उप्र बस्ती जिले में शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन समाजवादी पार्टी के विधायक महेन्द्रनाथ यादव ने सदन में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों से जुड़े अहम मुद्दों को उठाया।सरकार से पूछा कि क्या विकास खंड स्तर पर राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज खोले जाने पर विचार किया जा रहा है और ऐसे कॉलेज खोलने के लिए क्या नियम व मानक निर्धारित हैं। विधायक ने बताया कि इस संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री ने कहा कि इंटरमीडिएट कॉलेज खोलने का कोई स्पष्ट नियम नहीं है। इस पर सपा विधायक ने सदन में कहा कि शिक्षा मौलिक अधिकार है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी सरकार शिक्षा का बाजारीकरण कर रही है और उसकी मंशा छात्रों को बेहतर शिक्षा देने की नहीं दिखती।
विधायक के प्रश्नों का उत्तर देते हुए माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने बताया कि जिन क्षेत्रों में 7 से 10 किलोमीटर की परिधि में कोई इंटरमीडिएट कॉलेज नहीं है, वहां हाईस्कूलों का उच्चीकरण कर इंटरमीडिएट शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा सुचारू रूप से दी जा रही है। इसके अलावा विधायक महेन्द्रनाथ यादव ने एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से मुख्यमंत्री से पूछा कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से केवल 50 प्रतिशत धनराशि दिए जाने से क्या गरीबों का पूरा इलाज संभव हो पा रहा है। मुख्यमंत्री की ओर से लिखित उत्तर में बताया गया कि तात्कालिकता और औचित्य के आधार पर निर्धन व्यक्तियों को आर्थिक सहायता दी जाती है और इस व्यवस्था में किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। एक अन्य अतारांकित प्रश्न में विधायक ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में सड़कों के निर्माण की जानकारी मांगी। मुख्यमंत्री की ओर से बताया गया कि इस अवधि में नए मार्गों का निर्माण नहीं हुआ है, बल्कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-3 के तहत क्षतिग्रस्त मार्गों का उच्चीकरण और चौड़ीकरण कराया गया है। साथ ही ग्राम सड़क योजना-4 के अंतर्गत अर्ह बसावटों को सर्वऋतु संपर्क मार्गों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।








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