शंभू शरण पाल हत्याकांड में वर्ष 2017 में जिला न्यायालय ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा, साढ़े नौ साल की सजा काट चुके हैं पूर्व मंत्री
प्रयागराज/बस्ती। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंभू शरण पाल हत्याकांड में दोषी पूर्व मंत्री और सपा नेता रामकरन आर्य को राहत देते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को 10 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने घटना को अचानक हुए विवाद और आवेश का परिणाम मानते हुए कहा कि हत्या का पूर्व नियोजित इरादा साबित नहीं होता। अदालत ने अपराध को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में माना।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पूर्व विधायक की अपील पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। रामकरन आर्य ने जिला न्यायालय से मिली उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वह साढ़े नौ साल की सजा काट चुके हैं। ऐसे में फैसले के बाद उनके करीब छह महीने में रिहा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रिहाई की वास्तविक स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया और जेल प्रशासन की गणना पर निर्भर करेगी।
जीप की टक्कर के बाद विवाद में चली थी गोली
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 23 नवंबर 1994 की है। जीप की टक्कर के बाद हुए विवाद और कहासुनी के दौरान रामकरन आर्य ने शंभू शरण पाल को गोली मार दी थी। गोली लगने से शंभू शरण पाल की मौत हो गई थी। इसी मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चला था।
करीब 22 साल तक चली सुनवाई के बाद 10 अप्रैल 2017 को जिला न्यायालय ने तत्कालीन सपा विधायक और पूर्व मंत्री रामकरन आर्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले में नामजद 10 आरोपियों में से एक की मौत हो चुकी थी। शेष नौ आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई, जिनमें आठ को दोषमुक्त कर दिया गया था, जबकि रामकरन आर्य को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
मृतक के बेटे ने की थी मुकदमे की पैरवी
इस मामले में शंभू शरण पाल के बेटे शिव बहादुर पाल ने अदालत में मुकदमे की पैरवी की थी। 10 अप्रैल 2017 को फैसला सुनाए जाने के दौरान दीवानी न्यायालय परिसर के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। फैसला आने के बाद शिव बहादुर पाल ने कहा था कि पिता की हत्या के मामले में आरोपी को सजा मिलने से उन्हें कुछ राहत महसूस हुई है।
चार बार विधायक और तीन बार मंत्री रहे रामकरन आर्य
रामकरन आर्य समाजवादी पार्टी की सरकार में आबकारी एवं खेलकूद विभाग के राज्य मंत्री रहे। वह चार बार विधायक चुने गए और तीन बार मंत्री बने। वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर नगर पूरब, वर्तमान महादेवा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर उन्होंने विधानसभा में प्रवेश किया।
वर्ष 1993 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद वर्ष 2002 और 2012 में भी सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।









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