
नेपाल बोर्डर से अशोक झा: नेपाल में विरोध प्रदर्शन का दौर थमता नहीं नजर आ रहा है, इस बीच जेन जी ने सुशीला कार्की को अपना अंतरिम नेता नियुक्त किया है। जानें कौन हैं सुशीला कार्की? नेपाल में चल रहे जेन जी अपने विरोध प्रदर्शन के बीच देश की नई सरकार के गठन, चुनाव और उसके बाद की योजना के लिए राष्ट्रपति और सेना के साथ बातचीत से पहले अपना एजेंडा तय करने के लिए एक बैठक कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस ऑनलाइन वर्चुअल मीटिंग में 4000 से ज़्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया। सूचना है कि देश की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को देश की अंतरिम बागडोर सौंपने पर आम सहमति बन रही है। सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव जेन्जी थोड़ी देर में आर्मी चीफ को देंगे। सूत्रों के मुताबिक आज हुई जेन जी ग्रुप की वर्चुअल बैठक में सुशीला कार्की को 31 फीसदी और काठमांडू के मेयर और रैपर बालेन शाह को 27 फीसदी वोट मिले थे।
पाल की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है. हिंसा और सत्ता संकट के बीच अब देश की कमान कौन संभालेगा, इसे लेकर Gen-Z आंदोलनकारियों ने वर्चुअल बैठक बुलाई
।नेपाल में तीन दिनों से जारी हंगामे के बीच 18 जेलों से कैदी फरार हो गए हैं। इन 18 जेलों से छह हजार कैदी फरार हो गए हैं। बड़ी संख्या में नेपाल में जेल ब्रेक की घटना के बाद गृह मंत्रालय ने सीमा पर तैनात एसएसबी को अलर्ट कर दिया है। वहीं, सीमावर्ती सभी जिलों में विशेष चौकसी बढ़ाने को कहा गया है। गृह मंत्रालय ने आशंका जताई है कि नेपाल में सेना द्वारा बागडोर संभालने के बाद जेल से फरार लोगों के लिए जो धड़ पकड़ अभियान शुरू किया गया है इस वजह से अपराधी नेपाल सीमा खुली होने के कारण सीमावर्ती जिलों में आकर शरण ले सकते हैं।आज CPN अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की बेटी गंगा दहल के जले हुए घर से एक शव बरामद किया गया। ललितपुर के SSP श्याम कृष्ण अधिकारी ने बताया कि शव ढोलाहिटी में स्थित गंगा के आवास से मिला। फिलहाल, शव की पहचान नहीं हो पाई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार शाम को सुप्रीम कोर्ट में आग लगा दी थी, जिसके चलते 25 हजार से ज्यादा केस फाइलें राख में बदल गईं। वहीं, आज सेना ने 27 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। यहां हिंसक प्रदर्शन में अब तक 24 लोगों की मौत हुई, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं।इस ऑनलाइन सभा में 5,000 से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया और सबसे ज़्यादा समर्थन पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को मिला।
बालेन शाह ने नहीं दिया जवाब: काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जिन्हें अब तक Gen-Z का पोस्टर लीडर माना जाता रहा है, उन्होंने युवाओं की अपील का कोई जवाब नहीं दिया. एक प्रतिनिधि ने कहा, ‘उन्होंने हमारी कॉल नहीं उठाई, चर्चा फिर दूसरे नामों की ओर चली गई और सबसे अधिक समर्थन सुशीला कार्की को मिला। 2,500 से ज्यादा हस्ताक्षर
कार्की ने इससे पहले पीएम पद के लिए कम-से-कम 1,000 लिखित हस्ताक्षर की शर्त रखी थी. सूत्रों के मुताबिक, अब तक उन्हें 2,500 से अधिक समर्थन पत्र मिल चुके हैं.
अन्य नामों पर भी हुई चर्चा
बैठक में कुलमान घिसिंग, सागर ढकाल और हर्का सम्पांग जैसे नामों पर भी चर्चा हुई. दिलचस्प यह रहा कि यूट्यूबर Random Nepali को भी वोट मिले, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वे तभी भूमिका लेंगे जब बाकी सभी इनकार कर देंगे.
ऐसे में दिलचस्प यह देखना होगा कि अगर सुषिला कार्की प्रस्ताव स्वीकार करती हैं, तो माना जा रहा है कि वह पहले सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल से मुलाकात करेंगी, जिसके बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की औपचारिक मंजूरी जरूरी होगी.
बता दें कि Gen-Z लोग भविष्य के नेतृत्व के लिए डिस्कॉर्ड ऐप के जरिए वोटिंग कर रहे हैं. वोटिंग के लिए अभी 23 घंटे बाकी हैं और अब तक सुशीला कार्की को सबसे ज़्यादा वोट मिले हैं.
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कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हैं, जिन्होंने 2016 में पद संभाला. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की और बाद में सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं. कार्की भ्रष्टाचार मामलों में बेखौफ और सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं. वह 2006 में संवैधानिक मसौदा समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं. 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट की एड-हॉक जज नियुक्त किया गया और 2010 में स्थायी जज बना दिया गया. 2016 में उन्होंने पहले कार्यवाहक और फिर स्थायी मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद संभाला. उन्होंने बीएचयू, वाराणसी से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है. उनकी नियुक्ति नेपाल में महिलाओं के लिए समानता और संवैधानिक अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी गई।
पूरे देश की कमान नेपाली सेना के हाथ में है:
सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल ने खुद वीडियो संदेश जारी कर आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए बुलाया। लेकिन जब कुछ ग्रुप बातचीत करने पहुँचे, तो सेना ने ही उनकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए उन्हें वापस लौटा दिया। सूत्रों के मुताबिक, पुरुषोत्तम यादव के नेतृत्व वाला दल लौटा दिया गया, जबकि एक और बयान रबीकिरन हमाल के नाम से जारी हुआ। नतीजा ये कि सेना कन्फ्यूज है और खुद आंदोलनकारी भी तय नहीं कर पा रहे कि असली लीडर कौन है। यानी, Gen-Z के साथ बातचीत का पूरा गेम गड़बड़ा गया। सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि वह देश में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कठिन समय में नागरिकों के सहयोग के लिए सेना ने उन्हें धन्यवाद दिया है। साथ ही, हाल के आंदोलन के दौरान हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक, विभिन्न अराजक तत्व और समूह अभी भी घुसपैठ कर रहे हैं और आंदोलन का फायदा उठाकर तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट, हिंसक हमले और महिलाओं पर अत्याचार की कोशिश जैसी गतिविधियों में लिप्त हैं।








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