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अशोक झा/ कोलकाता:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘टॉर्चर कमीशन’ बताते हुए उस पर तुगलकी तरीके से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए बिहार में जिन दस्तावेजों को मान्यता मिली, वे बंगाल में क्यों खारिज हुए। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला किया। उन्होंने आयोग को ‘टॉर्चर कमीशन’ बताया और हिटलर और तुगलकी अंदाज में काम करने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि क्या कोई ‘तुगलकी आयोग’ चुनाव कराता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग जिलाधिकारियों को निर्देश दे रहा है और चेतावनी दी कि अगर किसी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो उनकी पार्टी इसका तीव्र विरोध करेगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष एसआईआर प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग को पूरा सहयोग देगी, लेकिन किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह आयोग के सभी लोगों को दोषी नहीं ठहरा रहीं, बल्कि एक व्यक्ति को जिम्मेदार मानती हैं और जनता के हित में जेल जाने या किसी भी कुर्बानी के लिए तैयार हैं। ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं पीछे नहीं हटूंगी। अगर कुछ लोग 420 हैं, तो मैं 440 वोल्ट हूं।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि आयोग राज्य के अधिकारियों पर कार्रवाई करता है, तो राज्य सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी को पदावनत किया जाता है, तो राज्य उसे पदोन्नत करने पर भी विचार कर सकता है।
कैबिनेट के हालिया निर्णय का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रोबेशन अवधि पूरी कर चुके और बीडीओ के रूप में सेवा दे चुके अधिकारियों को एसडीओ पद पर पदोन्नति देने का प्रावधान किया गया है। उनका कहना था कि राज्य प्रशासन को दबाव में नहीं आने दिया जाएगा।
दस्तावेजों को लेकर दोहरे मापदंड का आरोप
ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया में दस्तावेजों की स्वीकृति को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ राज्यों में जिन दस्तावेजों को मान्यता दी गई, वही पश्चिम बंगाल में स्वीकार नहीं किए जा रहे। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सूचीबद्ध कागजातों को समान रूप से मान्यता नहीं मिल रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। निलंबित अधिकारियों पर राज्य का रुखहाल ही में आयोग ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया था। राज्य सरकार का कहना है कि ये अधिकारी अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगे रहेंगे और उनके खिलाफ अंतिम निर्णय जांच के बाद ही लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे प्रक्रिया संबंधी मुद्दा बताते हुए कहा कि बिना पर्याप्त स्पष्टीकरण के कठोर कार्रवाई उचित नहीं है।
बढ़ता चुनावी तनाव
SIR को लेकर चल रहा यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। आने वाले दिनों में यह टकराव चुनावी रणनीतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर असर डाल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची का मुद्दा आगामी चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।









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