
– सीमांचल में बढ़ते खतरे को लेकर छुपे राष्ट्रद्रोहियों की पहचान पर होगा बार
किशनगंज से अशोक झा : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुधवार शाम करीब 5 बजे बिहार के किशनगंज पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत डिप्टी सीएम सह बिहार के गृहमंत्री सम्राट चौधरी,केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और राज्य के पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने किया।किशनगंज पहुंचते ही अमित शाह मेंची सभागार में समीक्षा बैठक में शामिल हुए। यहां जिला प्रशासन, आईबी, SSB, BSF, आईटीबीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा पर चर्चा हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी तंत्र मजबूत करने, अवैध गतिविधियों पर रोक, खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीकी निगरानी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों के तालमेल को भी प्राथमिकता दी जा रही है। बैठक में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जा रहा है। यह पहली बार है जब केन्द्रीय गृह मंत्री इतने विस्तार से सीमांचल में जनसांख्यिकीय और सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार केन्द्रीय गृह मंत्री का मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, अवैध धार्मिक निर्माण और जनसांख्यिकीय बदलाव पर रहेगा। विपक्ष इसे सांप्रदायिक एजेंडा बता रहा है, जबकि केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
चिकन नेक के तीन सीमावर्ती जिलों पर फोकस: यह दौरा 25 से 27 फरवरी तक चलेगा। इसका मुख्य फोकस किशनगंज, अररिया और पूर्णिया जिलों पर है। तीनों जिले नेपाल सीमा से सटे हैं। सुरक्षा के लिहाज से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। सीमा पार गतिविधियों, घुसपैठ और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर खास जोर दिया जा रहा है।
रात में होगी बंगाल बिहार की राजनीति पर गहन चिंतन और मनन : पहली प्रशासनिक बैठक के बाद अमित शाह मंत्री दिलीप जायसवाल के आवास पर दूसरी बैठक करेंगे। यह बैठक देर रात तक चल सकती है। इसमें भाजपा नेताओं के साथ राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होगी। खासतौर पर 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बन सकती है।सूत्रों के अनुसार बंगाल के कई प्रभावशाली नेता भी किशनगंज पहुंचे हैं। सीमांचल और उत्तर बंगाल की भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए भाजपा इस दौरे को अहम मान रही है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार का सीमांचल अमित शाह के लिए ‘लॉन्च पैड’ है। इसी साल पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा की चुनावी कमान खुद अमित शाह संभालेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह बिहार में अपनाए गए ‘बूथ-लेवल मैनेजमेंट और कार्यकर्ता संवाद मॉडल’ को बंगाल और असम में लागू करेंगे।पश्चिम बंगाल में भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए अमित शाह बिहार की तर्ज पर संगठनात्मक समीक्षा, रणनीतिक बैठकें और साझा अभियान की तैयारी कर रहे हैं। बिहार में एनडीए के सहयोगियों के साथ जिस तरह संयुक्त प्रचार और बूथ मैनेजमेंट किया गया, उसी मॉडल को बंगाल और असम में दोहराया जाएगा।
अमित शाह का यह प्रवास साफ संदेश दे रहा है कि आने वाले 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा चुनावों में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, राष्ट्रीय पहचान और विकास को प्रमुख मुद्दा बनाने जा रही है। यानी साफ है बिहार से अमित शाह न सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा साध रहे हैं, बल्कि असम और बंगाल की सियासी जमीन भी मजबूत करने में जुट गए हैं। किशनगंज, अररिया और पूर्णिया में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान सीमा पार घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क और बदलते डेमोग्राफी स्वरूप जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। इस दौरान वे जिला अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। उल्लेखनीय है कि सीमांचल का इलाका चुनावी नजर से भी अहम माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाता हैं। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बता दें कि केंद्र और भाजपा का कहना है कि यह सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि सुरक्षा का सवाल है। सरकार का दावा है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ लंबे समय से चिंता का विषय रही है। अमित शाह पहले भी कह चुके हैं कि अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री के सीमांचल दौरे में अवैध निर्माण, संदिग्ध गतिविधियों और सीमा प्रबंधन की समीक्षा की जाएगी। दरअसल, सीमांचल में घुसपैठ के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सीमांचल में किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले आते हैं। यह इलाका नेपाल और बांग्लादेश सीमा के पास स्थित है।
इसे रणनीतिक रूप से भी अहम माना जाता है क्योंकि यही क्षेत्र देश की सुरक्षा के लिए संवेदनशील चिकन नेक कॉरिडोर के करीब है जो पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भूमि से जोड़ता है। वहीं, इस इलाके में आबादी का परिवर्तन और इसमें आ रहा असंतुलन एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में मुस्लिम आबादी 16.87 प्रतिशत थी।
लेकिन किशनगंज जिले में यह प्रतिशत करीब 68 के आसपास दर्ज किया गया। साथ ही यह भी कि सीमांचल क्षेत्र के अररिया, कटिहार और पूर्णिया में भी मुस्लिम आबादी राज्य औसत से अधिक है। 2001 से 2011 के बीच बिहार की कुल आबादी में करीब 25.4 प्रतिशत वृद्धि हुई। इसी अवधि में मुस्लिम आबादी में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
सीमांचल जिलों में यह वृद्धि राज्य औसत से थोड़ी अधिक रही। 1981 और 1991 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस समय भी पूर्णिया प्रमंडल में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत धीरे धीरे बढ़ता दिखा। हालांकि, राज्य स्तर पर बड़ा बदलाव नहीं हुआ। जानकार मानते हैं कि उच्च जन्म दर, रोजगार के लिए प्रवासन और सीमा पार आवाजाही जैसे कई कारण इस बदलाव से जुड़े हो सकते हैं।








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