
अशोक झा/ कोलकाता: मनी लॉन्ड्रिंग केस में आज प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने कई ठिकानों पर छापेमारी की है। ये छापे कोलकाता, बर्धमान और हाबड़ा में स्थित आपूर्तिकर्ताओं और निर्यातकों के 9 परिसरों पर मारे गए हैं।इस केस का लिंक संबंध नीरंजन चंद्र साहा और अन्य लोगों से बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस प्रकार के धंधे में उत्तर बंगाल से भी शिकायतें मिल रही है। जल्द ही ईडी का शिकंजा उत्तर बंगाल में भी कसेगा। कार्रवाई कथित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले से जुड़े मामले में हुई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस की टीम ने शनिवार को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम-2002 (पीएमएलए) के तहत यह कार्रवाई की। जिन ठिकानों पर छापेमारी हुई है, वह राशन वितरण घोटाले के मामले में आरोपी निरंजन चंद्र साहा और अन्य लोगों से जुड़े हैं। हाबरा में एक कारोबारी के ठिकानों पर छापा मारा।
इस मामले में ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की। यह एफआईआर 23 अक्तूबर 2020 को बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर घोझाडांगा एलसीएस के सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए तय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है।
बड़े पैमाने पर गेंहू की कालाबाजरी:
ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। यह एफआईआर बसीरहाट पुलिस स्टेशन में घोजाडांगा एलसीएस के कस्टम्स के डिप्टी कमिश्नर की शिकायत पर दर्ज की गई थी।शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का गेहूं बड़े पैमाने पर गलत तरीके से हटा या बेचा गया था। ईडी अब इस पूरे धन शोधन नेटवर्क और उससे जुड़े कारोबारियों की भूमिका की जांच कर रही है।जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के गेहूं को गलत तरीके से इधर-उधर करने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया। यह गेहूं आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंसधारी वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से अनधिकृत माध्यमों के जरिए कम कीमत पर हासिल किया गया था। इसके बाद बड़ी मात्रा में गेहूं को सप्लाई चेन से अवैध रूप से हटाकर कई जगहों पर इकट्ठा किया गया.इस गेहूं की असली पहचान छिपाने के लिए आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के निशानों वाले मूल जूट के बोरों को हटाया या उल्टा कर दिया और नए तरीके से भर दिया। इससे गेहूं की पहचान छिप गई और उसे वैध स्टॉक बताकर खुले बाजार में बेच दिया गया या निर्यात किया गया. इस पूरी प्रक्रिया के जरिए आरोपियों ने अनुचित लाभ कमाया और इससे खूब मुनाफा कमाया है।









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