उप्र बस्ती जिले में दिव्यांग प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े की आशंका सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पांच संदिग्ध आवेदनों की पहचान हुई है। डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने संबंधित आवेदकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए हैं। विभाग की टीम मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर उन्हें कार्यालय बुला रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ आवेदकों से फोन पर संपर्क भी हुआ है, लेकिन वे अब तक सीएमओ कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। विभागीय स्तर पर इसकी भी पड़ताल की जा रही है कि आखिर आवेदक जांच के लिए सामने क्यों नहीं आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सिद्धार्थनगर के बाद बस्ती में भी फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए जाने का मामला सामने आया है। आशंका है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने के बाद उन्हें पोर्टल पर अपलोड कराया जाता है। पोर्टल पर प्रमाणपत्र स्वीकृत होने के बाद यूडीआईडी कार्ड जारी हो जाता है। इसके आधार पर पात्रता के अनुसार दिव्यांगजनों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जा सकता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रमाणपत्र तैयार करने के लिए सीएमओ और चिकित्सकों की मुहर का इस्तेमाल किया गया है। केवल मुहर देखकर यह पता लगाना आसान नहीं है कि प्रमाणपत्र वास्तविक है या फर्जी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण करने पर ही गड़बड़ी पकड़ में आती है।
डॉ. एके चौधरी ने बताया कि पांच संदिग्ध दिव्यांग प्रमाणपत्रों से जुड़े आवेदन जांच में मिले हैं। संबंधित आवेदकों को नोटिस जारी कर प्रमाणपत्रों के संबंध में स्पष्टीकरण और जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या प्रमाणपत्र फर्जी साबित हुए तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने में किसी की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।









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