
– प्रशासन की ओर से इसे रोकने की हर संभव हो रही तैयारी
– आरोप, वोटबैंक के लिए अपराधियों पर नहीं हो पा रही कारवाई
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: उत्तर बंगाल में आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ कल गुरुवार को उत्तर कन्या अभियान का आह्वान किया गया है। बुधवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में जनजाति सुरक्षा मंच की नॉर्थ बंगाल ब्रांच की तरफ से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई। जनजाति सुरक्षा मंच की तरफ से श्री शरद चौहान, श्रीमती पूजा राम और श्री पुनेई ओराव ने मौजूद पत्रकार साथियों को संबोधित किया। श्री चौहान ने कहा कि MD कादिर नाम के बदमाश और उसके गैंग ने सिलीगुड़ी के पास फांसीदेवा में जालास ग्राम पंचायत के झमकलाल जोत इलाके की आदिवासी महिला रोशनी ओराव पर एक आदिवासी परिवार की ज़मीन पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा करने के लिए हमला किया। रोशनी ओराव, सात महीने की प्रेग्नेंट होने के बावजूद, ज़मीन बचाने के लिए जिहादी कादिरों को रोकने गई थीं। उस समय, जिहादी कादिर ने रोशनी के साथ मारपीट की और उसे लातें मारी। नतीजतन, नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज में रोशनी ओराव ने जिस बच्चे को जन्म दिया, उसकी अगले दिन मौत हो गई।इसके विरोध में, जनजाति सुरक्षा मंच ने महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए कल, गुरुवार, 26/02/2026 को दोपहर 1 बजे सिलीगुड़ी के जलपाईमोर से उत्तरकन्या तक एक आक्रोश रैली निकालने का फैसला किया है। आक्रोश रैली में, आयोजकों ने सभी क्षेत्रों के नागरिकों से जनजाति समुदाय के साथ खड़े होने की अपील की।उत्तर बंगाल (दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दिनाजपुर, मालदा) में संथाल, ओरांव, मुंडा, राव और टो टो जैसी प्रमुख आदिवासी जनजातियां निवास करती हैं, जो चाय बागानों और वन क्षेत्रों में अपनी अनूठी संस्कृति (करम, सोहराई) और जीविका के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह समुदाय लंबे समय से भूमि अधिकार, शिक्षा और आर्थिक बेहतरी के लिए प्रयासरत है, जिसमें महिला श्रमिक अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रमुख समुदाय और क्षेत्र: उत्तर बंगाल के चाय बागानों (डुआर्स) में आदिवासी आबादी काफी अधिक है। संथाल सबसे बड़ा समूह है, साथ ही ओरांव, मुंडा, भूमीज, कोरा, लोधा, महाली और टोटो भी यहां निवास करते हैं। संस्कृति और परंपरा: उनकी संस्कृति में करम नृत्य, सोहराई और मडोल का विशेष महत्व है। टो टो जैसे समुदाय अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए जाने जाते हैं।
आजीविका और मुद्दे:चाय बागान: अधिकांश आदिवासी परिवार चाय बागानों में काम करते हैं। वन विभाग: राव और अन्य समुदाय वन क्षेत्रों में भी कार्यरत हैं। संघर्ष: आदिवासी भूमि अधिकार, शिक्षा, वन उपज पर अधिकार और उचित मजदूरी के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।सरकार की पहल: सरकार ने आदिवासी समुदायों के विकास के लिए ‘आदिवासी होमस्टे’ को बढ़ावा देने और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करना शुरू किया है। जिसे राज्य सरकार के द्वारा मदद नहीं मिल पा रही है। इसके पहले दार्जिलिंग के सांसद राजू विष्ट ने घटना स्थल का दौरा कर पुलिस को चेतावनी दी थी कि पुलिस टीएमसी रुपाने काम ना करें और क्षेत्र के गुंडे जिला छोड़ दें।







Hits Today : 991
Who's Online : 10