– किशनगंज का बनाया गया प्रभारी, 90 फीसदी हिंदू मतदाताओके बीच होते है निर्वाचित
अशोक झा/ पटना : हार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। बीजेपी के दो उपमुख्यमंत्रियों समेत कैबिनेट में कुल 26 ने मंत्री पद की शपथ ली है। नीतीश कुमार के इस मंत्रिमंडल में एक मात्र मुस्लिम विधायक जमा खान को शामिल किया गया है।नीतीश की नई सरकार में मुस्लिम मंत्री के तौर पर मोहम्मद जमा खान का नाम सामने आ रहा है. उन्होंने चैनपुर विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल के बृज किशोर बिंद को 8362 वोटों से हराया था. जमा खान ने 2020 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर जीता था और बाद में वो जेडीयू में चले गए थे. जमा खान का चैनपुर में दबदबा रहा है. नीतीश कुमार ने पिछली बार जमा खान को पार्टी में लेने के साथ अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।इस नए मंत्रिमंडल में कुल 26 मंत्रियों को जगह दी गई है, जिसमें बीजेपी, जेडीयू और सहयोगी दलों के नेताओं का संतुलित मिश्रण नजर आ रहा है।इस बार खास ध्यान अल्पसंख्यक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर दिया गया है। चैनपुर से विधायक जमा खान को भी मंत्री बनाया गया है, जो अब नीतीश सरकार में एक महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभरे हैं। 2020 में बसपा के एकमात्र विधायक के रूप में चर्चा में आए जमा खान ने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे और अब वे दोबारा नीतीश मंत्रिमंडल का हिस्सा बनकर अपनी भूमिका मजबूत कर रहे हैं।जमा खान, अल्पसंख्यक समाज का भरोसेमंद चेहरा: जेडीयू ने अपने भरोसेमंद और अनुभवी नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी है। विजय चौधरी, अशोक चौधरी, बृजेंद्र यादव, श्रवण कुमार जैसे नाम फिर से मंत्री बने हैं। इसके साथ ही ज़मा खान की भी वापसी हुई है, जिन्हें अल्पसंख्यक समुदाय का अहम चेहरा माना जाता है। जमा खान को एक बार फिर मंत्री बनाकर जेडीयू ने यह संदेश दिया है कि पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहती है। वे कैमूर जिले के चैनपुर से विधायक हैं और अपने स्थानीय क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखते हैं।
जमा खान का अब तक का सफर: जमा खान का जन्म कैमूर के नौघरा गांव में हुआ। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई वाराणसी में की। उनका परिवार पहले हिंदू राजपूत था जिसने बाद में इस्लाम धर्म अपनाया, लेकिन आज भी उनके परिवार में दोनों धर्मों का जुड़ाव दिखाई देता है। इससे वे एक अनोखी सामाजिक पृष्ठभूमि के नेता माने जाते हैं।
2005 में बसपा से राजनीति शुरू करने के बाद तीन चुनावी हारों ने उनका रास्ता और मुश्किल बना दिया। लेकिन 2020 में उन्होंने बसपा के टिकट पर पहली बड़ी जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंचे। उनका यह सफर बताता है कि वे कभी हार नहीं मानते। 2021 में उन्होंने जेडीयू जॉइन की और तुरंत ही अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बना दिया गया। अब नई सरकार में उन्हें दोबारा मंत्री बनाना इस बात का संकेत है कि पार्टी उनके काम और उनकी पकड़ दोनों को महत्व देती है।
जमा खान की संपत्ति और आर्थिक स्थिति जमा खान की कुल घोषित संपत्ति करीब 1.57 करोड़ रुपये है, जिसमें जमीन-जायदाद, बैंक बैलेंस और कुछ चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। उनके पास ग्रामीण क्षेत्र में स्थित पुश्तैनी जमीन भी है, जिसकी बाजार कीमत समय के साथ बढ़ी है। इसके अलावा उनके नाम पर कुछ कृषि भूमि और घरेलू उपयोग की संपत्तियां भी दर्ज हैं। उन पर करीब 16.8 लाख रुपये का कर्ज है, जिसमें बैंक से लिया गया लोन और अन्य वित्तीय देनदारियां शामिल हैं। यह दिखाता है कि वे बड़े उद्योगपतियों या कारोबारी घरानों की तरह भारी संसाधनों वाले नेता नहीं हैं।










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