कहा, भाजपा महिला विरोधी और बंगाल विरोधी”, अधिकारी बदलने से सरकार नहीं बदलेगी
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज कोलकाता की सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य में एलपीजी (LPG) और सीएनजी (CNG) गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के विरोध में टीएमसी (TMC) ने एक विशाल विरोध रैली निकाली। उन्होंने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए उन्हें “महिला विरोधी और बंगाल विरोधी” बताया। सोमवार को कोलकाता के मध्य क्षेत्र स्थित दोरिना चौराहे पर रसोई गैस की कीमत वृद्धि और आपूर्ति संकट के विरोध में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी बदलने से सरकार नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि आप जितने भी अधिकारी बदल दें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जो भी अधिकारी आएंगे, वे बंगाल के हित में ही काम करेंगे।
मुख्यमंत्री ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को हटाए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आधी रात में बिना राज्य सरकार से परामर्श किए एक बंगाली महिला अधिकारी को हटाया गया, जो यह दिखाता है कि वे महिला विरोधी हैं।
उन्होंने राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा के तबादले का भी उल्लेख किया और कहा कि एक सक्षम अधिकारी को हटाना यह दर्शाता है कि उन्हें बंगाल के प्रशासनिक ढांचे से कोई सम्मान नहीं है।
इस दौरान ममता बनर्जी ने राज्य मंत्री शशि पांजा के घर पर कथित हमले को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर भाजपा में हिम्मत है तो वह उनके या अन्य तृणमूल नेताओं के घर पर हमला करके दिखाए, वे उसका जवाब देना जानते हैं।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की रैली वाले दिन ही मंत्री के घर पर हमला कराया गया, जो निंदनीय है और इसके लिए भाजपा को शर्म आनी चाहिए।
रसोई गैस संकट के मुद्दे पर उन्होंने दावा किया कि राज्य में कोई वास्तविक कमी नहीं है बल्कि यह कृत्रिम संकट पैदा किया गया है। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों के कंप्यूटर को बाधित कर आपूर्ति प्रभावित की गई है, जबकि कंपनियों के प्रतिनिधियों से उनकी बात हुई है और गैस की वास्तविक कमी नहीं है।
मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और रसोई गैस संकट के विरोध में कॉलेज स्क्वायर से दोरिना चौराहे तक पैदल मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। रैली के कारण शहर के मध्य हिस्सों में यातायात भी प्रभावित हुआ।
उल्लेखनीय है कि, चुनाव आयोग ने रविवार को पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान कराने की घोषणा की है, जबकि मतगणना बाद में निर्धारित तिथि पर होगी।








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