उप्र बस्ती जिले में जमीन की मेड़, सीमांकन और कब्जे को लेकर होने वाले विवादों के निस्तारण में अब आधुनिक तकनीक मददगार बनेगी। शासन के निर्देश पर जिले में जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) आधारित डिजी रोवर से भूमि की पैमाइश कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इस तकनीक से जमीन की पैमाइश में महज करीब तीन सेंटीमीटर तक की त्रुटि की गुंजाइश रहेगी। इससे सीमांकन अधिक सटीक और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू किए गए इस विशेष अभियान की अवधि डेढ़ माह निर्धारित की गई है। जिले की चारों तहसीलों को डिजी रोवर मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं। भानपुर तहसील में लेखपालों को मशीन के संचालन और उससे सटीक पैमाइश करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद राजस्व टीमों के माध्यम से सीमांकन और पैमाइश का काम तेज किया जाएगा।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य धारा-24 के तहत सीमांकन और भूमि पैमाइश से जुड़े लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करना है। अक्सर खेत की मेड़ खिसकने, जमीन की सीमा को लेकर भ्रम या कब्जे के आरोपों के कारण विवाद लंबे समय तक चलते हैं। नई तकनीक से ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल नक्शे से दर्ज होगी जमीन की वास्तविक स्थिति
जीएनएसएस रोवर सैटेलाइट से लगातार सिग्नल लेकर जमीन की स्थिति निर्धारित करता है। यह सीओआरएस नेटवर्क से जुड़कर सेंटीमीटर स्तर तक सटीक माप उपलब्ध कराता है। पैमाइश के दौरान तैयार आंकड़ों का डिजिटल नक्शे और राजस्व अभिलेखों से मिलान किया जा सकता है। इससे अनुमान या मानवीय त्रुटि की गुंजाइश कम होगी।
पैमाइश के बाद तैयार डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। भविष्य में मेड़ कटने या जमीन की सीमा को लेकर विवाद होने पर यही रिकॉर्ड मददगार साबित हो सकता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे किसानों और भू-स्वामियों को समय पर राजस्व सेवाएं मिलेंगी और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।
तकनीक से क्या बदलेगा
- सेंटीमीटर स्तर तक सटीक भूमि पैमाइश।
- सीमांकन में मानवीय त्रुटि की संभावना कम होगी।
- खेत और जमीन का डिजिटल नक्शा तैयार होगा।
- पैमाइश का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकेगा।
- भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी।
- किसानों और भू-स्वामियों को अधिक पारदर्शी सेवा मिलेगी।








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