 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से I-PAC पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ काम कर रही है। 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की बड़ी जीत और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का बड़ा श्रेय आई-पैक को दिया जाता है।ईडी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, प्रतीक जैन के घर में दाखिल हुईं और दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सहित अहम सबूत अपने साथ ले गईं। दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेने के बाद ममता बनर्जी का काफिला आई-पैक कार्यालय पहुंचा, जहां से मुख्यमंत्री, उनके सहयोगियों और पुलिस ने जबरन दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हटा दिए।
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ आने तक छापेमारी की कार्यवाही शांतिपूर्ण और पेशेवर तरीके से चल रही थी। करोड़ों रुपये के कोयले के कथित अवैध खनन व तस्करी मामले में धन शोधन जांच के तहत यह कार्रवाई की गई। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में संघीय जांच एजेंसी द्वारा सुबह सात बजे से लगभग 10 परिसरों पर छापेमारी की जा रही है।
    इनमें साल्ट लेक स्थित आई-पैक का कार्यालय और लाउडन स्ट्रीट स्थित जैन का घर भी शामिल है। इन 10 परिसरों में चार दिल्ली में हैं। उन्होंने बताया कि आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र जैन ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के सह-संस्थापक और निदेशक हैं। पश्चिम बंगाल में कोयला ”घोटाले” से जुड़े कुछ हवाला लेनदेन और नकद लेनदेन के संबंध में उनके खिलाफ ”विशिष्ट” साक्ष्य हैं।
    वह पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी हैं। ईडी का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नवंबर 2020 में दर्ज की गई प्राथमिकी से उपजा है, जिसमें बंगाल के आसनसोल और उसके आसपास के कुनुस्तोरिया और काजोरा क्षेत्रों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स की खदानों से संबंधित कई करोड़ रुपये के कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था।
    स्थानीय कोयला व्यापारी अनूप मांझी उर्फ लाला इस मामले में मुख्य संदिग्ध है। ईडी ने इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी (38) से पूछताछ की थी, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं। ईडी ने दावा किया कि अवैध कोयला व्यापार से प्राप्त धन के वह लाभार्थी हैं।
    ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और आधिकारिक काफिले के साथ जैन के आवास पर पहुंचकर छापेमारी को ”राजनीतिक रूप से प्रेरित” और ”असंवैधानिक” बताया। ईडी सूत्रों ने कहा कि यह कार्रवाई ”पूरी तरह से कोयला घोटाला मामले और उससे जुड़े अपराध से अर्जित आय के आधार पर की गई है और इसमें कोई राजनीतिक पहलू नहीं है।”
    उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी जैन और कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता दर्शाने वाले ”विशिष्ट” साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान चला रहे अधिकारी विशिष्ट कंप्यूटर उपकरण और दस्तावेज़ ज़ब्त कर रहे हैं। ईडी की कार्रवाई पर आई-पैक की प्रतिक्रिया फिलहाल नहीं मिली है।
    ईडी की कार्रवाई की निंदा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ”उन्होंने हमारे आईटी प्रमुख के आवास पर छापा मारा है। वे मेरी पार्टी के दस्तावेज़ और हार्ड डिस्क ज़ब्त कर रहे हैं, जिनमें विधानसभा चुनावों के लिए हमारे उम्मीदवारों का विवरण है। मैंने उन्हें वापस ले लिया है।” उन्होंने संघीय एजेंसी पर सत्तारूढ़ पार्टी की हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, उम्मीदवारों की सूची और आंतरिक रणनीति संबंधी दस्तावेज़ों को भी ले जाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया, ”क्या किसी राजनीतिक दल का डेटा इकट्ठा करना ईडी का काम है?”
    वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने आई-पैक की स्थापना की थी। बाद में उन्होंने जन सुराज नामक एक राजनीतिक दल बनाया, जिसे पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनावों में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। इस परामर्श फर्म ने 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ काम किया था।
    तृणमूल और पश्चिम बंगाल सरकार के लिए 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए कार्यों से संबंधित एक टैब आई-पैक की वेबसाइट पर साझा किया गया है, जिसका शीर्षक है ‘दीदी-आर 10 ओंगीकर’। वेबसाइट के अनुसार, आई-पैक ऐसे ”दूरदर्शी” नेताओं के साथ काम करता है जिनका ”सिद्ध” ट्रैक रिकॉर्ड है।
    ममता ने क्या आरोप लगाए?
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी यहां आई-पीएसी प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर तलाश अभियान के दौरान तृणमूल कांग्रेस की हार्ड डिस्क, आंतरिक दस्तावेज और संवेदनशील संगठनात्मक डाटा जब्त करने का प्रयास कर रहे थे। ममता बनर्जी ने जैन के आवास पर हुई छापेमारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित और असंवैधानिक बताया। आई-पीएसी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आईटी सेल की जिम्मेदारी भी संभालता है।
    ममता बनर्जी ने जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास से बाहर निकलने के बाद ये आरोप लगाए, जहां गुरुवार सुबह से ही तलाश अभियान जारी है. प्रतीक जैन के नेतृत्व वाली फर्म ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पीएसी) के कार्यालय में भी तलाश अभियान चलाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय सत्तारूढ़ पार्टी की आंतरिक रणनीति, उम्मीदवारों की सूचियां और गोपनीय डिजिटल सामग्री तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी का किसी भी वित्तीय जांच से कोई संबंध नहीं है। ममता बनर्जी ने टीएमसी के आईटी प्रमुख के आवास पर ईडी की छापेमारी पर कहा कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री का काम राजनीतिक दलों के आईटी प्रमुखों के आवासों पर छापा मारना है। सीएम ने कहा कि क्या पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची इकट्ठा करना ईडी और अमित शाह का काम है?… ये निकम्मे गृह मंत्री, जो देश की रक्षा नहीं कर सकते, मेरी पार्टी के सारे दस्तावेज़ ले जा रहे हैं।
    अगर मैं भाजपा के पार्टी कार्यालय पर छापा मारूँ तो क्या होगा? एक तरफ तो वे पश्चिम बंगाल में एसआईआर (चुनाव सूचना प्राधिकरण) चलाकर सभी मतदाताओं के नाम मिटा रहे हैं… चुनाव के नाम पर वे मेरी पार्टी से जुड़ी सारी जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ‘फर्जी’ सरकारी नौकरी घोटाला मामले में धनशोधन की जांच के तहत बृहस्पतिवार को छह राज्यों में 15 स्थानों पर छापेमारी की।अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कोयला तस्करी मामले की जांच की आड़ में शुरू हुई इस कार्रवाई ने उस वक्त नाटकीय मोड़ ले लिया, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं।
    मुख्यमंत्री जब प्रतीक के घर के अंदर गईं तो वह खाली हाथ थीं, लेकिन बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक ‘हरी फाइल’ देखी गई, जिसने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। ममता बनर्जी ने इस रेड को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताते हुए केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि “ED का मकसद भ्रष्टाचार की जांच करना नहीं, बल्कि आई-पैक से हमारी आगामी उम्मीदवारों की सूची और चुनाव जीतने की गोपनीय रणनीति को चुराना है।”
    साल्ट लेक स्थित आई-पैक के ऑफिस में भी ED की टीमें दस्तावेजों को खंगाल रही हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि ED ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन चुनावी मौसम में इस छापेमारी ने बंगाल की राजनीति में आग लगा दी है। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई सरकारी नौकरियों के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र भेजने से जुड़े एक मामले में धनशोधन की जांच के तहत की गई। उन्होंने बताया कि एक संगठित गिरोह पर एजेंसी की नजर है। उन्होंने कहा कि ईडी का पटना कार्यालय बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, गुजरात और उत्तर प्रदेश में तलाश अभियान चला रहा है।अधिकारियों ने बताया कि शुरू में तो इस घोटाले का पता रेलवे के नाम पर चला, लेकिन गहन जांच में मालूम हुआ कि इसमें वन विभाग, आरआरबी (रेलवे भर्ती बोर्ड), इंडिया पोस्ट, आयकर विभाग, कुछ उच्च न्यायालय, पीडब्ल्यूडी, बिहार सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण, राजस्थान सचिवालय और अन्य समेत 40 से अधिक सरकारी संगठन और विभाग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ईडी ने पाया कि गिरोह ने फर्जी ईमेल खातों का इस्तेमाल करके फर्जी नियुक्ति पत्र भेजे। अधिकारियों ने बताया कि अभ्यर्थियों का विश्वास हासिल करने के लिए, गिरोह ने कुछ पीड़ितों को 2-3 महीने का शुरुआती वेतन दिया, जिन्हें धोखाधड़ी से आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल), रेलवे टीटीई (यात्रा टिकट परीक्षक) और तकनीशियन आदि जैसे संगठनों में नियुक्त किया गया था।उन्होंने कहा कि बिहार के मुजफ्फरपुर और मोतिहारी, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, केरल के एर्नाकुलम, पंडालम, अदूर और कोदुर, तमिलनाडु के चेन्नई, गुजरात के राजकोट और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, प्रयागराज तथा लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर तलाश अभियान चलाया जा रहा है।

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