– कोयला, कैश और I-PAC: 2700 करोड़ के सिंडिकेट में ED की स्ट्राइक, लेकिन क्यों उड़ी ममता दीदी की नींद
– I-PAC पर ED Raid से बौखलायीं ममता बनर्जी, कहा- मिस्टर प्राइम-मिनिस्टर, प्लीज कंट्रोल योर होम मिनिस्टर
– कल खुद सड़क पर उतर करेगी भाजपा और ईडी का विरोध
अशोक झा/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच का टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पीएसी (I-PAC) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद शुरू हुआ विवाद अब ‘दस्तावेज चोरी’ के गंभीर आरोपों और एजेंसी के तीखे स्पष्टीकरण तक जा पहुंचा है।पश्चिम बंगाल पुलिस अतिक्रमण और आपराधिक धमकी में शामिल ईडी अधिकारियों को गिरफ्तार कर सकती है। दूसरी तरफ ईडी ने मुख्यमंत्री बनर्जी पर जांच में बाधा डालने और तलाशी स्थल से जबरन सबूत हटाने का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। खबरों के मुताबिक, कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी है और सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है। आईपैक भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।पूरा घटनाक्रम किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं रहा। ऐसे में आइए जानें पूरी टाइमलाइन।
ED और I-PAC दोनों पहुंची हाई कोर्ट
ईडी के छापेमारी के खिलाफ अब IPAC भी हाई कोर्ट पहुंच गई है। उसने तुरंत रेड रोकने की मांग की है। दूसरी ओर ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसकी जांच में दखल दिया गया।
एजेंसी का कहना है कि जब वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में वैध तरीके से तलाशी ले रही थी, उसी दौरान कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों ने दस्तावेजों को जबरन अपने कब्जे में ले लिया। ईडी ने अदालत से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार (09 जनवरी) को जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच के सामने होने की संभावना है। I-PAC कंपनी किसने बनाई? प्रतीक जैन कौन हैं? ममता बनर्जी के लिए क्या बनाते हैं चुनावी रणनीति
किस मामले में हुई छापेमारी?
ईडी के मुताबिक, यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दल या चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं की गई। एजेंसी का दावा है कि छापे अवैध कोयला तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के तहत किए गए।
08 जनवरी को कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली गई, जिनमें 6 पश्चिम बंगाल और 4 दिल्ली में बताए जा रहे हैं। इनमें I-PAC का कोलकाता स्थित कार्यालय और उसके सह संस्थापक व डायरेक्टर प्रतीक जैन का आवास भी शामिल था।
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छापेमारी को लेकर क्या कह रही है ईडी?
ईडी ने साफ किया है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी कार्यालय पर छापा नहीं मारा गया। जांच उन परिसरों तक सीमित है, जहां कैश जनरेशन और हवाला ट्रांसफर से जुड़े इनपुट मिले थे। एजेंसी ने यह भी कहा कि तलाशी के दौरान कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर जांच में अवैध दखल दिया और दस्तावेज छीन लिए, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।
सुबह से शाम तक कैसे बदला माहौल: 8 जनवरी की सुबह तड़के ईडी की टीमें दिल्ली से कोलकाता पहुंचीं। दिन निकलते ही दो जगहों पर एक साथ तलाशी शुरू हुई। पहली टीम सेंट्रल और साउथ कोलकाता के बीच स्थित प्रतीक जैन के घर पहुंची, जबकि दूसरी टीम साल्ट लेक इलाके में I-PAC के पुराने दफ्तर में दाखिल हुई। शुरुआत में सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था, लेकिन करीब साढ़े ग्यारह बजे के बाद हालात तेजी से बदलने लगे। पहले कोलकाता के पुलिस कमिश्नर प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे। कुछ ही देर बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उसी घर पर पहुंच गईं, जहां ईडी की कार्रवाई चल रही थी। ममता बनर्जी के IPAC ऑफिस पर ED एक्शन से मचा घमासान,दीदी बोलीं- TMC के दस्तावेज उठा ले गए
ग्रीन फाइल और बड़े आरोप
ममता बनर्जी कुछ समय तक अंदर रहीं। बाहर निकलते वक्त उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी, जिसने सियासी हलकों में अटकलों को और तेज कर दिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह छापेमारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर कराई जा रही है। उनका कहना था कि ईडी तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों की सूची और पार्टी से जुड़े संवेदनशील डेटा को जब्त करने की कोशिश कर रही है।
I-PAC ऑफिस तक पहुंचा मामला: प्रतीक जैन के घर से निकलने के बाद ममता बनर्जी सीधे साल्ट लेक स्थित I-PAC के ऑफिस पहुंचीं। बताया गया कि वह पिछले दरवाजे से अंदर गईं। करीब 15 से 20 मिनट बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के कुछ अधिकारी बाहर आते दिखे, जिनके हाथ में फाइलें थीं। इन फाइलों को उसी गाड़ी में रखा गया, जिससे मुख्यमंत्री वहां पहुंची थीं। हालांकि यह साफ नहीं हो सका कि ये दस्तावेज ईडी की तलाशी के दौरान बरामद हुए थे या नहीं।
सीएम ममता बनर्जी ने क्या कहा?
ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में कहा कि क्या ईडी और गृह मंत्री का काम पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची जब्त करना है। उन्होंने इसे घटिया राजनीति बताया और कहा कि उनकी पार्टी के दस्तावेज उठाकर ले जाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे अपने गृह मंत्री को नियंत्रित करें और अगर बीजेपी चुनावी लड़ाई जीतना चाहती है तो लोकतांत्रिक तरीके से लड़े।
बीजेपी का पलटवार: बीजेपी ने ममता बनर्जी पर जांच में दखल देने का आरोप लगाया। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डाली है और यह कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है। उन्होंने सवाल उठाया कि I-PAC के दफ्तर में वोटर लिस्ट क्यों मिली और क्या वह कोई पार्टी कार्यालय है।
क्या है I-PAC? इन पूरे प्रकरण के बीच आपको ये भी जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर ये पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC क्या है और इसका बंगाल की राजनीति से क्या लेना देना है. ED के एक्शन के बीच दो नामों की चर्चा खूब की जा रही है, जिसमें सबसे पहले पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC और फिर दूसरे इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन शामिल है. बता दें कि I-PAC एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जिसकी शुरुआत प्रशांत किशोर ने की थी। जानकारी के अनुसार, करीब 11 साल पहले 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले इस फर्म की शुरुआत की गई थी।









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