
– अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी, श्री विष्णु के साथ कुबेर की होगी पूजा
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इसे अबूझ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। अक्षय का अर्थ होता है जो कभी क्षय न हो यानी जो नष्ट न हो। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी कार्य, विशेष रूप से खरीददारी या निवेश, स्थायी रूप से फल देता है और उसमें निरंतर वृद्धि होती है। इसी कारण इस दिन लोग अपनी योग्यता के अनुसार सोना-चांदी आदि खरीदते हैं। यही कारण है कि ग्राहकों की मांग को देखते हुए एनएस ज्वेलर्स की नई शाखा वर्धमान रोड में खुल रही है। एनएस ग्रुप की ओर से कहा जा रहा है कि इस नए शो रुम में ग्राहकों के लिए वह सारी जेवरों की सुविधाएं होगी जो वह चाहते है। जानकारों की माने तो अगर सोना खरीदना संभव न हो तो चांदी, पीतल या अन्य शुभ वस्तुएं भी खरीदी जा सकती हैं। इस दिन थोड़ा-बहुत निवेश करना भी शुभ माना जाता है। इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर काफी असमंसज की स्थिति बनी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसके अलावा इस दिन माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य हुआ थाऔर भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अक्षय पात्र प्रदान किया था,जिससे कभी भोजन समाप्त नहीं होता था। यही कारण है कि इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा भी है। इतना ही नहीं कहा जाता है कि इसी दिन सुदामा और श्रीकृष्ण का मिलन हुआ था और त्रेता युग की शुरुआत भी इसी दिन मानी जाती है। इस प्रकार अक्षय तृतीया एक अत्यंत शुभ और फलदायी दिन है। इस दिन पूजा-पाठ, धार्मिक ग्रंथों का पाठ, मंदिर दर्शन आदि करना उत्तम माना जाता है।









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