
-ध्रुव योग व गजकेसरी योग में मनाई जाएगी हनुमान जयंती
– निकली भव्य शोभायात्रा, भक्तों ने लगाए वीर बजरंगी के नारे
अशोक झा/ सिलीगुड़ी:
दो अप्रैल को हनुमान जयंती है। दो अप्रैल को ध्रुव योग और गजकेसरी योग में हनुमान जयंती मनाई जाएगी। उदया तिथि के अनुसार दो अप्रैल को हनुमान जयंती है। आज एक अप्रैल को सुबह 7: 06 तक चतुर्दशी तिथि है उसके बाद पूर्णिमा तिथि आ जाएगी। इस दिन हनुमान जी की पूजा के साथ ही उनसे जुड़ी कथाएं पढ़नी-सुननी चाहिए। आज संतोषीनगर सालासर धाम से बाबा की भक्तिमय शोभायात्रा निकाली गई। शहर के प्रमुख मार्गो से गुजरता हुआ पुन: मंदिर में संपन्न हुआ। हनुमान की कथाओं की सीख को जीवन में उतार लेने से हमारी कई समस्याएं खत्म हो सकती हैं। यहां जानिए एक ऐसा किस्सा, जिसमें सफलता पाने की सीख दी गई है।
सुंदरकांड का किस्सा है। वन की शांति में खड़े हनुमान जी एक ऊंचे पर्वत को देख रहे थे। उनके मन में एक ही लक्ष्य था- माता सीता की खोज। लंबी यात्रा के बाद वे लंका पहुंचे थे, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होने वाली थी।
हनुमान जी ने बिना समय गंवाए पर्वत पर चढ़ना शुरू किया। जैसे-जैसे वे ऊपर पहुंचते गए, उनके सामने लंका का अद्भुत दृश्य खुलता गया। पूरी लंका सोने से चमक रही थी। उसके परकोटे ऐसे दमक रहे थे जैसे सूरज की किरणें उनमें बस गई हों। अंदर सुंदर भवन, चौड़े रास्ते, चौराहे, बाजार, रथ, हाथी और घोड़े- सब कुछ अत्यंत भव्य दिखाई दे रहा था।
इस चमक-दमक के पीछे एक डरावना सच भी छिपा था। लंका की रक्षा भयानक राक्षस कर रहे थे। उनके रूप इतने डरावने थे कि किसी का भी मन कांप जाए। वे निर्दयता से मनुष्यों और पशुओं को खा रहे थे। यह दृश्य किसी को भी भयभीत कर सकता था।
एक पल के लिए कोई भी सोच सकता था कि अब आगे बढ़ना मुश्किल है, लेकिन हनुमान जी के मन में डर का कोई स्थान नहीं था। उन्होंने शांत मन से सोचा- “अगर मैं अपने असली रूप में जाऊंगा, तो ये मुझे देख लेंगे और युद्ध शुरू हो जाएगा। इससे मेरा उद्देश्य पूरा नहीं होगा।”
यह सोचकर उन्होंने अपने विशाल शरीर को छोटा कर लिया- इतना छोटा कि वे मच्छर के समान हो गए। अब वे बिना किसी की नजर में आए लंका में प्रवेश कर सकते थे।
अपने इस छोटे रूप में हनुमान जी ने भगवान राम का स्मरण किया और चुपचाप लंका में प्रवेश कर गए। उनका लक्ष्य स्पष्ट था, मन स्थिर था। इस तरह बुद्धिमानी, धैर्य और सही निर्णय के साथ उन्होंने अपनी यात्रा का अगला कदम बढ़ाया।
हनुमान जी की सीख
डर को अपने ऊपर हावी न होने दें
जब परिस्थितियां कठिन होती हैं, तो डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन अगर हम डर के कारण रुक जाएं, तो हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे। हनुमान जी ने भयानक राक्षसों को देखकर भी डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया। जीवन में भी कठिन हालात आएंगे, लेकिन हमें साहस बनाए रखना चाहिए।
परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालें
कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिन्हें ताकत से नहीं, बल्कि समझदारी से हल किया जा सकता है। हनुमान जी शक्तिशाली थे, लेकिन उन्होंने अपनी शक्ति का उपयोग करने के बजाय अपनी रणनीति बदली और खुद को छोटा कर लिया। यही सीख हमें भी अपनानी चाहिए- हर स्थिति में एक ही तरीका काम नहीं करता, तरीके बदलकर भी सफलता हासिल की जा सकती है।
लक्ष्य पर फोकस रखें
हनुमान जी का उद्देश्य स्पष्ट था- सीता जी को ढूंढना। उन्होंने किसी भी चीज को अपने लक्ष्य से भटकने नहीं दिया। जीवन में भी अगर हमारा लक्ष्य स्पष्ट होगा, तो हम रास्ते की बाधाओं से विचलित नहीं होंगे।
सही समय पर सही निर्णय लें
सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि सही समय पर लिए गए सही फैसलों से मिलती है। अगर हनुमान जी जल्दबाजी करते, तो उनका मिशन असफल हो सकता था। इसलिए निर्णय सोच-समझकर लेना जरूरी है।
अहंकार से दूर रहें
भले ही हम कितने ही सक्षम क्यों न हों, हमें कभी घमंड नहीं करना चाहिए। हनुमान जी ने अपनी शक्ति का दिखावा नहीं किया, बल्कि धैर्य से काम लिया। यही गुण हमें भी अपनाना चाहिए।
आंतरिक शक्ति पर विश्वास रखें
हनुमान जी ने अपनी शक्ति और विश्वास को बनाए रखा। जीवन में आत्मविश्वास बहुत जरूरी है। जब हम खुद पर विश्वास करते हैं, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं लगती।
भगवान का स्मरण करते रहें
कहानी में हनुमान जी हर कदम पर भगवान का स्मरण करते हैं। यह हमें सिखाता है कि चाहे हम कितने भी व्यस्त या सक्षम क्यों न हों, हमें अपने अंदर की शांति और आस्था को बनाए रखना चाहिए। हर पल भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए।
जीवन में सफलता पाने के लिए सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि समझदारी, धैर्य और सही सोच की जरूरत होती है। अगर हम इन गुणों को अपनाएं, तो हम किसी भी कठिन परिस्थिति को आसानी से पार कर सकते हैं।









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