
– मिले मजमीन के 25 डीड मिले, चाय बगान से लेकर नर्सिंग होम और भी बहुत कुछ
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: आर्थिक अपराधि इकाई (ईओयू) ने मंगलवार को बिहार सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करते हुए उनके 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की है। ईओयू से मिली सूचना के मुताबिक किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार के छह ठिकानों पर छापेमारी की गई है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच में किशनगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी गौतम कुमार के माफियाओं से गहरे साठ-गांठ के प्रमाण मिले हैं। गौतम कुमार 1994 में बिहार पुलिस की सेवा में आये थे। बिहार पुलिस के एक रसूखदार अधिकारी और वर्तमान में किशनगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी -1 गौतम कुमार भ्रष्टाचार के गंभीर दलदल में फंस गए हैं। आर्थिक अपराध इकाई की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि गौतम कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपनी वैध आय से 60.27% अधिक संपत्ति अर्जित की है । आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उनकी अवैध कमाई का आंकड़ा 1 करोड़ 94 लाख 9 हजार 244 रुपए तक जा पहुँचा है । 29 मार्च 2026 को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। सिर्फ अधिकारी नहीं, ‘बेनामी’ संपत्तियों के खिलाड़ी: पूर्णिया से लेकर नेपाल सीमा तक निवेश: जांच रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम कुमार ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए रिश्तों का सहारा लिया । उन्होंने अपनी पत्नी रूबी कश्यप (जो स्वयं एक शिक्षिका हैं), सास पूनम देवी और अपनी महिला मित्र शगुफ्ता शमीम के नाम पर करोड़ों की बेनामी जमीनें खरीदीं । पूर्णिया के डगरुआ में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के किनारे करीब तीन बीघा व्यावसायिक और आवासीय भूमि की खरीद की गई है । इतना ही नहीं, पूर्णिया के मधुबनी मोहल्ले में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से एक आलीशान चार मंजिला मकान भी खड़ा किया गया है । जांच में सिलीगुड़ी, गंगटोक, गुड़गांव और पुणे जैसे शहरों में भी निवेश के सुराग मिले हैं ।
महंगी गाड़ियों का शौक और फर्जी सिम का ‘खतरनाक’ खेल
डीएसपी गौतम कुमार को न केवल जमीनों बल्कि महंगी गाड़ियों का भी बेहद शौक है । उनके बेड़े में हुंडई क्रेटा और दो महिंद्रा थार जैसी गाड़ियाँ शामिल हैं, जिनमें से कुछ दूसरों के नाम पर रजिस्टर्ड हैं ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके । भ्रष्टाचार का खेल यहीं खत्म नहीं होता; जांच में यह भी पाया गया कि वे खुद को छिपाने के लिए दूसरों के नाम पर लिए गए फर्जी सिम कार्ड का उपयोग करते रहे हैं । बैंक खातों में भारी मात्रा में नकदी जमा कर ‘चेन ट्रांसफर’ के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने की भी पुष्टि हुई है ।
पूरा कुनबा शामिल: ईओयू की रडार पर पत्नी, सास और महिला मित्र
आर्थिक अपराध इकाई ने इस पूरे मामले को एक संगठित ‘आपराधिक षड्यंत्र’ करार दिया है । गौतम कुमार के इस भ्रष्टाचार के साम्राज्य में उनकी पत्नी, सास और महिला मित्र शगुफ्ता शमीम की सक्रिय भागीदारी पाई गई है । शगुफ्ता शमीम के नाम पर साल 2019 से अब तक कुल 7 कीमती भूखंड खरीदे गए हैं, जिनका बाजार मूल्य आज करोड़ों में है । ईओयू ने साफ़ किया है कि इन सभी के खिलाफ सहयोग और दुष्प्रेरण (Abetment) का मामला बनता है । फिलहाल, अपर पुलिस अधीक्षक इंद्र प्रकाश को इस मामले की जांच सौंपी गई है और जल्द ही आरोपियों के ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की संभावना है। उनकी अधिकतर तैनाती पूर्णिया, अररिया, बगहा, किशनगंज आदि बॉर्डर जिलों में ही रही है। उनको 2019 में डीएसपी के पद पर प्रोन्नति मिली। जांच में पता चला है कि सीमाई इलाकों में तैनाती की वजह से उनकी कोयला, शराब, एंट्री व लॉटरी माफियाओं के साथ ही सुपारी तस्करों से अच्छे संबंध हैं। एसडीपीओ द्वारा विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर फर्जी सिम कार्ड प्रयोग किए जाने का साक्ष्य मिले हैं। इस संबंध में ईओयू अलग से सत्यापन कर रही है।
पत्नी, सास और महिला मित्र को बनाया सह अभियुक्त
ईओयू ने एसडीपीओ गौतम कुमार के विरुद्ध दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनकी पत्नी रूबी कश्यप, सास पूनम देवी और महिला मित्र शगुफ्ता शमीम को सह अभियुक्त बनाया है। ईओयू की जांच में पता चला है कि गौतम का पूर्णिया स्थित चार तल्ले का पैतृक मकान लगभग 3600 वर्गफीट में है। इसके निर्माण की लागत 2.5 करोड़ से अधिक है।
अभियुक्त के पूर्णिया स्थित मकान की तलाशी में 25 भूखंड की जानकारी मिली है। इसके अलावा पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित मकान की तलाशी में चार भूखंड के दस्तावेज प्राप्त हुए। महिला मित्र शगुफ्ता शमीम के घर की तलाशी में इनके नाम पर खरीदे गये सात भूखंड के कागजात के साथ ही 60 लाख रुपये के स्वर्णाभूषण का पता चला है। शगुफ्ता के नाम पर खरीदे गये कई स्वर्णाभूषण की रसीद, बैंक खाते में नकद राशि जमा करने के प्रमाण और ऑनलाइन रकम ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं। ईओयू ने किशनगंज के एसडीपीओ के विरुद्ध आय से अधिक एक करोड़ 94 लाख 9244 रुपये की संपति अर्जित करने का साक्ष्य पाया। सहरसा के डीआरडीए पर भी ईओयू का शिकंजा: सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार के ठिकानों पर ईओयू की छापेमारी में 2016 से अब तक 16 भूखंड खरीदे जाने का पता चला है। यह भूखंड मुजफ्फरपुर व पटना में स्वयं, पत्नी, पुत्र व पिता के नाम पर खरीदे गये। बैंक खातों में 20 लाख जमा है। इनके द्वारा मुजफ्फरपुर में एक आईटीआई प्रशिक्षण केंद्र भी खोला गया है, जिसको बनाने में करीब डेढ़ करोड़ खर्च हुए। वैभव ने पिता के नाम पर एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया है, जिसके नाम पर एक बीघा जमीन लीज पर ली है। इन्होंने टाटा नेक्सॉन सहित दो वाहन भी खरीदे हैं। स्टेट बैंक के एक लॉकर का पता चला है, जिसे फ्रीज कराया गया है।









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