फुलवारी शरीफ़ साजिश केस में गिरफ्तार PFI का प्रदेश अध्यक्ष से सच उगलवाने की कोशिश में एनआईए
– शांत क्षेत्र को अशांत करने का मास्टर है पकड़ा गया मासूम दिखने वाला महबूब
– शाम दंड और भेद के हर बार से युवाओं को करना था ब्रेनवाश
– सीमांचल में फैला रखा है सैकड़ों स्लीपर सेल
– भारत को 2047 तक इस्लामिक राष्ट्र बनाने का क्या था मास्टर प्लान
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: इस्लाम के नाम पर जान देने और लेने की जज्बा युवाओं में पैदा करने, 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का सपना संजोने वाले प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के बिहार प्रदेश अध्यक्ष महबूब आलम नदवी से एनआईए सच उगलवाने की कोशिश कर रही है। नदवी को बंगाल सीमांत बिहार के किशनगंज से शनिवार को पकड़ा गया। वह सुरक्षा एजेंसियों को झांसा देने के लिए एक निजी मदरसा में उर्दू शिक्षक के तौर पर काम कर रहा था। आलम की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है, क्योंकि अब एनआईए के पास पीएफआई की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी जुटाने का अवसर मिलेगा। उसके शागिर्द बताते है कि नदवी युवतियों को हिजाब लगाकर आने की नसीहत देता रहा था। अगर सीमांचल किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया पर नजर डाले तो इन दिनों कट्टरता और हिजाब का जमकर प्रचलन बढ़ा है। एजेंसी को आशंका है कि यह सीमांत क्षेत्र में अपने स्लीपर सेल तैयार किए है। जो इसके बाद इस साजिश को अंजाम देने में लगेगा।राष्ट्रीय जांच एजेंसी की टीम प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के बिहार प्रदेश अध्यक्ष महबूब आलम नदवी को 2022 के फुलवारीशरीफ आपराधिक साजिश मामले में पकड़कर पूछताछ कर रही है। इसमें एनआईए ने पहले ही कई बड़े चेहरों को बेनकाब किया है। साल 2022 के फुलवारी शरीफ आपराधिक साजिश मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष महबूब आलम नदवी को गिरफ्त में लिया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब जांच एजेंसी पहले से ही इस मामले में कई अहम आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।गिरफ्तार किया गया आरोपी महबूब आलम उर्फ महबूब आलम नदवी बिहार के जिला कटिहार के हसनगंज क्षेत्र का रहने वाला है। एनआईए ने उसे किशनगंज से दबोचा। वो इस केस में गिरफ्तार और आरोपपत्र दाखिल किए जाने वाला अहम आरोपी है। इस मामले में शुरूआती केस स्थानीय पुलिस ने दर्ज किया था। इसमें 26 लोगों को आरोपी बनाया गया था। एनआईए ने बताया कि ये मामला आरसी-31/2022/एनआईए/डीएलआई के तहत दर्ज है। इस केस में पीएफआई सहयोगियों पर गैरकानूनी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप है। एजेंसी का कहना है कि आरोपी धार्मिक दुश्मनी फैलाकर समाज में आतंक का माहौल तैयार कर रहे थे। उनकी साजिश का मकसद सार्वजनिक शांति को भंग करना था। एनआईए की जांच के अनुसार, महबूब आलम इसी खतरनाक साजिश का हिस्सा था। एजेंसी का कहना है कि आलम न केवल पीएफआई की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम कर रहा था, बल्कि भर्ती, प्रशिक्षण, बैठकों और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल था। उसने सह-आरोपियों और पीएफआई कार्यकर्ताओं के लिए धन जुटाया था। महबूब आलम की भूमिका संगठन की साजिश को जमीन पर उतारने में बेहद अहम रही। एनआईए ने यह भी साफ किया है कि पीएफआई के सदस्य भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करने की ख्वाहिश रखते थे। इसके लिए हर स्तर पर योजना बनाई गई थी। आरोपियों ने आपराधिक बल प्रयोग को भी उचित ठहराया। लोगों के बीच भय का माहौल बनाया। एजेंसी का कहना है कि यही रणनीति पीएफआई के जब्त किए गए दस्तावेजों से भी साबित होती है। फुलवारीशरीफ आपराधिक साजिश केस की जांच अब आईपीसी और यूए(पी) अधिनियम के तहत जारी है।








Hits Today : 684
Who's Online : 9